शिमला. आईजीएमसी ने एमबीबीएस का नया सेशन शुरू होते ही जूनियर मेडिकोज को प्रोफेसरों और सहायक प्रोफेसर के गाइडेंस में देने की तैयारी शुरू कर दी है। रैगिंग को जड़ से खत्म करने का आईजीएमसी का यह नहीं तरीका निकाला है।
इससे पहले आईजीएमसी में जूनियर छात्रों पर नजर रखने के लिए केवल एंटी रैगिंग कमेटी ही काम करती है। कॉलेज ने अपनी इस योजना को अंतिम रूप भी दे दिया है। ये प्रोफेसर जूनियर छात्रों को कक्षाओं से लेकर हॉस्टल तक अपनी निगरानी में रखेंगे और किसी भी तरह की मारपीट और छेड़खानी की घटना होते ही मौके पर कार्रवाई करेंगे।
आईजीएमसी में प्रतिवर्ष नए सैशन में 65 एमबीबीएस छात्रों का बैच बैठता हैं। ऐसे में इन छात्रों को गाइड करने के लिए 13 प्रोफेसरों को नियुक्ति किया जाएगा। इन टीचरों को नए छात्रों के फोन नंबरों की सूची दी जाएगी। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि एक प्रोफेसर के तहत पांच छात्रों को दिया जाएगा। किसी भी घटना होने पर छात्र सीधे शिकायत अपने गाइड से कर सकते हैं।
यही नहीं प्रोफेसर अपनी निगरानी में आने वाले छात्रों से समय समय पर काउंसलिंग करते रहेंगे। नए सेशन में आईजीएमसी पेरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन का भी गठन कर रहा हैं। पीटीए के गठन से कॉलेज में रैंगिग को लेकर नए नियम भी बनाए जाएंगे। सीनियर छात्रों के अभिभावकों को भी इसमें शामिल किया जएगा, कॉलेज में होने वाले किसी भी घटना के लिए पीटीए भी जिम्मेवार रहेगा।
आईजीएमसी के एमएस डॉ.एसएस मिन्हास का कहना है कि प्रोफेसरों की गाइडेंस में जूनियर छात्रों को रखना जरुरी है। इससे कॉलेज कैंपस में जीरों को रैगिंग को बरकरार रखा जा सकता है। इससे जूनियर छात्रों को खुला माहौल भी मिलेगा।