पानी के लिए तरस रहे गांव
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पानी के लिए तरस रहे गांव

रायगढ़. बरमकेला ब्लाक के ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर जल संकट की स्थिति बनी हुई है। पानी के इन्हें दूसरे क्षेत्रों का मुंह ताकना पड़ रहा है। सूखी नलों की टोंटिया और बिगड़े हैंडपंप इन लोगों को चुनौतियां दे रही हैं।आग उगलती धूप मील भर पैदल जाकर पानी की व्यवस्था करना इन लोगों की नियति बन चुकी है।

बिजली की आंखमिचौली के बीच इन लोगों की समस्था दिन ब दिन गंभीर होते जा रही हैं। इस गर्मी से जहां क्षेत्र का जलस्तर काफी गिर चुका है वहीं जिन गांवों में कभी विशाल तालाब हुआ करते थे वह आज डबरी के रूप में बदल गए हैं।

ग्रामीणों की मजबूरी भी ऐसी है कि इन दलदलनुमा पानी में वे गर्मी में ठंडक खोजते मवेशियों के साथ स्नान करने तक से परहेज नहीं कर रहे। लोगों को अब तो जल्द वर्षा की आस है कि कब मूसलाधार बारिश हो और पानी की समस्या से छुटकारा मिल सके।

बरमकेला ब्लाक के अंतर्गत आने वाले लोग गांव के हजारों लाग भीषण गर्मी में पानी की समस्या से जूझ रहे हैं जिनकी सुनवाई कहीं नहीं है। तकरीबन 6 हजार की आबादी वाले ग्राम पंचायत बार में फरवरी माह से जल समस्या शुरू हो गई थी। गांव के 20-25 हैंड पंप ने मार्च के बाद जवाब दे दिया।

अप्रैल-मई माह में भीषण गर्मी के बीच समूचा गांव पानी की विकट समस्या से दो-चार हो रहा है। ग्राम पंचायत द्वारा हाल ही में चार-पांच स्थानों पर टच्यूबवेल खनन कराया गया है, जिसमें दो ही जगह खनन सफल रहा।

देवगांव के सरपंच लोचन प्रसाद पटेल का कहना है कि बीते अप्रैल माह से आस-पास क्षेत्र में जल संकट की स्थिति है। पांच हजार की जनसंख्या वाले इस गांव में 20 हैंड पंपों में से महज दो ही काम कर रहे हैं। दर्जनभर तालाब सूखे पड़े हैं। जल समस्या को देखते हुए गांव में दो बोर भी कराए गए।

लेकिन, पानी की समस्या बरकरार है। इसी तरह कंचनपुर गांव में कुछ वर्ष पूर्व नल-जल योजना के तहत बनाई गई पानी टंकी ने प्रचंड गर्मी के आते ही जवाब दे दिया। यहां के घुराऊ सिदार, सुदर्शन कुम्हार का कहना है कि गांव के चार-पांच हैंड पंप बंद पड़े हुए हैं।



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