अब रीजनल सरकारी ड्राइविंग स्कूल
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अब रीजनल सरकारी ड्राइविंग स्कूल

अजमेर. सरकार ने प्रदेश में बढ़ रही दुर्घटनाओं को देखते हुए परिवहन विभाग के सभी रीजनल स्तर पर सरकारी मोटर ड्राइविंग स्कूल खोलने का फैसला किया है। परिवहन महकमे ने स्कूल खोलने के लिए प्रशासन से 11 एकड़ जमीन मांगी है। स्कूल के निर्माण पर 1 से दो करोड़ रुपए तक खर्च होने की संभावना है। यह खर्चा केंद्र सरकार उठाएगी।

विभाग का ड्राइविंग स्कूल खुलने का असर प्राइवेट सेंटरों पर पड़ेगा। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों में यह योजना लागू की है। राजस्थान सरकार ने प्रथम चरण में रीजनल स्तर पर ड्राइविंग स्कूल खोलने का फैसला किया है। प्रदेश में विभाग के 11 रीजनल कार्यालय है। दूसरे चरण में जिला स्तर पर ड्राइविंग स्कूल खोले जाएंगे। इसके तहत खर्च होने वाली राशि भारत सरकार उठाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार को वाहन बनाने वाली कंपनियां सहयोग करेंगी। परिवहन विभाग ने स्कूल के लिए जिला प्रशासन ने 11 एकड़ भूमि मांगी है। स्कूल बनने पर एक से दो करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है। स्कूल में दक्ष लोग ड्राइवरों को प्रशिक्षण देंगे। स्कूल खुलने के बाद भारी वाहन चालकों को तभी लाइसेंस मिलेगा, जब वे स्कूल से प्रशिक्षण लेंगे। यहां पर प्राइवेट वाहन मालिकों के लिए भी प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी, लेकिन उनका ट्रेनिंग पीरियड कम होगा। विभाग प्रशिक्षण की न्यूनतम फीस रखेगा।

यह होगा फायदा

विभाग का मानना है कि नई नीति में भारी वाहन चलाने वाले चालकों को लाइसेंस लेने के लिए अच्छा प्रशिक्षण मिलेगा। वर्तमान में प्राइवेट स्कूलों के सर्टिफिकेट के आधार पर लाइसेंस बन जाता है। इस वजह से दुर्घटनाओं की संख्या बहुत अधिक बढ़ रही है। महकमे के स्कूल खुलने से दुर्घटनाओं में कमी आने के साथ यातायात व्यवस्था में भी सुधार होगा।

मांगी गई है जमीन

केंद्र सरकार की योजना के तहत विभाग के सभी रीजनल कार्यालयों में मोटर ड्राइविंग स्कूल खोले जाएंगे। इससे दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आएगी। अजमेर रीजनल कार्यालय में स्कूल खोलने के लिए जमीन मांगी गई है। विभाग के स्कूल खुलने के बाद प्राइवेट ड्राइविंग स्कूलों की उपयोगिता समाप्त हो जाएगी। -विनोद कुमार, आरटीओ, परिवहन विभाग



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