शिमला. हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से संबद्ध निजी कॉलेज को हर हाल में स्थाई स्टाफ रखना होगा। यह कहना है वीसी प्रो. सुनील गुप्ता का। उन्होंने कहा है कि यही नहीं, इन कॉलेजों को यूजीसी, एनसीटीई, एआईटीसी, बीसीआई, एमसीआई और डीसीआई के नियमों के मुताबिक अपने स्टॉफ को वेतन देना होगा।
वेतन नगद की जगह कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में जमा कराना होगा। उन्होंने कहा है कि ऐसा न करने पर इन कॉलेजों को नया बैच बिठाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
इस व्यवस्था से निजी कॉलेजों के हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी। प्रदेश में एचपीयू से संबद्ध 170 प्राइवेट शिक्षण संस्थान हैं। मान्यता के मापदंड पूरे न करने और क्वालिफाइड स्टाफ न रखने पर यह कॉलेज हर बार प्रोविजनल एफिलिएशन लेते हैं। यूनिवर्सिटी ने प्राइवेट कॉलेजों में नया बैच बिठाने से पहले उनके निरीक्षण का निर्णय भी लिया है। इसके लिए विषय विशेषज्ञ के नेतृत्व में समितियां बनाई गई हैं।
यह समितियां देखेंगी कि कि कॉलेजों में स्थायी स्टाफ है कि नहीं। यूनिवर्सिटी ने प्रबंधकों को आदेश दिए हैं कि शिक्षकों की नियुक्तियां भी सबजेक्ट एक्सपर्ट के माध्यम कराई जाएं। इस समिति में वीसी का मनोनीत सदस्य भी होगा। यूनिवर्सिटी को शिकायतें मिलती रही हैं कि कॉलेज प्रबंधक कभी भी स्टाफ को तय वेतन नहीं देते। अगर स्टाफ ने इसकी मांग की कि तो उन्हें नौकरी से हटा दिया जाता था। इसलिए स्टाफ का बैंक खाता खोलना अनिवार्य किया गया है।