की मेन का चक्कर, ज्यादा पैसा, ज्यादा पानी
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की मेन का चक्कर, ज्यादा पैसा, ज्यादा पानी

शिमला । पानी के असमान वितरण में की मेन की भूमिका भी संदेह में है। शहर के हर क्षेत्र में सप्लाई का अलग-अलग समय निर्धारित है। ब्रांच लाइन से पानी छोड़ने का काम की मेन का है, वॉल्व की चाबी की मेन के पास रहती है, लेकिन की मेन की कई लोगों से सांठ-गांठ रहती है।

जो जितना पैसा देता है उस क्षेत्र में उतनी ज्यादा सप्लाई दी जाती है। की मेन की कार्यप्रणाली पर सदन सवाल उठते रहे हैं।

जेई की जिम्मेदारी: जेई का काम संबंधित वार्ड में लीकेज चेक करने, नए कनेक्शनों की रिपोर्ट तैयार करना व पानी का डिस्ट्रीब्यूशन आदि चैक करना है। असल में हर काम ऑफिस में बैठे बिठाए ही निपटाए जाते हैं। उदाहण के तौर पर नगर निगम जई वाटर सप्लाई को हर माह 500 रुपए मोबाइल बिल के लिए देता है।

ताकि गर्मियों में लोगों की शिकायत का तुरंत निपटारा हो सके और कोई मुश्किल होने पर वह उच्चधिकारियों को संपर्क कर सके, लेकिन जेई के मोबाइल सुबह के वक्त स्वीच ऑफ रहते हैं।

ऐसे में लोग कहां शिकायत करें। पार्षद प्रदीप कश्यप का कहना है कि जेई फोन नहीं सुनते हैं। इस बारे में सदन में प्रस्ताव दोबारा से विचार किया जाएगा। पानी के नए कनेक्शन की रिपोर्ट जेई ही भेजता है।

भवन मालिक ने लाइन नियमों के मुताबिक दबाई है कि नहीं, अगर पाइप लाइन के वक्त निगम की सड़कों की खुदाई होती है तो क्या इसका पैसा जमा हुआ है, लेकिन जेई स्पॉट पर न जा कर ऑफिस में बैठ कर ही रिपोर्ट बनाते हैं।

नतीजतन आज शहर के हर वार्ड में पेयजल लाइनों का जाल बिछा है। जिन नियमों के मुताबिक नहीं बिछाया गया है। विकासनगर, न्यू शिमला, कसुम्पटी, लोअर बाजार मल्याणा व सीम्रिटी व खलीणी आदि क्षेत्रों में खुली पाइपों के जाल देखे जा सकते है।

निगम ने ऑफिस में बैठकर रिपोर्ट तैयार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही थी। लीकेज पर जेई का कोई चेक नहीं है। वार्ड में आए दिन लीकेज होती है। नलों से व्यर्थ में पानी बहता रहता है। भास्कर ने पाया कि लिफ्ट के पास चार-पांच नल एक साथ बह रहे थे। जिस पर किसी का कोई चेक नहीं है।



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