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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. बिलासपुर जोन बनने के साथ ही लदान और ट्रेनों की संख्या में वृद्धि हुई है। अब यात्री और गुड्स ट्रेनों को मिलाकर हर दिन सौ से ज्यादा ट्रेनें जोन से गुजर रहीं हैं। भारी यातायात का दबाव हसदेव नदी के बूढ़े पुल पर पड़ने लगा है। इस पुल के रिवेट ढीले हो गए हैं। यह वही उपकरण है, जो पुल के गर्डर को जोड़कर रखता है।
जानकार बताते हैं कि रिवेट के ज्यादा ढीला होने से ट्रेन पटरी से उतर भी सकती है। वैसे भी इस पुल पर तकरीबन 12 साल पहले अहमदाबाद एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई थी, जिसमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। जुलाई 2007 में पुल को ब्रिज विभाग ने परिचालन अयोग्य भी ठहराया था।
इसके बाद पुल को ठीक करने का काम शुरू हुआ। करोड़ों रुपए खर्च कर पुल को एक बार फिर ट्रेनों को गुजारने के लायक बनाया गया। इन घटनाओं के बाद रेल प्रशासन पुल पर पैनी निगाह रख रहा है। रिवेट ढीले होने की खबर लगते ही प्रशासन ने पुल का मेंटेनेंस शुरू कर दिया है।
इसी माह शुरू हुए इस काम को डेढ़ माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मेंटेनेंस के कारण ट्रेनों की चाल भी प्रभावित हो रही है। यहां से गुजरने वाली ट्रेनों के ड्राइवरों को 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पुल पार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए पुल पर संकेत भी लगाए गए हैं।
ब्रिज विभाग के एक अधिकारी की मानें तो पुल के रिवेट का मेंटेनेंस हर तीसरे साल में होता है। वर्ष 2006 के बाद एक बार फिर रिवेट का मेंटेनेंस किया जा रहा है।