
भोपाल. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) हाईस्कूल बोर्ड के अजमेर, चेन्नई और पंचकुला के क्षेत्रीय कार्यालयों से संबद्ध स्कूलों के परिणाम मंगलवार को घोषित हुए। डीपीएस की छात्रा प्रेरणा मालवीय ने 97 फीसदी अंक हासिल कर शहर में टॉप किया है। दूसरे स्थान पर सेंट जोसफ कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा अंशुला माधवन ने 96.6 फीसदी अंक हासिल किए।
तीसरे स्थान पर डीपीएस की कान्हेरी सिंह और कॉर्मल कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा रेवा मेहता ने 96.2 फीसदी अंक हासिल किए। चौथे स्थान पर डीपीएस के छात्र पलाश सक्सेना रहे उन्होंने 96 फीसदी अंक हासिल किए। इस साल भोपाल शहर से लगभग 8000 स्टूडेंट्स ने हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। परिणाम के अनुसार इस बार सोशल साइंस और मैथ्स में बच्चों ने काफी अच्छे अंक हासिल किए। पिछले साल के मुकाबले इस साल 90 प्रतिशत से ज्यादा नंबर हासिल करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में 10 से 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
दसवीं सीबीएसई के रिजल्ट में शहर के स्टूडेंटस ने शानदार कामयाबी हासिल की है। पहले बारहवीं सीबीएसई और उसके बाद सिविल सर्विसेज, आईआईटी-जेईई में मिली सक्सेस यह बताती है कि शहर के स्टूडेंटस में टेलेंट की कमी नहीं है। टॉपर्स बच्चों के टिप्स में एक बात बहुत साफ झलकती है कि पढ़ाई के साथ-साथ दूसरी एक्टिविटी में भी हिस्सेदारी पर्सनालिटी को निखारने में बेहद मददगार होती है। दसवीं की पढ़ाई में जुटे बच्चों के लिए टॉपर्स के मंत्र ताकि कामयाबी की राह आसान हो।
किरण जैसी अफसर की चाह
नाम : अंशुला माधवन, 96.6 प्रतिशत
पिता: एस माधवन
मां: जयश्री माधवन, एलआईसी
सेंट जोसफ कॉन्वेंट की स्टूडेंट अंशुला शहर की मैरिट में दूसरे स्थान पर हैं। मैथ्स में इनको पूरे 100 अंक हासिल करने की उम्मीद थी लेकिन एक नंबर का पहला सवाल गलत होने की वजह से 99 मार्क्स मिले। पढ़ाई के दौरान इन्होंने बॉस्केटबॉल, गार्डनिंग और डिबेट जैसी एक्टिविटी में भी भरपूर उत्साह से हिस्सा लेना जारी रखा। इनका मानना है कि इससे शानदार रिजल्ट में काफी मदद मिली।
रोडमैप: प्रतिदिन दो से चार घंटे पढ़ाई। एनसीईआरटी की किताबों के अलावा रिफ्रेंस बुक्स से भी सवाल हल करना।
लक्ष्य : आईएएस ऑफिसर बनना चाहती हैं पूर्व आईपीएस ऑफिसर किरण बेदी से अंशुला बेहद प्रभावित हैं।
टिप्स: एनसीआरटी की किताबों को ध्यान से पढ़ें। अपनी भाषा में जवाब लिखने की कोशिश करें।
राजनीति में जाना है
नाम : रेवा मेहता, 96.2 प्रतिशत
पिता : डॉ. अजय मेहता
मां : डॉ. सविता मेहता
कॉर्मल कॉन्वेंट स्कूल की स्टूडेंट रेवा को मैथ्स में पूरे 100 नंबर न पाने का अफसोस है। परीक्षा के वक्त तनाव से बचने के लिए इन्होंने डांस और सिंगिंग को नहीं छोड़ा और प्रैक्टिस जारी रखी। पढ़ाई के दौरान पंद्रह दिन के लिए यूएस भी गईं। कोचिंग ने भी पढ़ाई में खासी मदद वहां से टॉपिक्स को ज्यादा अच्छे से तैयार करना है।
रोडमैप : एनसीईआरटी की किताबों को बार-बार पढ़ा। नोट्स बनाए टॉपिक्स को बेहतर तरीके से मैनेज करें ताकि बार-बार किताबें न तलाशनी पड़ें।
लक्ष्य : आईआईटी-जेईई के बाद पोस्टग्रेजुएशन साइंस रिचर्स में करना चाहती हूं। इसके बाद रेवा राजनीति में जाने की इच्छा रखती हैं।
टिप्स : पेपर में वर्ड लिमिट का खास खयाल रखें।
मैथ्स के सवालों की रेगुलर प्रैक्टिस करें। जिन टॉपिक्स के आने की संभावना हैं उन्हें अच्छे से तैयार करें। इंग्लिश में ग्रामर की तैयारी ठीक रखें और शब्द सीमा में ही उत्तर लिखें। साइंस में चित्र बनाएं और महत्वपूर्ण बिंदुओं को हाईलाइट कर दें।
आईएएस का सपना
नाम : कान्हरी सिंह 96.2 प्रतिशत
पिता : कैप्टन संजीव सिंह, मर्चेन्ट नेवी
