जालंधर. आस्ट्रिया के विएना की घटना के आक्रोश के कारण शहरवासियों को रविवार शाम से विपरीत परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है। सामान्य दिन की तरह सूर्योदय के साथ ही इनकी जिंदगी ने रफ्तार नहीं पकड़ी, बल्कि रविवार की शाम इनकी रफ्तार ऐसी रुकी कि सोमवार को बेहद मुश्किल के बाद ही कुछ लोग मंजिल तक पहुंचे और कुछ अभी भी फंसे हुए हैं। विपरीत माहौल के नजरिए को कुछ शहरवासियों ने टेलीफोन पर सिटी भास्कर के साथ बांटा।
20 घंटे से एक ही जगह
एजूकेशनल इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर एपी सिंह 20 घंटे तक गांव फराला में ही फंसे रहे और गुरुद्वारे में रात काटी। उन्होंने बताया कि माहौल में डर व मंजिल में पहुंचने की तड़प थी। आसपास हर किसी के जेहन में एक ही बात कौंध रही थी कि उनका कसूर क्या है और क्यों अपने ही उन्हें परेशानी में डाल रहे हैं।
एपी सिंह ने बताया कि उनके साथ मखू से आए परिवार के अलावा दिल्ली से आए कुछ सदस्य भी मौजूद थे। दिल्ली से अमृतसर मत्था टेकने आए लोगों को भी रास्ता साफ होने का इंतजार करना पड़ा।
अपनों से लगा डर
फगवाड़ा में रात भर रुके रहे जालंधर निवासी राजेश खुराना ने बताया कि वह फैमिली के साथ फगवाड़ा से जालंधर आ रहे थे। माहौल एकदम से बिगड़ा कि कुछ समझ ही नहीं आया। खुराना के मुताबिक विरोध जता रहे लोग अपने ही थे, मगर मलाल इस बात का था कि आज अपनों से ही डर लग रहा था।
पुलिस ने सभी गाड़ियों को चंडीगढ़ रोड की तरफ मोड़ दिया, मगर चंड़ीगढ़ रोड पर तो पहले से ही गाड़ियों की लंबी कतारें लगी थीं। पुलिस व प्रशासन ने आक्रोश को शांत करने के लिए कुछ नहीं किया। आखिरकार रोड पर ही मौजूद गुरुद्वारा साहिब में लोगों को रात गुजारनी पड़ी।
एक रात के शरणार्थी बने
प्रो. मानव शर्मा रविवार को परिवार के साथ एक समारोह में शामिल होने मालेरकोटला गए थे। वापसी में लुधियाना साइड से आते हुए वे टोल प्लाजा पर खड़े थे कि देखा भीड़ रोड पर जमा है। उन्होंने दूसरे रास्ते से शहर आने के लिए सोचा व गाड़ी गांव की तरफ दौड़ा ली। रास्ते में उन्हें शहर के हालात की जानकारी मिली। आखिरकार वह गांव मुकंदपुर पहुंचे। मुकंदपुर में उनके पिता के दोस्त के पास उन्होंने पूरी रात गुजारी।
दिल दहल गया
निजी इंस्टीट्यूट की संचालिका श्वेता चौहान ने बताया कि रविवार रात वह परिवार के साथ एक पार्टी में गई थीं। उन्हें माहौल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। जैसे ही वे होटल से घर की तरफ निकले। बीएसएफ चौक पर उन्हें कुछ लोगों ने घेर लिया। आक्रोषित लोगों ने उनके सामने पब्लिक संपदा पर गुस्सा निकाला। उनके गुस्से से परिवार सहम-सा गया।
फिर चौगिट्टी बाईपास पर भी उन्हें रोका गया। जब रोकने वालों को समझाया गया तो उनमें से एक व्यक्ति उन्हें जाने देने पर राजी हो गया। दिल दहल-सा गया। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। एक पल के लिए आक्रोष को शांत करने का मन बनाया, फिर घाव धीरे से भरने की समझ पर सहमति बनी और हम निकल पड़े।
नहीं जा पा रहे बीमार पिता की सुध लेने
हिमाचल के मंडी जिले के रहने वाले बलवंत के पिता गंभीर रूप से बीमार हैं। उन्होंने रविवार रात को पिता की सुध लेने हिमाचल जाना था, लेकिन एकदम बदली परिस्थितियों के कारण वह घर नहीं जा पा रहे हैं। इस कारण वह बहुत परेशान हैं। वह फोन पर लगातार अपने परिवार से संपर्क में हैं।