इंदौर. सोमवार को आईआईटी-जेईई (ज्वॉइंट एंट्रेंस एक्जामिनेशन) के नतीजे घोषित हुए। इनमें देशभर के 10035 छात्रों ने सफलता हासिल की। फरीदाबाद के नितिन जैन अव्वल रहे। आईआईटी में शहर से ही 350 से ज्यादा छात्रों को प्रवेश की उम्मीद है। यह पिछली सफलता से 10 प्रतिशत अधिक है। 15वीं रैंक पर कब्जा जमाने वाले अंकुर बापना शहर में पहले, 30 रैंक पर श्रीकांत नागोरी दूसरे और 76वीं रैंक वाले मेहुल जैन तीसरे स्थान पर रहे।
जेईई में मिली रैंक के आधार पर ही सभी आईआईटी की 723क् सीटों के अलावा बीएचयू, वाराणसी और इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स यूनिवर्सिटी, धनबाद में में बीटेक कोर्स के लिए प्रवेश मिलता है। इन्हें मिलाकर सीटों की संख्या 8530 होती है। 12 अप्रैल को हुई जेईई में देशभर से 384977 छात्रों ने हिस्सा लिया था। शहर के परिणाम में 10 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ हुई है।
शहर के साढ़े तीन सौ से ज्यादा स्टूडेंट्स ने इस ख्वाब को हकीकत में बदला है
सोमवार को घोषित हुए जेईई के नतीजों में एक बार फिर शहर के स्टूडेंट्स बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर आईआईटी में अपनी जगह बनाई है। देर रात तक मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ इंदौर से ही करीब ३50 से ज्यादा स्टूडेंट्स को सफलता मिली है। देशभर में १५ वे स्थान पर रहे अंकुर बापना शहर में अव्वल रहे।
5 घंटे ही काफी हैं
जेईई में ऑलक्ष्ंडिया १५ रैंक लाने वाले अंकुर बताते है मैथ्स में मेरी पकड़ नानाजी डॉ. एस.के. जैन के कारण बन पाई है, मैथ्स में एक्सपर्ट होने से मुझे बहुत फायदा मिला। वे मानते हैं पढ़ाई टेंशन लेकर नहीं हो सकत। उसके लिए फ्री माइंड होना चाहिए। जेईई जैसी एक्जाम के १२-१२ घंटे पढ़ने की जरूरत नहीं है। रोजाना पांच घंटे में भी तैयारी की जा सकती है। पापा शिरीष और मां नीलिमा बापना का फर्नीचर का बिजनेस है। वे कहते हैं बेटे को कभी पढ़ने के लिए दबाव नहीं बनाया, उसकी मर्जी से पढ़ने की आजादी दे रखी थी।
कानपुर से बीटेक करूंगा
जेईई में 30 रैंक लाने वाले श्रीकांत का सपना आईआईटी कानपुर से बीटेक करना है। वे बताते हैं कई बार तैयारी करते समय मेरा आत्मविश्वास कम होता था लेकिन टीचर्स और माता-पिता ने हर परिस्थिति में साथ दिया। फिजिक्स के पेपर से अच्छे मार्क्स लाने में कामयाब हुआ। टाइम मैनेजमेंट के साथ टेस्ट सीरिज में पूछे जाने वाले सवाल हल किए। अंकुर को उम्मीद नहीं थी कि उन्हें पहले प्रयास में ही मंजिल मिल जाएगी।
१२वीं के साथ आईआईटी जेईई की तैयारी करना चुनौतीभरा था लेकिन इलेक्ट्रानिक्स में रिसर्च करने का ख्वाब उन्हें यहां तक ले आया। अंकुर वे स्टूडेंट है जिन्होंने जेईई में ऑलक्ष्ंडिया 15वीं रैंक लाकर शहर का नाम तो रोशन किया ही है ये भी सिद्ध कर दिया है कि यहां के युवाओं में इतना जज्बा है की कोई भी परीक्षा उनकी मेहनत के सामने कुछ नहीं है। अब देखना है इनमें से कितने स्टूडेंट को आईआईटी में प्रवेश मिलता है।
आईआईटी रूडकी में भी छाया इंदौर
आईआईटी रूडकी में एडमिशन के लिए होने वाली आईआईटी रुडकी एमसीए-2009 में भी इंदौर छा गया। शहर के दो स्टूडेंट्स टॉप 20 में जगह बनाने में कामयाब रहे। दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए भी एक स्टूडेंट का सिलेक्शन हुआ है। आईआईटी रुडकी की केवल 42 सीटें हैं। इन सीटों के लिए हुई एक्जाम में देशभर से 70 हजार और इंदौर से 650 स्टूडेंट शामिल हुए। जितेंद्र मिश्रा एकेडमी की स्टूडेंट अकांक्षा शर्मा की ऑल इंडिया 10वीं रैंक रही। यहीं के चंचल एवले 15वें स्थान पर रहे।
मेहनत के बूते जीता आसमां
