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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. भूमि अधिग्रहण करने के बाद भूमि अधिग्रहण मुक्त करने के मामलों पर हरियाणा सरकार की तरफ से जवाब न देने पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे सरकार के स्तर पर जानबूझकर की जा रही देरी बताया है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल व जस्टिस जतिंदर चौहान की खंडपीठ ने इस मामले में हरियाणा सरकार और आंसल हाउसिंग व कंस्ट्रक्शन कंपनी पर एक-एक लाख रुपए जुर्माना लगाया है।
रेवाड़ी के गांव पिवरा निवासी बाबू लाल की याचिका में कहा कि गांव की 209.24 एकड़ भूमि अधिग्रहण के लिए नोटिस दिया गया था लेकिन बाद में 103.90 एकड़ भूमि ही अधिग्रहित की गई। अधिग्रहण मुक्त भूमि में से ज्यादातर आंसल कंपनी को दे दी गई।
खंडपीठ ने कहा कि यह देखने में आ रहा है कि हरियाणा सरकार व उनके साथ अन्य प्रतिवादी भूमि अधिग्रहण मुक्त करने से जुड़े मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी कर रहे हैं। खंडपीठ ने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे ही एक मामले में अदालत को सूचना न देने पर हरियाणा के वित्त आयुक्त व उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रधान सचिव को पेश होने के लिए सम्मन किया जा चुका है। ऐसे में हरियाणा सरकार व हुडा की तरफ से इन मामलों में जानबूझकर देरी स्पष्ट है।
वर्तमान मामले में भी राज्य सरकार को कई बार अवसर देने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया जा रहा। ऐसे में केस को स्थगित करने की सरकार व आंसल को जुर्माना देकर भरपाई करनी होगी। बेंच ने एक-एक लाख रुपए जुर्माना लगाते हुए कहा कि जवाब देने में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी से यह राशि वसूली जा सकती है। अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।