रिजल्ट को ऐसे समझिए
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रिजल्ट को ऐसे समझिए

शिमला. इस बार साइंस व मेथमेटिक्स छात्रों ने अन्य विषयों के मुकाबले अधिक अंक बटोरे हैं। अधिकतर छात्र नब्बे फीसदी से अंधिक अंक लेने में सफल हुए हैं। प्रदेश के 46 सेंटर्स पर 98805 छात्रों ने दसवीं की परीक्षा दी थी। विशेषज्ञों का कहना है कि साइंस और मेथ में छात्रों ने अधिक अंक लिए हैं और इसका कारण अगली क्लासिज में जाने के लिए नॉन मेडिकल विषय आसानी से ले सकते हैं।

साइंस के पेपर का डिफिकल्टी लेवल नॉर्मल था, पिछले साल के मुकाबले यह थोड़ा टफ था, लेकिन जिन स्टूडेंट्स के कंसेप्ट क्लीयर हैं उन्हें स्कोर करने में दिक्कत नहीं हुई। साइंस में रिजल्ट पिछले साल से बेहतर है। पेपर काफी कंसेप्चुअल था, लेकिन पेपर का स्तर अच्छा होने के बाद भी एनसीईआरटी की बुक्स पर ध्यान देने वाले स्टूडेंट्स के लिए पेपर काफी ईजी रहा। मल्टीपल चॉइस क्वैश्चन (एमसीक्यू) के कारण स्टूडेंट को स्कोरिेग में थोड़ी परेशान हुई है। साइंस में फिजिक्स, बायोलॉजी और कैमिस्ट्री में छात्रों ने पिछले वर्षो की अपेक्षा अधिक अंक स्कोर किए हैं।

एनसीईआरटी नोट्स फॉलो करने वाले छात्रों ने आसानी से अच्छे अंक लिए हैं। चैपसली स्कूल साइंस फैकल्टी मनीषा चंद्रा, पशमीना चौधरी और डीएवी लक्कड़ बाजार के अनूप चौहान ने बताया कि मल्टीपल च्वाइस क्वैशन की वजह से छात्रों को थोड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा होगा। पेपर लैंग्थी न होने से आसानी से पूरा पेपर किया होगा। अब साइंस में 100 नम्बर लाना बहुत टफ काम हो गया है।

दो तीन साल पहले तक स्टूडेंट्स के 95 प्लस नम्बर खूब आते थे, लेकिन एमसीक्यू के कारण इसमें बहुत कमी आई है। एक दो सवाल तो काफी टफ थे। इससे उन्हें 100 परसेंट लाने में दिक्कत हुई। पेपर में कंसेप्चुअल सवालों पर ज्यादा ध्यान दिया गया था। पेपर में दिए गए न्यूमेरिकल्स टफ नहीं थे। कैमिस्ट्री में भी 5 नम्बर के सवाल में कार्बन कम्पाउंड का सवाल था। इसके साथ अथवा में मैटल कम्पाउंड का सवाल भी पूछा गया। कैमिकल रिएक्शन, इक्वेशन बैलेंसिंग और एक्टिविटी बेस्ड सवाल पूछे गए। पेपर लैंदी नहीं था। और अतिरिक्त 15 मिनट से स्टूडेंट्स को पूरा पेपर करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया। साइंस इस बार ऐसा सब्जैक्ट रहा जिसमें दूसरों के मुकाबले कम स्कोर हुआ।

मैथ्स: काम के कंसेप्ट

शिमला. मैथ्स का पेपर पूरी तरह कॉन्सेप्ट बेस्ड था। रिजल्ट में यह देखने को मिला कि जिन स्टूडेंट ने रैग्यूलर स्टडी की और जिनके कन्सेप्ट क्लीयर हैं उन्हें 100 परसेंट नंबर हासिल करने में भी ज्यादा प्रॉब्लम नहीं हुई। फॉमरूलों पर जिनकी कमांड थी उनके लिए पेपर सॉल्व करना काफी आसान हो गया था। पेपर में दिए गए कैल्कुलेशंस ज्यादा टफ नहीं थे। डीएवी पब्लिक स्कूल के अनूप चौहान ने बताया कि स्टूडेंट्स ने कुछ जनरल मिस्टेक्स की थीं।

इस बार मैथ्स में एवरेज मार्क्‍स में काफी सुधार हुआ है। एक कमी जो देखी गई वो यह थी स्किल बेस्ड क्वैश्चंस को स्टूडेंट्स बहुत अच्छे से सॉल्व नहीं कर पाए। एमसीईआरटी बुक्स को फॉलो करने वाले स्टूडेंट्स को काफी अच्छे नम्बर मिले हैं। पेपर के ब्लू प्रिंट से स्टूडेंट को पता था कि किस टॉपिक में से कितने नम्बर के सवाल आएंगे। पेपर भी टॉपिक वाइज वेटेज के मुताबिक ही आया। नम्बर सिस्टम में से 4 नम्बर के सवाल पूछे गए।

एलजैब्रा में से 20, ट्रिग्नोमैट्री में 12, कॉर्डिनेट जिओमैट्री में 8, जिओमैट्री में 16, मैंसुरेशन में 10 और स्टैटिस्टिक्स एंड प्रॉबेब्लिटी में 10 नम्बर के सवाल पूछे गए। डीपीएस की अल्का शर्मा के अनुसार सरप्राइज एलिमेंट नहीं आने से स्टूडेंट्स का कॉन्फिडेंस बना रहा और वे पेपर के दौरान बेहतर परफॉर्म कर पाए । चैप्सली स्कूल की मनीषा चंद्रा ने देखा कि पेपर आसान था, लेकिन उसमें स्टूडेंट्स की नॉलेज को अच्छे से परखा गया था। स्टूडेंट्स के एवरेज मार्क्‍स में 7 परसेंट तक बढ़ोतरी हुई है। ओवरऑल पिछले साल के मुकाबले मैथ्स के रिजल्ट में सुधार हुआ है।



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