अजमेर. इस बार सूफी संत ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स की शुरुआत के साथ ही मानसून की शुरुआत के आसार बन रहे हैं। मौसम विभाग ने 22 से 25 जून के बीच जिले में मानसून की दस्तक के संकेत दिए हैं। इसी अवधि में उर्स की औपचारिक शुरुआत भी होगी। मौसम विभाग के निदेशक एसएस सिंह के मुताबिक मुंबई के बाद राज्य में मानसून की दस्तक होती है।
आमतौर पर राज्य में 15 या 16 जून को मानसून प्रवेश कर जाता है, लेकिन अजमेर जिले में यह 22 से 25 जून तक सक्रिय होता है। दरगाह नाजिम अहमद रजा द्वारा उर्स के कार्यक्रम में भी यह बताया गया है कि रजब महीने का चांद दिखाई देने पर 24 या 25 जून से उर्स की शुरूआत हो जाएगी। इधर जून का आखिरी सप्ताह मानसून की बारिश के लिए हमेशा चर्चा में रहा है।
पिछले साल भी जून के आखिरी दस दिनों में 149 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार पड़ रही भीषण गर्मी से भी तेज बारिश के हालात बन रहे हैं। ऐसे में उर्स के दौरान जायरीन के लिए पर्याप्त इंतजाम करना जिला प्रशासन व दरगाह कमेटी के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है।
एक दशक में जून में बारिश
वर्ष 2000, 2004 और 2006 के जून के महीने को छोड़ दें तो पिछले एक दशक में इस महीने में पर्याप्त बारिश का दौर बना रहा है। मौसम विभाग के अनुसार इन तीन सालों में मानसून कमजोर रहा और क्रमश: 11.7, 2.7 और 26.00 एमएम बारिश हुई। लेकिन 1998 से 2008 तक के अन्य सालों में इस महीने में बारिश की स्थिति काफी संतोषजनक रही है। पिछले वर्ष ही इस महीने में 149 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई जो एक दशक में सर्वाधिक रही। इसके बाद 2001 में 96.3 एमएम वर्षा रिकॉर्ड की गई।
करने होंगे विशेष इंतजाम
विश्राम स्थली : बारिश के दौरान उर्स आने से प्रशासन व दरगाह कमेटी को भी जायरीन के लिए विशेष इंतजाम करने होंगे। पिछले साल आई बारिश ने जिला प्रशासन के इंतजामों की पोल खोल दी थी और आनासागर, एमडीएस यूनिवर्सिटी के पास तथा ट्रांसपोर्ट नगर में बनाई तीनों ही अस्थायी विश्राम स्थलियों पर जायरीन के लिए किए गए इंतजाम बारिश के साथ बह गए थे। प्रशासन की ओर से पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने पर सैकड़ों जायरीन ने बारिश से बचाव के लिए जेएलएन अस्पताल परिसर में शरण ली थी।
दरगाह क्षेत्र
आमतौर पर बारिश के दौरान अंदरकोट से गंदा पानी का बहाव दरगाह व नला बाजार की ओर होता है। दरगाह परिसर में भी महफिलखाना व लंगर खाना गेट के बीच दालान में भी बारिश का पानी भर जाता है। ढाई दिन के झोंपड़े के पास प्रशासन की ओर से अस्थायी शामियाने लगाए जाते हैं, लेकिन यह भी केवल औपचारिकता होती है।