मां : रेखा सिंहमैथ्स में 100 नंबर पाने वाली डीपीएस की स्टूडेंट कान्हरी ने छुट्टियों से ही 10 से 11 घंटे के पढ़ाई शुरू कर दी थी। कान्हरी ने हिन्दी की जगह फ्रेंच भाषा का चयन किया और परीक्षा के दौरान ही फ्रेंच भाषा में डिप्लोमा भी किया। आजकल स्पेनिश सीख रही इस टॉपर को भाषाएं सीखने का क्रेज है।रोडमैप : 10वीं की पढ़ाई छुट्टियों से ही शुरू कर दी थी। स्कूल के दौरान दो घंटे रोज सेल्फ स्टडी की। अच्छे नंबरों के लिए हर सब्जेक्ट को अलग से समय दिया।लक्ष्य: एसआरसीसी दिल्ली से मैथ्स और इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन के बाद आईएएस आफिसर बनना है इसके लिए तैयारी अभी से शुरू करने वाली हूं।
बनना है मैकेनिल इंजीनियर
नाम : पलाश सक्सेना, 96 प्रतिशत
पिता: बीबी सक्सेना, असि. डायरेक्टर, बीपीआई
मां: संगीता सक्सेना, टीचर
सेंट जोसफ के पलाश को अगर तो मैथ्स और सोशल स्टडी में एक-एक नंबर और मिल जाते तो दोनों में 100 का स्कोर होता। परीक्षा की तैयारी के लिए स्कूल के साथ-साथ कोचिंग और घर पर चार घंटे पढ़ाई की। 10वीं की पढ़ाई छुट्टियों से ही शुरू कर दी थी इसका परिणाम बेहतर रिजल्ट के रूप में सामने आया। पढ़ाई के साथ गाने, पियानो और बेसबॉल की प्रैक्टिस भी जारी रखी।
रोडमैप : छुट्टियों में 8 से 10 घंटे पढ़ाई की। इस दौरान साइंस और मैथ्स की कोचिंग भी ली। स्कूल शुरू हो जाने पर चार घंटे प्रतिदिन पढ़ाई की।
लक्ष्य: मैकेनिकल इंजीनियर बनना है ताकि किसी बड़ी कंपनी में अच्छा पैकेज हासिल हो।
टिप्स: कोचिंग के साथ-साथ स्कूल की पढ़ाई पर भी ध्यान दें। छुट्टियों में ही पढ़ाई शुरू कर देना चाहिए। एनसीआरटी की किताबों को पढ़ें।कठिन विषयों की तैयारी पहले करें।
पहले आईआईटीं
नाम : गौरव पान्डवीय 96.2
पिता : अजय पान्डवीय
मां : संगीता पान्डवीय
गौरव का मानना है कि स्कूल की शानदार पढ़ाई ने ही शानदार रिजल्ट दिलाया। आईपीएस के इस स्टूडेंट को मैथ्स 99 नंबर हैं और एक नंबर कम होने का अफसोस है। बास्केटबॉल, आउटडोर गेम्स के साथ ही समय मिलने पर चेस का आनंद भी लेते हैं। गौरव अपने टीचर्स को अपनी सक्सेस का सबसे अधिक क्रेडिट देते हैं।
रोडमैप: स्कूल के अलावा छह घंटे की नियमित पढ़ाई करता था। कोचिंग के साथ स्कूल की पढ़ाई पर भी ध्यान देना चाहिए।
लक्ष्य:आईआईटी करके मैकेनिकल इंजीनियरिंग बनना चाहता हूं।
हौसले को सलाम
हौसले की मिसाल कायम करने वाले शहर के स्वप्नेंद्र ने सीबीएसई परीक्षा में 72 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। सीबीएसई हाईस्कूल की परीक्षा के दौरान जवाहरलाल नेहरू स्कूल के छात्र स्वप्नेंद्र त्रिपाठी का बरखेड़ा स्थित परीक्षा केन्द्र सेंट जेवियर्स स्कूल जाते वक्त गंभीर एक्सीडेंट हो गया जिसमें उनके शरीर का निचला हिस्सा बुरी तरह जख्मी हो गया और यूरेनरी ब्लेडर फट गया था। डॉक्टर्स ने उन्हें पेपर छोड़ने की सलाह दी लेकिन उन्होंने जिद की और दुर्घटना वाले दिन ही हिन्दी का पेपर उन्होंने स्ट्रेचर पर लेटे हुए दिया।
हालांकि उसे पेपर के लिए डेढ़ घंटे का वक्त ही मिल सका और इसी वजह से हिन्दी में उन्हें 33 अंक ही मिल सके। दूसरे पेपर में उन्हें स्कूल के प्राचार्य वी.विजय कुमार ने राइटर शिविन बोगल की मदद दिलवाई और साइंस के पेपर में स्वप्नेंद्र ने 73 अंक हासिल किए। हाईस्कूल में उन्होंने 72 फीसदी अंक हासिल किए हैं। पीसीएम ग्रुप में बारहवीं करते हुए आईआईटी-जेईई परीक्षा उत्तीर्ण करना उनका लक्ष्य है।
सीबीएसई के धुरंधर तस्वीरों में
सीबीएसई में बाजी मारने वाले छात्रों की तस्वीरें
इंदौर की बेटियों की उड़ान तस्वीरों में
भोपाल में सीबीएसई का परचम फहराने वाले धुरंधर
दसवीं में भी छात्राएं आगे टॉप तीन स्थान छात्राओं के नाम
जयपुर के बच्चे भी नहीं पीछे
चंडीगढ़ के बच्चों ने भी जीत लिया जहां
गवर्नमेंट मॉडल स्कूल नतीजों में पिछड़े
इंदौर की बेटियों ने रचा इतिहास
अमृतसर यानि एक शहर में तीन टॉपर