शिमला. प्रदेश बिजली बोर्ड पर मंडरा रहे विघटन के खतरे से केरल का मॉडल निजात दिला सकता है। मंगलवार को विघटन के मुद्दे पर गठित संयुक्त मोर्चे की देर रात तक चली बैठक में विघटन के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई।
बिजली बोर्ड को विघटन से बचाने के लिए कोशिशें शुरू हुई हैं तो आखिरी उम्मीद केरल विद्युत के पैट्रन को लागू करने पर ही टिकी हुई हैं। देश में नए विद्युत कानून २00३ से केवल केरल राज्य ही बच पाया है जिसमे एक संस्था के अधीन सारी इकाइयां अभी भी काम कर रही हैं। केरल राज्य ने विद्युत कानून २00३ के कारण विघटन की मार से बचने के लिए सिर्फ केरल विद्युत बोर्ड का रजिस्ट्रेशन वर्ष २00८ मे कंपनी एक्ट के तहत कराया था।
इसके बाद केरल विद्युत बोर्ड का नाम बदल कर केरल विद्युत बोर्ड लिमिटेड रखा गया था। प्रदेश बिजली बोर्ड भी अगर इसी पैट्रन का अनुसरण करता है तो विघटन की मार से बच सकता है, लेकिन इसमे भी प्रदेश सरकार को कुछ कुर्बानियां देनी पड़ेगी। इसके लिए प्रदेश सरकार को हिमाचल प्रदेश पावर कॉपरेरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) और विद्युत संचार निगम(एचपीपीसी) को बिजली बोर्ड के अधीन लाकर सब्सिडरी बनाना होगा। अभी यह दोनों इकाइयां बिजली बोर्ड की सब्सिडरी के रूप मे काम नही कर रही है।