शिमला । सीबीएसई और आईसीएसई के दसवीं-बारहवीं के टॉपर्स की सफलता का एक और राज है जो आम तौर पर अखबारों में पढ़ने को नहीं मिलता। यह राज है, इन टॉपर्स की मम्मियां। टॉपर्स की सक्सेस स्टोरीज पाठकों के लिए प्रकाशित करने के बाद जब भास्कर ने इन खास बच्चों की मम्मियों से बात की तो पता चला कि यह इन माताओं के खास प्रयास थे जिन्होंने बच्चों को सबसे आगे की फेहरिस्त में जगह दिलाई।
ऑकलैड हाउस स्कूल की छात्रा शिफाली चौहान ने दसवीं की परीक्षा में 91.4 फीसदी अंक अर्जित किए हैं। शिफाली की मां विमला कहती हैं कि बच्चों के एग्जाम के दौरान मां की भी परीक्षा होती है। शिफाली पढ़ाई में तो ठीक है पर सुबह उठकर पढ़ने में आलस दिखाती है।
टाइम से जगाने की चिंता लगी रहती थी। कान्वेंट ऑफ जीसस एंड मेरी (चैलसी) में दसवीं क्लास में 90.5 फीसदी अंक लेकर तीसरे स्थान पर रही विभू गुप्ता की मां ज्योति कहती हैं कि एग्जाम के दौरान फ्रेक्चर होने पर मुझे बहुत चिंता हुई पर बेटी का उत्साह बरकरार रखने के लिए डर को कभी सामने नहीं आने दिया।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बतौर बॉटनी की लेक्चरर कार्यरत ज्योति मानती हैं कि किसी भी सब्जेक्ट को समझने के लिए कॉन्सेप्ट क्लिअर होना बेहद जरूरी है। एचपीयू में अंग्रेजी की प्रोफेसर गिरिजा शर्मा का कहना है कि बच्चों के ऊपर किसी भी प्रकार का प्रेशर नहीं होना चाहिए।
जब सलिल के एग्जाम थे, तो छुट्टी ली थी ताकि उसे घर से अपनी दुआओं के साथ भेज सकूं। शैलेट डे स्कूल में दसवीं की परीक्षा में 91.6 फीसदी अंक लेने वाली सुखरीत विर्दी की मां कश्मीर कौर कहती हैं कि एग्जाम से पहले सुखरीत को सुबह 6 बजे ट्यूशन जाना होता था।
टाइम पर ट्यूशन भेजने के लिए जल्द उठकर तैयारी करती थी और पढ़ाई में भी पूरा सहयोग देती थी। डीपीएस स्कूल में साइंस सवंर्ग में दूसरा स्थान हासिल करने वाले एश्वर्य की मां बेटे की सफलता से बेहद खुश हैं। कनक कहती हैं कि हाउस वाइफ होने के कारण बच्चों की हर गतिविधि को सूक्ष्मता से परखने का मौका मिलता है।
ऑकलैंड में दसवीं की परीक्षा में स्कूल स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा तविशी की मां कमलेश कहती हैं कि तविशी को शुरू से ही पढ़ाई का माहौल दिया है। बतौर अध्यापिका कार्य कर रही कमलेश मानती हैं कि बच्चों को मानसिक रूप से तैयार करना बहुत जरूरी होता है।
पढ़ाई का महत्व बताकर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करना पड़ता है। एग्जाम के दौरान समय पर उठाना और विषयों के समझने में भी काफी मदद की।
आईआईटी परीक्षा उतीर्ण कर बढ़ाया नाहन का मान
हर वर्ष की भांति इस बार भी करियर एकेडमी नाहन के दो छात्रों ने देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग परीक्षा आईआईटी उत्तीर्ण कर शहर का नाम ऊंचा किया है। करियर एकेडमी में अध्ययनरत नाहन निवासी अंकित राणा व अमन अली ने आईआईटी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए हर रोज करीब आठ से दस घंटे तक पढ़ाई की।
अंकित राणा ने आर्मी स्कूल नाहन व अमन अली ने शमशेर सीनियर सेकंडरी स्कूल नाहन से जमा दो की परीक्षा उत्तीर्ण की। अंकित राणा भविष्य में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं जबकि अमन अली मैकेनिकल इंजीनियर बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं।
अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने माता-पिता व कैरियर ऐकेडमी के समन्वयक मनोज राठी को दिया।राठी ने कहा कि दोनों बच्चों ने यह परीक्षा उत्तीर्ण कर नाहन शहर का नाम रोशन किया है।
ऊना की स्मारिका आईआईटी में सिलेक्ट
स्मारिका शर्मा ने आईआईटी की परीक्षा पास कर जिले का नाम रोशन किया है। वह हिमाचल की एकमात्र छात्रा है, जिसने आईआईटी में यह मुकाम हासिल किया है। यहां हिल क्ववीन कॉलोनी में रहने वाली स्मारिका ने चंडीगढ़ के एक कोचिंग सैंटर से ट्रेनिंग ली।
उसे सोमवार सुबह ही आईआईटी में पास होने की खबर मिली। आईआईटी में सिलेक्ट होने पर स्मारिका काफी उत्साहित है। उसके परिजन भी बेहद खुश हैं। स्मारिका का कहना है कि उसकी किसी अच्छे इंस्टीटयूट में प्रवेश पाने की इच्छा है।
उसके पिता भूटान में सेवारत हैं। जबकि छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। कोचिंग सेंटर के संयुक्त निदेशक प्रो. कौमार्या मनोज ने बताया कि उनके विभिन्न राच्यों के कुल 21 छात्रों का चयन हुआ था, इसमें से दो छात्र स्मारिका शर्मा ऊना व भृगु शर्मा धर्मशाला से चुने गए हैं। प्रो. कौमार्या मनोज के मुताबिक पिछले दस साल में ऊना जिले से कोई बच्च आईआईटी में पास नहीं हुआ है।