शिमला । मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक राजकीय शैक्षणिक संस्थान में चरणबद्घ तरीके से हैंडपंप स्थापित किए जाएंगे, ताकि केंद्र प्रायोजित 111.26 करोड़ रुपए की लागत से 14330 ग्रामीण स्कूलों में जलमणि योजना के तहत स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
प्रदेश की 35765 बस्तियों में स्वच्छ पेयजल सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने बंद पड़े हैंडपंपों को पुन: बहाल करने के लिए विशेष अभियान चलाने के भी आदेश दिए। उन्होंने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 20 हजार से अधिक हैंडपंप उपलब्ध होंगे।
2012 तक शेष बस्तियों को भी पेयजल सुविधा उपलब्ध करवा दी जाएगी। धूमल सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में बोल रहे थे। 35765 बस्तियों में स्वच्छ पेयजल सुविधा उपलब्ध है। 2012 तक सभी पंचायतों को पेयजल सुविधा उपलब्ध करवा दी जाएगी।
सुंदरनगर, धर्मशाला, चंबा और पालमपुर की पेयजल आपूर्ति योजनाओं का संवर्धन करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में 46.61 करोड़ रुपए की लागत से प्रदेश की विभिन्न भागों में केंद्रीय प्रायोजित भू-जल प्रबंधन कार्यक्रम के तहत 55 योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।
प्रदेश के 15 नगरों को मल निकासी योजना के तहत लाया गया है, जबकि 24 अन्य नगरों में भविष्य में यह सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। 390.89 करोड़ रुपए की शाहनहर परियोजना 2012 तक पूरी होने की संभावना है।
आनंदपुर हाइडल परियोजना के भी 2010 में पूरा होने की संभावना है। 235.52 करोड़ की स्वां नदी तटीकरण के दूसरे चरण का काम तेजी से चल रहा है। इससे 5000 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई हो सकेगी।
सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य मंत्री रविंद्र रवि ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर प्रधान सचिव आईपीएच नरेंद्र चौहान, प्रधान सचिव प्रशासनिक सुधार टीजी नेगी, प्रधान सचिव वित्त अरविंद मेहता, सचिव मुख्यमंत्री बीके अग्रवाल, इंजीनियर इन चीफ आरएन शर्मा आदि मौजूद थे।