भोपाल. मध्यप्रदेश सरकार ने वस्तु एवं सेवा कराधान प्रणाली (गुड्स एंड सर्विस टैक्स ) का विरोध करने का फैसला किया है। शिवराज सिंह चौहान मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रणाली पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार से इसके प्रभावों का अध्ययन राज्यों के वित्त मंत्रियों की समिति से कराने का आग्रह करने का निर्णय लिया है।
शिवराज सरकार इस प्रणाली को महानगरों वाले राज्यों के लिए फायदेमंद और मप्र जैसे राज्यों को नुकसानदेह मान रही है। मंत्रिपरिषद ने अभिषेक इंडस्ट्रीज को स्टांप शुल्क में सवा दो करोड़ रुपए की छूट समेत कई फैसले किए।
मंगलवार को श्री चौहान की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई बैठक में एक अप्रैल 2010 से प्रस्तावित गुड्स एंड सर्विस टैक्स का यह कहते हुए विरोध किया गया कि इससे मप्र को करीब सालाना दो से ढाई हजार करोड़ रुपए का नुकसान होगा। जो आने वाले सालों में और बढ़ेगा। गौरतलब है कि यह टैक्स अधिकतम 16 प्रतिशत होगा और इसमें से आधा हिस्सा राज्य को मिलेगा।
मंत्रिपरिषद ने अमरकंटक की 50 मेगावाट क्षमता की विद्युत उत्पादन इकाई को बंद करने के प्रस्ताव नामंजूर कर दिया। इस मामले में कहा गया कि बिजली उत्पादन का विकल्प लाया जाए तभी यह इकाई बंद की जाए। छह साल से अधिक उम्र वाले बहु विकलांगता और मानसिक विकलांगता वाले निशक्तजनों को 300 रुपए महीने पेंशन दिए जाने के प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया।
आयोगों का कार्यकाल बढ़ाया
मंत्रिपरिषद ने जेपी सीमेंट रीवा परिसर में गोली चालन, सामाजिक एवं वृद्धावस्था पेंशन घोटाला और सरदार सरोवर पुनर्वास विस्थापितों की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री मामलों के जांच आयोगों का कार्यकाल बढ़ाने का अनुसमर्थन किया।