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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजूकेशन (सीबीएसई) के दसवीं के नतीजों में चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मॉडल स्कूल पिछले साल के मुकाबले पिछड़ गए। इस साल सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा में गवर्नमेंट मॉडल स्कूलों की ओवरऑल पास परसेंटेज 87.38 रही जबकि वर्ष 2008 में 88.95 फीसदी और वर्ष 2007 में 88.22 फीसदी थी।
नॉन मॉडल के परिणाम सुधरे
गवर्नमेंट नॉन मॉडल स्कूलों के नतीजों में परिणाम पहले से बेहतर हैं। इस साल नॉन मॉडल स्कूलों की ओवरऑल पास परसेंटेज 45.73 रही, जबकि वर्ष 2008 में यह 44.61 फीसदी थी। गवर्नमेंट स्कूलों में जीएमएसएसएस-16 ने 100 फीसदी नतीजे के साथ टॉप किया।
गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकंडरी स्कूल-19 ने 98.39 फीसदी के साथ दूसरा स्थान हासिल किया जबकि 97.12 फीसदी रिजल्ट के साथ जीएमएसएसएस-33 तीसरे स्थान पर रहा। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में जीएमएसएसएस-16 के प्रभजोत ने 95.2 फीसदी के साथ पहला स्थान हासिल किया है। इसी स्कूल के शैलिका सिंह और जीएमएसएसएस-33 की शीनम ने 94.4 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर रहे। जीएमएसएसएस-16 की प्रीति ने94.2 फीसदी के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है।
न आईएएस, न आईपीएस बनना है इंजीनियर
चंडीगढ़. ‘‘न मैं आईएएस बनूंगी न आईपीएस, मुझे कंप्यूटर इंजीनियर बनना है ।’ यह कहना है सीबीएसई की कक्षा 10 की परीक्षा में 97 फीसदी अंक हासिल करने वाली छात्रा रीतिका जैन का। रीतिका पंजाब पुलिस के आईजी (हेडक्वार्टर) पराग जैन और पंजाब की इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी की डायरेक्टर सीमा जैन की बेटी है। रीतिका कहती है कि आईएएस या आईपीएस की जिंदगी बहुत कठिन और तनावपूर्ण होती है। इसीलिए वह इंजीनियरिंग करने के बाद वह एमबीए करना चाहती है।
कार्मल कॉन्वेंट स्कूल-9 की छात्रा रीतिका ने प्री बोर्ड में 91.4 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और फाइनल में उसके 97 फीसदी अंक आएंगे यह उसे उम्मीद ही नहीं थी। नवीं में वह माता-पिता के साथ इंग्लैंड चली गई थी और वहीं एलिजिबेथ कैडबरी टेक्नोलॉजी कॉलेज से कक्षा नौ की पढ़ाई की। रीतिका वहां की सबसे उच्चतम ग्रेडिंग यानी ए स्टार से नवाजा गया। इसके बाद पिछले साल जुलाई में चंडीगढ़ में आकर कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में दाखिला लिया। रीतिका के अनुसार हालांकि उसने तीन महीने बाद दाखिला लिया था, लेकिन कड़ी मेहनत की। घुड़सवारी और गोल्फ की शौकीन रीतिका अपना रोल मॉडल डॉ. मनमोहन सिंह को मानती है।
उसके पिता पराग जैन का कहना है उनकी बेटी जिस भी क्षेत्र में जाना चाहे जा सकती है, उनकी तरफ से कोई बंदिश नहीं है। सीमा जैन के मुताबिक वह जानती हैं कि रीतिका बहुत क्षमतावान हैं। उन्हें यकीन है कि रीतिका अभी और उंचाइयां छुएगी। रीतिका की छोटी बहन अर्शिया जैन ने बताया कि परीक्षा के दिनों में रीतिका को जूस देकर और टीवी की आवाज को कम कर उसकी मदद की ताकि उसकी एकाग्रता बनी रहे।
भवन का अखिल पंचकूला में टॉपर
पंचकूला. सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा में भवन विद्यालय स्कूल सेक्टर-15 के अखिल बहुगुणा ने 97 फीसदी अंक लेकर पंचकूला जिले में टॉप किया है।
अखिल अब 11वीं क्लास में मेडिकल में एडमिशन लेगा। वह मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहता है। अखिल ने परीक्षा में सफलता के लिए स्कूल के बाद रोजाना पांच घंटे पढ़ाई की। फुटबॉल और क्रिकेट खेलने का शौकीन अखिल ने कहा कि पूरे सिलेबस की अच्छी तैयारी करना ही उसकी सफलता का राज है। पंचकूला सेक्टर-19 के मकान नंबर-67 में रहने वाले अखिल के मैथ्स में 100 और एसएसटी में 99 नंबर हैं। अखिल के पिता वीरेंद्र बहुगुणा कंप्यूटर प्रोफेशनल हैं। मां पूर्णिमा हाउस वाइफ हैं।
अखिल ने कहा कि यदि उसे मौका मिला तो वह साइंस और मैथ्स का सिलेबस बदलना चाहेगा। यह सिलेबस बहुत पुराना है। इसमें अब कुछ नया होना चाहिए। भवन विद्यालय की प्रिंसिपल शशि बनर्जी ने अखिल और उसके माता-पिता को स्कूल में अच्छे प्रदर्शन के लिए बधाई दी।
मजदूर की बेटी मोहाली में अव्वल
मोहाली. कुछ करने का जज्बा हो तो कोई कमी रास्ता नहीं रोक सकती। यह साबित किया है पंजाब स्कूल एजूकेशन बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में मोहाली जिले में टॉप और पंजाब में 16वां स्थान हासिल करने वाली हप्रीत कौर ने। गांव दुराली की छात्रा हरप्रीत बहुत ही गरीब परिवार से है। उसके पिता मजदूरी करते हैं।
अपनी इस उपलब्धि के लिए हरप्रीत सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल मनौली के अध्यापकों का धन्यवाद करती है। उसके पिता लखबीर सिंह का कहना है कि उनकी बेटी छठी से लेकर हर क्लास में प्रथम आई है। उसकी माता राजिंदर कौर ने बताया कि हरप्रीत ने कभी टेलीविजन नहीं देखा। न ही कभी ट्यूशन रखी है, वह घर पर अकेली बैठी पढ़ती रहती थी। हरप्रीत फस्र्ट आने पर खुश है, लेकिन उसका लक्ष्य आईएएस अधिकारी बनना है।
हरप्रीत कहती हैं, ऐसा नहीं कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल नहीं होता। लोगों को प्राइवेट स्कूलों को छोड़ सरकारी स्कूलों में अपने बच्चे पढ़ाई के लिए लगाने चाहिए। वह अपनी कामयाबी का पूरा सेहरा अपने स्कूल के अध्यापकों के सिर बांधती है।