आकांक्षा कहती हैं मैंने काफी तैयारी की थी। होलकर साइंस कॉलेज से बीएससी कम्प्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन करने वाली अकांक्षा कहती हैं अब आईआईटी रूडकी से कॉल का इंतजार है। मेरा सपना दुनिया की टॉप सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब करने की है। जैसे ही मुझ रिजल्ट के बारे में पता चला सबसे पहले मैंने मंदसौर फोन कर पापा को बताया। अब पूरी फैमिली के साथ इस सफलता को सेलिब्रेट करूंगी।
ग्रेजुएशन जरूरी
इस एक्जाम में शामिल होने के लिए मैथ्स बैकग्राउंड में ग्रेजुएशन होना अनिवार्य है। श्री मिश्रा के मुताबिक ऑल इंडिया 634 रैंक के साथ दिपीका मछैया का दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडिमशन के लिए सिलेक्शन हुआ है। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इस बार आईआईटी के जरिये एडमिशन की प्रक्रिया शुरू की थी। जिन स्टूडेंट्स को आईआईटी रुडकी में प्रवेश नहीं मिलेगा वे काउंसिलिंग के आधार दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले सकते हैं।
शहर के लिए महत्वपूर्ण
जितेंद्र मिश्रा एकेडमी के जितेंद्र मिश्रा कहते हैं यह सफलता शहर के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि एमसीए की सबसे बड़ी एक्जाम में देशभर से लगभग 70 हजार स्टूडेंट्स शामिल होते हैं और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच शहर के दो स्टूडेंट्स का सिलेक्शन होना बड़ी बात है। 100 ऑब्जेक्टिव प्रश्नों में से स्टूडेंट्स को सही चुनना था। लेकिन गलत जवाब पर निगेटिव मार्किंग भी थी।
कटऑफ 180 के आसपास
रैंकर्स प्वाइंट के डायरेक्टर के.के. शर्मा का कहना है पिछली बार कटऑफ 170के आसपास रहा था लेकिन इस बार ये करीब 180 माना जा सकता है। सेंट्रल इंडिया के रिजल्ट में इस बार काफी बदलाव आया है रिजल्ट में मुंबई झोन अव्वल रहा है। ये स्टूडेंट की मेहनत और कुशल मार्गदर्शन का ही नतीजा है कि शहर को इतनी बड़ी सफलता मिली है।
पिछली बार से बेहतर
केटेलाइजर के डायरेक्टर विपिन जोशी का कहना है पेपर सरल होने से पिछली बार के मुकाबले इस बार आईआईटी का रिजल्ट बेहतर रहा है। हर साल सबसे ज्यादा परेशानी स्टूडेंट्स को मैथ्स में आती थी लेकिन इस बार अधिकतर प्रश्न सरल ही आए थे। आईआईटी की सीटे बढ़ने से इस बार अधिक स्टूडेंट्स शहर से सफल हुए हैं।
औसत पांच में से दो
स्ट्रेटफोर्ड कोचिंग के आनंद कटकवार ने बताया इस बार उम्मीद से अच्छा रिजल्ट रहा। औसत पांच में से दो स्टूडेंट सिलेक्ट हुए हैं। इस बार स्टूडेंट्स ने जैसा सोचा था वैसी सफलता मिली है। मैथ्स छोड़ सभी स्ट्रीम के पेपर टफ रहे लेकिन ओवरऑल रिजल्ट बेस्ट ही रहा। ट्रेंड समझ में आने से नए स्टूडेंट्स का हौंसला भी बढ़ेगा।
फिजिक्स ने सुधारा गणित
श्रीचैतन्य एकेडमी के आनंद गंगेल का कहना है रिजल्ट आशा के अनुरूप रहा। स्टूडेंट्स के लिए स्पेशल बैच शुरू की थी, जिससे परिणाम काफी अच्छा रहा। इस बार पेपर में काफी कंसेप्ट बेस्ड प्रश्न थे। मैथ्स ने थोड़ा परेशान किया लेकिन फिजिक्स ने स्टूडेंट्स का अच्छा साथ दिया। कुल मिलाकर मेहनत और मार्गदर्शन का समीकरण सही रहा, जिसके रिजल्ट सामने हैं।
सीटें बढ़ने से परिणाम बेहतर
पीटी एजुकेशन के संदीप मानुधने इस बार आईआईटी के लिए सीटें बढ़ा दी गई है इसका असर परिणाम पर पड़ा। इंदौर और भोपाल से पिछले साल की तुलना में ज्यादा बच्चों का चयन हुआ है। अब सरकार के सामने एक चुनौती भी है। 50 साल में आईआईटी ने देश-दुनिया में जो साख बनाई है, उसके ब्रांड वैल्यू को बरकरार रखने के लिए एक टास्क फोर्स बनाना होगा।
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