अम्बाला । चीनी के दाम कम होने की बाट जोह रहे लोग इसकी उम्मीद छोड़ ही दें तो अच्छा होगा। क्योंकि लगातार तीसरे साल भी गन्ने का रकबा घटना जारी है। आम आदमी के साथ शुगर इंडस्ट्री के लिए तो यह चिंता की बात है, प्रति एकड़ उत्पादन कम होने से किसानों के लिए भी राहत नहीं है।
प्रदेश सरकार और प्राइवेट शुगर मिलों ने गन्ने का रकबा बढ़ाने के लिए इस बार पूरा जोर लगाया था। मगर 2009-10 के लिए गन्ने का रकबा घटकर 2.05 लाख एकड़ रह गया है जो 2008-09 में 2.34 लाख एकड़ था। जबकि 2007-08 में 4.70 लाख एकड़। यानि इस साल गन्ने का रकबा 11 फीसदी गिर गया है।
चिंता इस बात को लेकर है कि पिछले तीन सालों में इसमें 56 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। गन्ने के घटते रकबे और पैदावार की वजह से रसोई का बजट भी प्रभावित हो रहा है।
देश के लिए भी चिंता का विषय
शुगर इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक गन्ने का रकबा और उत्पादन घटना देश के लिए भी चिंता का विषय है। क्योंकि देश के बफर स्टॉक में 255 लाख टन चीनी है जबकि सलाना डिमांड 215 लाख टन है। बफर स्टॉक में 145 लाख टन इस साल का उत्पादन, 80 लाख टन पिछले साल का स्टॉक और 30 लाख टन आयतित चीनी शामिल है। अगले वित्त वर्ष में चीनी स्टॉक सिर्फ 40 लाख टन रहने की उम्मीद है जो दो महीने की जरूरत ही पूरा कर सकता है ।
विशेषज्ञों के मुताबिक गन्ने का रकबा घटने के पीछे मौसम में आ रहा बदलाव, गन्ने की पुरानी किस्मों में बीमारियां बढ़ना, उत्पादन में कमी और लेबर की समस्या होना शामिल है।
हरियाणा शुगर फेडरेशन के अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2006-07 में प्रति हेक्टेयर उत्पादन 70 टन था अब घटकर औसतन 41.5 टन प्रति हेक्टेयर रह गया है। किसानों का कहना है कि उत्पादन घटने की वजह से गन्ना किसानों के लिए ज्यादा फायदे का सौदा नहीं रहा।