भोपाल. एक कलेक्टर को सीएमओ की कार्यप्रणाली पसंद नहीं आई तो उन्होंने लापरवाही का हवाला देकर उसे निलंबित कर दिया और सीएमओ का कार्यभार तहसीलदार को सौंप दिया। एक निकाय में शासन ने सीएमओ पदस्थ किया तो उसे अध्यक्ष ने कुर्सी पर नहीं बैठने दिया। नगरीय निकायों में बढ़ती इस प्रवृत्ति पर अंकुश के लिए पहली बार शासन ने कदम उठाए और कलेक्टरों को निकायों के कार्य में सीधे हस्तक्षेप न करने की हिदायत दी है।
जिला प्रशासन द्वारा निकायों के सीएमओ के निलंबन और उसके बाद प्रभार सौंपने को लेकर खड़ी हो रही विचित्र स्थितियों को लेकर शासन ने यह कड़ा रुख अपनाया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार प्रमुख सचिव राघव चंद्रा द्वारा जारी किए गए निर्देश कलेक्टरों को निकायों के मामले में ‘लक्ष्मण रेखा’ नहीं लांघने की परोक्ष हिदायत है।
सभी कलेक्टरों को भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि नगर पंचायत एवं नगर पालिकाओं में सीएमओ, स्वास्थ्य अधिकारी एवं इंजीनियर (उपयंत्री/ सहायक यंत्री/ कार्यपालन यंत्री/अधीक्षण यंत्री/ मुख्य अभियंता) के रिक्त पद का प्रभार और आहरण एवं संवितरण संबंधी अधिकार सौंपने के अधिकार शासन में ही निहित है, किंतु देखने में आ रहा कि इन रिक्त पदों को प्रभार देने के आदेश कतिपय निकायों में नगर पालिका अध्यक्ष/संभागीय उपसंचालक/ जिला कलेक्टर द्वारा शासन की अनुमति के बिना ही जारी किए जा रहे हैं। इस प्रकार की अनधिकृत कार्यवाही अधिनियम के प्रावधानों की मंशा के विपरीत एवं अनुचित है। कलेक्टरों के साथ संभागीय उपसंचालकों को निर्देश दिए कि सीएमओ, स्वास्थ्य अधिकारी व इंजीनियर के रिक्त पद का प्रभार शासन की अनुमति के बिना न सौंपा जाए, बल्कि इन पदों का प्रभार/आहरण संवितरण अधिकार सौंपने के संबंध में औचित्यपूर्ण प्रस्ताव शासन को भेजें ताकि आवश्यक व्यवस्था की जा सके।
तब भी फोन पर चर्चा कर ही जारी करें आदेश
प्रमुख सचिव द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि नगरीय निकाय में कानून व्यवस्था व संवेदनशील परिस्थितियां निर्मित होने पर जिला कलेक्टर निकाय की प्रशासकीय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए सीएमओ के रिक्त पद का प्रभार सौंपने संबंधी आदेश प्रमुख सचिव अथवा सचिव से टेलीफोन पर चर्चा के बाद शासन के अनुमोदन की प्रत्याशा में जारी कर सकेंगे। इस पर शासन का कार्योत्तर अनुमोदन प्राप्त करना बंधनकारी होगा।
मामला 1
मार्च 09 में चंबल कमिश्नर एसडी अग्रवाल ने सबलगढ़ नगर पालिका के सीएमओ दिनेश शर्मा को निलंबित कर दिया। इसके दो दिन बाद कलेक्टर एमके अग्रवाल ने राजस्व उप निरीक्षक प्रदीप शर्मा को प्रभारी सीएमओ पदस्थ कर दिया, लेकिन नपा अध्यक्ष मुन्नी बाई ने प्रदीप शर्मा को कार्यभार ग्रहण करने से रोक दिया। इसी मामले में मुन्नालाल करोसिया खुद को प्रदीप शर्मा से वरिष्ठ बताते हुए हाईकोर्ट की शरण में चले गए।
मामला 2
राज्य शासन ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधानाध्यापक दीपक राय माथुर को प्रतिनियुक्ति पर लेकर जिला शहरी विकास अभिकरण रतलाम में सहायक परियोजना अधिकारी पदस्थ किया था। लोकसभा चुनाव के बाद अचानक कलेक्टर महेंद्र ज्ञानी ने उन्हें हटाकर अन्य अधिकारी को कार्य सौंप दिया, जबकि श्री माथुर के काम से परियोजना अधिकारी प्रभावित थे और उन्हें बनाए रखने के पक्ष में हैं। श्री माथुर की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने ईवीएम रखने के लिए बने स्ट्रांग रूप के बारे में कलेक्टर को दिखाए बिना कोई जानकारी चुनाव आयोग को फैक्स कर दी थी।
मामला 3
धार जिले की धामनोद नगर पंचायत के सीएमओ शशिधर जोशी को मतदान केंद्र पर समय पर पानी की व्यवस्था नहीं होने पर कलेक्टर ने निलंबित कर दिया। निलंबन से पहले जारी कारण बताओ सूचना पत्र के जवाब में जोशी ने सफाई दी कि ट्रैफिक जाम में ट्रैक्टर फंस जाने के कारण सामग्री थोड़ा विलंब हुआ। इसके बावजूद कलेक्टर ने कार्रवाई कर दी।