जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने रात में ट्रेक्टर-ट्रोली तथा जुगाड़ जैसे धीमी गति के वाहनों से होने वाले सड़क हादसों की रोकथाम के लिए एक्शन प्लान तैयार किया है। इसे लागू करने के लिए सरकार राज्य, जिला तथा ग्राम पंचायत स्तरीय समितियों का गठन करेगी। इन समितियों की देखरेख में ऐसे पंजीकृत या अपंजीकृत वाहनों पर रिफ्लेक्टर तथा स्ट्रिप लगाने का अभियान चलाया जाएगा, जो रात में सड़क पर चलते हुए नजर नहीं आते।
सरकार की ओर से पेश इस आशय की पालना रिपोर्ट पर अब हाईकोर्ट यह तय करेगा कि रिफ्लेक्टर का खर्च कौन वहन करेगा और भविष्य में फंड की क्या व्यवस्था होगी। हाईकोर्ट ने आरएसआरटीसी बनाम श्रीमती मानू सहित अन्य प्रकरणों में 11 मई को हादसों का सबब बने ट्रेक्टर-ट्रोली सरीखे वाहनों की सड़क पर पहचान स्पष्ट करने के लिए रिफ्लेक्टर व अन्य उपाय करने के आदेश दिए थे।
इसकी पालना में उप राजकीय अधिवक्ता डा. प्रतिष्ठा दवे ने हाईकोर्ट में पालना रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि राज्य में करीब 5 लाख 66 हजार ट्रेक्टर तथा 66 हजार 891 ट्रोलियां पंजीकृत हैं। एक मोटे अनुमान के अनुसार राज्य में करीब दो लाख ट्रेक्टर-ट्रोलियां पंजीकृत नहीं हैं। इनमें रिफ्लेक्टर भी नहीं लगे हैं। इसी तरह बैलगाड़ी, ऊंटगाड़ी, जुगाड़ आदि ऐसे अनधिकृत वाहनों का भी प्रचलन हैं, जिनका पंजीयन नहीं होता। इनकी संख्या भी करीब दो लाख है।
परिवहन विभाग का अनुमान है कि करीब चार लाख वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाने का कार्य किया जाना है। रिपोर्ट के अनुसार कांच के रिफ्लेक्टर लगाने पर एक वाहन पर 15 रुपए का खर्च आएगा और रिफ्लेक्टर स्ट्रिप लगाई जाती हैं तो एक वाहन पर 25 रुपए का खर्च आएगा। पूरे राज्य के वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाने पर करीब साठ लाख रुपए खर्च होंगे। एक्शन प्लान के अनुसार यह अभियान परिवहन विभाग और जिला कलेक्टर के निर्देशन में चलाया जाएगा।
अनुमान के हिसाब से 33 जिलों में प्रत्येक कलेक्टर के पास इस कार्य के लिए 2-2 लाख रुपए की जरूरत होगी। खर्च के वहन का बिंदु हाईकोर्ट द्वारा तय किए जाने के कारण प्लान में विकल्प सुझाए गए हैं। इनके अनुसार कलेक्टर विभिन्न एनजीओ, दानदाताओं, वाणिज्यिक या ओटोमोबाइल डीलर्स से भी यह कार्य करवा सकते हैं।
राज्य सरकार द्वारा राशि स्वीकृत करने के विकल्प के अलावा वाहन निर्माता कंपनियों व इंश्योरेंस कंपनियों के प्रतिनिधियों के सहयोग, राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने के लिए सड़क सुरक्षा फंड बनाने आदि के विकल्पों पर हाईकोर्ट विचार करेगा।
इसके बाद ही इस अभियान की शुरुआत होगी। प्लान के अनुसार रिफ्लेक्टर लगाने का कार्य तीन चरणों में किया जाएगा। प्रथम चरण में सर्वाधिक दुर्घटना वाली सड़कों, दूसरे चरण में शेष राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य उच्च मार्ग एवं जिला सड़कों तथा तीसरे चरण में ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले वाहनों को लिया जाएगा।