भोपाल. राजधानी में पारे में भले ही उतार-चढ़ाव हो रहा है लेकिन गर्मी के असर से होने वाली बीमारियों का ग्राफ नीचे नहीं जा रहा है। अस्पतालों में सबसे ज्यादा उल्टी-दस्त से प्रभावित पहुंच रहे हैं। लू से प्रभावित लोग भी बड़ी संख्या में सरकारी और प्रायवेट अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। सूरज की तेज किरणों आंखों को लाल कर रही हैं, त्वचा को भी नुकसान पहुंचा रही हैं, हालांकि लोग अपने स्तर पर बचाव की कोशिश कर रहे हैं, डॉक्टरों ने भी विभिन्न टिप्स दिए हैं।
डायरिया व डिहाइड्रेशन
क्यों : दूषित पेयजल के उपयोग से उल्टी-दस्त प्रभावितों की संख्या बढ़ रही है। पसीने के कारण शरीर से अधिक पानी निकल जाने से डिहाइड्रेशन की स्थिति बन रही है।
उपचार/बचाव: साफ पानी का उपयोग करें। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए धूप में बाहर निकलने से पहले पानी पीएं। ज्यादा पसीना बहने पर ओआरएस का सेवन करें। अधिक प्रोटीनयुक्त व अधिक मात्रा में भोजन न लें।
कंजक्टीवाइटिस
क्यों : आंखों में आंसू की परत होती है जो अधिक गर्मी के दौरान सूख जाती है। इससे आंखों में सूखापन आ जाता है। धूल कणों का प्रवेश होने से और समस्या और बढ़ जाती है। इससे आंखें लाल हो जाती हैं, चुभन महसूस होती है।
उपचार/बचाव : आंखों को धूल और धूप से बचाएं। आर्टिफिशियल टीयर डालें। नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह से एंटी एलर्जिक ड्राप का उपयोग किया जा सकता है। धूप के चश्मे का उपयोग करें और ठंडे पानी से थोड़ी-थोड़ी देर में आंखें धोते रहें।
हीट स्ट्रोक
क्यों : यह लू का लक्षण है। यह तब होता है जब शरीर का तापमान 41 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है। सिर में तेज दर्द, चक्कर आना, उल्टी होना, मांसपेशियों में दर्द जैसी परेशानी होती है।
उपचार/बचाव : मरीज को ठंडी जगह पर ले जाएं। ठंडे पानी से नहलाएं। लू से बचाव के लिए बंद गाड़ी में घूमें, केरी का पना या नीबू पानी अधिक पीएं। तबीयत अधिक खराब होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।