उजड़ने के डर से पोलड़ में दूसरे दिन भी नहीं जला चूल्हा
Elections 2009 Divya Bhaskar Business Bhaskar Indiainfo DNA 3Dsyndication MyFM Mera Mobi


उजड़ने के डर से पोलड़ में दूसरे दिन भी नहीं जला चूल्हा

सीवन। गांव उजड़ने के डर के कारण रविवार को गांव पोलड़ के एक भी घर में चूल्हा नहीं जला, बल्कि ग्रामीणों ने नौगजा पीर की मजार पर भंडारा लगाया और बच्चों को भूखा प्यास देख सारे गांव के बच्चों, महिलाओं व पुरूषों ने भंडारे में भोजन ग्रहण किया।

दोपहर तक किसी भी घर में चूल्हा न जलने के कारण दोपहर तक किसी भी ग्रामीण ने अन्न का दाना तक खाया। डीसी के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने लंगर चखा और पीर की मजार पर मथा टेक कर मन्नत मांगी ताकि गांव उजड़ने से बच सके। सभी ग्रामीण अपने-अपने घरों को छोड़ कर पीर की मजार पर पूजा अर्चना करते रहे।

डीसी ने ग्रामीणों को वार्ता के लिए बुलाया

पुरातत्वविभाग द्वारा गांव की चारदीवारी निकलवाने के दिए गए नोटिस के बाद डीसी अमनीत पी कुमार ने ग्रामीणों को वार्ता के लिए कैथल कार्यालय में बुलाया। वार्ता में डीसी अमनीत पी कुमार व एडीसी सुमेधा कटारिया और गांव की कमेटी ने भाग लिया डीसी ने ग्रामीणों की समस्या को जायज मानते हुए उसका समाधान करने का विश्वास दिलाया है।

ग्रामीणों की एक ग्यारह सदस्यीय कमेटी विमल कुमार नंबरदार के नेतृत्व में डीसी से मिले कमेटी में कृष्ण कुमार, मंगलाराम, बलदेव सिंह, श्रवण कुमार, दिलबाग सिंह, बचन सिंह, प्रवीण कुमार, सुूरत सिंह थे। विमल नंबरदार ने बताया कि डीसी और ग्रामीणों के बीच लगभग आधा घंटा वार्ता हुई।

वार्ता के दौरान डीसी ने उन्हें विश्वास दिलाया कि पहले ग्रामीणों और पुरातत्व विभाग के बीच खुली वार्ता की जाएगी और समाधान के लिए कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा ताकि ग्रामीणों का भी नुकसान न हो और पुरातत्व विभाग को भी संतुष्ट किया जा सके।

50 व्यक्ति हैं सरकारी कर्मचारी

गांव में लगभग 50 व्यक्ति सरकारी नौकरी पर हैं। यही नहीं गांव का एक व्यक्ति जज की पोस्ट पर भी है। गांव पोलड का एक व्यक्ति बलवंत सिंह आर्य चंडीगढ़ में जज की पोस्ट पर है, एक डाक्टर, 8 पुलिस में, 6 शिक्षा विभाग में, 7 रोडवेज में, 1 डाक विभाग में, 1 पटवारी, 1 मार्केट कमेटी, 4 विद्युत विभाग में, 1 व्यक्ति विभाग और एक महिला शिक्षा विभाग में है।



   Bookmark and Share




अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: