भोपाल. नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन (एनटीपीसी) मप्र के नरसिंहपुर जिले में करीब 12 हजार करोड़ रुपए की लागत से करीब दो हजार एकड़ जमीन पर 2640 मेगावाट विद्युत उत्पादन का संयंत्र लगाना चाहता है। मप्र सरकार इस प्लांट की 60 फीसदी बिजली राज्य को देने की शर्त पर इस प्रोजेक्ट को बढ़ाना चाहती है। मंगलवार को एनटीपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंधन निदेशक आरएस शर्मा भोपाल आए और मुख्य सचिव एवं राज्य बिजली बोर्ड के अध्यक्ष राकेश साहनी से मुलाकात की। इसके बाद श्री शर्मा ने भेल कारखाने का दौरा भी किया। दैनिक भास्कर ने श्री शर्मा से इस प्रस्ताव समेत बिजली से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की, पेश है बातचीत के मुख्य अंश।
कैसा होगा प्रस्तावित प्रोजेक्ट?
अत्याधुनिक सुपर क्रिटिकल तकनीकी का इस्तेमाल कर 660-660 मेगावाट की चार इकाइयां लगाने का प्रस्ताव है। इसमें धुआं रहित चिमनियां और पानी की निकासी शून्य होगी।
मप्र सरकार 60 फीसदी बिजली राज्य को देने पर सहमत है?
फैसला केंद्र सरकार को करना है, हम भी प्रस्ताव देंगे और राज्य सरकार को भी इस संबंध में कोशिश करना होगी। अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। कोल लिंकेज के लिए केंद्र सरकार को आवेदन भी दे दिया है।
प्रोजेक्ट के लिए जो जमीन देखी गई है वह खेती के लिहाज से उर्वरा है, क्या बिजली के लिए खेती उजाड़ना उचित होगा?
हमने साइट देखी है, अभी फाइनल नहीं की है। इसमें कुछ जमीन खेती वाली होगी, जमीन किसानों की मर्जी से ही लेंगे। पॉवर प्लांट लगने में देरी से बिजली संकट कम करने की उम्मीदें धरी रह जाती हैं, मप्र में भेल ने प्लांट लगाने में देर की, केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद भी हुए। भेल का काम अच्छा है। असल में प्रोजेक्ट में मंजूरियों से लेकर उसके बनने तक कई चरण होते हैं, इनमें लंबा समय लग जाता है। मप्र में प्रोजेक्ट देर से पूरे होने के विवाद पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।
कोयले का संकट है, ऐसे में थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट्स का भविष्य कैसा होगा?
कोयले के लिए हमारे देश में उपलब्धता के अलावा एनटीपीसी विदेशों में खदानें लेने की तैयारी भी कर रही है। दक्षिण अफ्रीका, मोजांबिक और इंडोनेशिया से प्रस्ताव आए हैं।
क्या मप्र में विस्तार योजनाएं हैं?
सिंगरौली में विंध्याचल पॉवर हाऊस 3260 मेगावाट से बढ़ाकर 4760 मेगावाट का किया जा रहा है, यह पॉवर हाऊस एशिया का सबसे बढ़ा थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट बन जाएगा।
एनएचपीसी थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट लगा रहा है और एनटीपीसी हाइड्रल प्रोजेक्ट, क्या भूमिकाएं बदल रही हैं?
बिजली देश के विकास के लिए जरूरी है, इसलिए मिलकर कोशिश कर रहे हैं। तपोपन उत्तराखंड में हमारा 2000 मेगावाट पनबिजली प्रोजेक्ट 2010-11 में शुरू हो जाएगा।
परमाणु बिजली में कहां तक पहुंचा?
न्यूक्लियर पॉवर कारपोरेशन के साथ संयुक्त उपक्रम बना रहे हैं, एनटीपीसी का हिस्सा 49 फीसदी रहेगा। दो हजार मेगावाट का प्लांट लगाने की योजना है।