छिन सकता है सम्मान, विभाग ने मांगी फाइल
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छिन सकता है सम्मान, विभाग ने मांगी फाइल

मंडी. प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कति विभाग के सचिव पद पर रहते अकादमी के साहित्य सम्मान को हासिल करने वाले मामले का पटाक्षेप होते ही ही प्रदेश का भाषा विभाग के प्रधान सचिव ने अकादमी आवार्ड के चयन से जुड़ी हुई फाइल मंगाई है।

अब यह तय माना जा रहा है कि अकादमी के पूर्व सचिव को घोषित हुआ साहित्य सम्मान मिलने से पहले छिन सकता है। वर्ष 2007 के लिए अकादमी सम्मानों की अभी कोई घोषणा हुई है। आरटीआई ब्यूरो मंडी के चेयरमैन लवण ठाकुर ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच होनी चाहिए।

केंद्रीय साहित्य अकादमी के लिए भी मनोनयन: वर्ष 2007 के प्रदेश साहित्य अकादमी का साहित्य सम्मान के लिए चुने गए अकादमी के पूर्व सचिव ने शिमला में सेवानिवृत्त होने से पहले ही सारी व्यवस्था कर ली थी। प्रदेश भाषा अकादमी के सचिव रहते हुए साहित्य परिषद नई दिल्ली की सामान्य परिषद के लिए उनका मनोनयन किया गया। सरकार ने प्रदेश से तीन उत्कृष्ट साहित्यकारों का पैनल भेजने का अनुरोध किया था, लेकिन प्रदेश से केवल एक साहित्यकार सुदर्शन वशिष्ठ के नाम का मनोनयन किया गया। इस समय सुदर्शन वशिष्ठ प्रदेश भाजपा, कला एवं संस्कृति अकादमी शिमला के सचिव थे।

यह सारा खुलासा आरटीआई से जुटाई जानकारी से हुआ। आरटीआई ब्यूरो ने केंद्रीय भाषा, कला एवं संस्कृति अकादमी नई दिल्ली और प्रदेश सरकार से इसकी शिकायत की है। ब्यूरो ने जहां केंद्रीय अकादमी की कार्यकारी परिषद के मनोनीत किए हुए सदस्य सुदर्शन वशिष्ठ को वापस बुलाने और सारे प्रकरण की जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री से की है।

आरटीआई ब्यूरो ने वित्तीय लाभों की रिकवरी की मांग भी की है। यह पहला मामला नहीं है कि अकादमी आवार्ड विवादों में आए हों, इससे पहले भी जब नारायण चंद पराशर प्रदेश के शिक्षा मंत्री थे, तब अकादमी के अधिकारी की पुस्तक को पुरस्कार के लिए चुनने पर भी विवाद हुआ था।



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