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ग्वालियर. दाल बाजार के तेल व्यापारी सेवकराम खत्री हत्याकांड का खुलासा पुलिस ने कर दिया है। हत्या दीनू पंडित गैंग ने की थी और बदमाशों को सेवकराम के पास लाखों रुपए होने की प्रापर्टी डीलर कमल किशोर मोटवानी ने दी थी। पुलिस ने पंडित गैंग के सदस्य अनिल मिश्रा और कमलकिशोर मोटवानी को गिरफ्तार कर लिया है।
इस बहुचर्चित हत्याकांड के तीन सप्ताह बाद हुए खुलासे की जानकारी मंगलवार को एडीशनल एसपी बीएस चौहान और मनोहर सिंह वर्मा ने संवाददाताओं को दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हत्याकांड के दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। एक आरोपी अनिल मिश्रा को पुलिस ने मंगलवार की सुबह बृजविहार कॉलोनी, नई सड़क पर गिरफ्तार किया।
यहां वह अपने साथी रवि भार्गव से मिलने के लिए आया था। अनिल की निशानदेही पर पुलिस ने व्यापारी कमलकिशोर मोटवानी को उसके निवास फर्शवाली गली माधौगंज से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की गिरफ्त में आए इन दोनों आरोपियों ने पूछताछ के दौरान पूरा घटनाक्रम सुनाते हुए अन्य आरोपियों के नाम भी बता दिए।
पुलिस ने अनिल के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त कट्टा, एक राउण्ड और छह हजार रुपए बरामद कर लिए। कमलकिशोर मोटवानी, विनोद और दीनू पंडित का पुरानी साथी है। इन तीनों ने वर्ष 1999 में जनकगंज थानाक्षेत्र के खासगी बाजार में जूता व्यापारी के मुनीम जवाहर से दस लाख 87 हजार रुपए छीने थे।
फरार आरोपियों पर इनाम
एसपी वीके सूर्यवंशी ने विनोद चौहान निवासी सात भाई की गोठ माधौगंज, दीनू पंडित निवासी गोसपुरा नं.1, आकाश दीक्षित थाना मौ भिण्ड तथा पंकज शर्मा निवासी बारां राजस्थान पर पांच-पांच हजार रुपए का इनाम घोषित किया है।
योजना से हत्या तक
लूट की योजना विनोद चौहान, दीनू पंडित और कमलकिशोर ने घटना से एक पखवाड़े पहले बनाई थी। कमलकिशोर को मालूम था कि सेवकराम प्रतिदिन दो-ढाई लाख रुपए अपने साथ रखता है और रुपए के प्रति वह लापरवाह भी रहता है, इसलिए वह सॉफ्ट टारगेट रहेगा।
4 मई की शाम को कमल किशोर और अनिल मिश्रा, सेवकराम की दुकान के पास खड़े हो गए और उन्होंने उस पर निगाह रखना शुरू कर दी।
सेवकराम दुकान बंद करके निकला तो अनिल मिश्रा ने अपने साथियों को फोन से सूचित कर दिया और खुद मोटरसाइकिल पर सवार होकर उसके पीछे लग गया। दीनू, आकाश, पंकज सूचना मिलते ही सेवकराम के घर के सामने जाकर खड़े हो गए। जैसे ही सेवकराम घर के सामने पहुंचा, अनिल मिश्रा उसकी स्कूटी को ओवरटेक कर आगे पहुंच गया और उसे रोक लिया। इसके बाद दीनू, आकाश और पंकज सामने आ गए तथा ब्रीफकेस छीनने लगे। सेवकराम ने विरोध किया तो अनिल मिश्रा ने उसके सीने में गोली मार दी। अनिल, सेवकराम के पैर में गोली मारना चाहता था लेकिन गोली सीने में लगी। आरोपी ब्रीफकेस छीनने के बाद मोटरसाइकिलों से गेंडेवाली सड़क होते हुए किलारोड, सांईबाबा के मंदिर के पास पहुंचे।
यहां उन्हें विनोद चौहान खड़ा हुआ मिला। यहां दीनू पंडित और विनोद चौहान एक साथ हो गए और उन्होंने पंकज, आकाश और अनिल मिश्रा को बीस-बीस हजार रुपए दिए तथा बाकी बंटवारा स्थितियां ठीक होने की बात कहकर चले गए।
पुलिस को कैसे मिला सुराग
लूट और हत्या की वारदात का सुराग ग्वलियर पुलिस को दिलाने में राजस्थान पुलिस का महत्वपूर्ण योगदान है। राजस्थान पुलिस अनिल मिश्रा को लूट की वारदातों के सिलसिले में तलाश करने आई थी। राजस्थान पुलिस ने सीएसपी लश्कर अमित सक्सेना और टीआई दीपक भार्गव से मिलकर बताया कि अनिल मिश्रा ने लूट की वारदात में 315 बोर के कट्टे का उपयोग किया था।
सेवकराम खत्री की हत्या में भी इसी तरह के हथियार का उपयोग किया गया था। फिर क्या था, ग्वालियर की पुलिस ने भी अनिल मिश्रा को ढूंंढ़ना शुरू कर दिया और इसे दबोचा तो खत्री हत्याकांड का खुलासा हो गया।
लूटी गई रकम कितनी ?
सेवकराम की हत्या करने वालों ने उनसे कितनी रकम लूटी है, इसका खुलासा नहीं हो सका है। प्रारंभिक तौर पर रकम छह लाख रुपए बताई गई थी, इसके बाद हिसाब लगाया गया तो लगभग ग्यारह लाख रुपए की लूट होना पुलिस को सेवकराम के परिजनों ने बताया था। लूट का माल कितना था, यह पकड़े गए आरोपी अनिल मिश्रा को भी नहीं मालूम है क्योंकि ब्रीफकेस ले जाने के बाद इनका विनोद और दीनू से संपर्क नहीं हो सका।
घटना एक नजर में
4 मई की रात नौ बजे रतन कालोनी में घर के सामने सेवकराम खत्री की हत्या कर उसके पास से रुपयों से भरा ब्रीफकेस छीन लिया था।
5 मई को दाल बाजार बंद, व्यापारियों ने इंदरगंज और जीवाजीगंज में प्रदर्शन किया।
18 मई को व्यापारियों ने मौन जुलूस निकाला।
19 मई को व्यापारियों ने दाल बाजार में धरना दिया।
20 मई को ऊर्जा मंत्री अनूप मिश्रा ने बैठक लेकर पुलिस को 30 मई तक मामला सुलझाने का अल्टीमेटम दिया।