'जीते जी मैं बकाया रकम नहीं दूंगीं'
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'जीते जी मैं बकाया रकम नहीं दूंगीं'

चंडीगढ़. Promila 78 वर्षीय प्रोमिला चंद्रमोहन की आंखें भर आई थीं। 25 वर्र्षो से मानसिक तौर पर कमजोर बच्चों के उत्थान में जुटीं प्रोमिला को जब से यह पता चला है कि तमाम रकम चुकाने के बावजूद प्रशासन ने उनके संस्थान पर 8.49 लाख रुपए की देनदारी निकाल दी है, तब से वह आहत हैं।

प्रोमिला ने कहा, ‘मेरे जीते जी इतनी रकम नहीं चुकाई जा सकती। मैंने बड़ी मुश्किल से इस संस्थान के लिए 3.50 करोड़ रुपए का चंदा जमा किया था, एक-एक पाई चुकाने के बाद अब मुझे बताया जा रहा है कि अभी इतनी बड़ी रकम बकाया है, बस बहुत हो गया, मेरी डेड बॉडी से ही अब यह रकम वसूलिए।’

असिस्टेंट इस्टेट ऑफिसर अश्वनी कुमार और उनकी बगल में बैठे शहर के नामी वकील चमन लाल शर्मा ने उन्हें समझाया कि आप ऐसा कतई न सोचें, हल निकलेगा। शर्मा बोले ‘ऐसी संस्थाओं के लिए सरकारें भी मदद करती हैं।’

प्रोमिला बताती हैं कि सेक्टर-36 में ‘सोसायटी फॉर रीहैब्लिटेशन ऑफ मेंटली चैलेंज्ड’ को जमीन अलॉट कर प्रशासन ने अच्छा काम किया। अलॉटमेंट लेटर के हिसाब से प्रशासन का सारा पैसा चुकाया जा चुका है।

वह कहती हैं कि सेंटर पूरी तरह डोनेशन पर चल रहा है। उनके विदेशी सहयोगी भी मदद कर रहे थे और कुछ लोकल लोग भी साथ थे। एक बच्चे पर प्रति माह पांच हजार रुपए खर्च होते हैं जबकि डोनेशन 1200 रुपए ही आ पाती है। सेंटर को अब ज्यादा सहयोग भी नहीं मिल रहा है। बावजूद इसके यहां बच्चों के लिए ऐसे टीचर और थैरेपी उपलब्ध है जो और कहीं नहीं।

क्यों निकला बकाया?

सोसायटी को स्कूल साइट्स अलॉटमेंट पॉलिसी के तहत जमीन अलॉट की गई। 2004 में ज्यादा लोग स्कूल लेने में इच्छुक नहीं थे। रेट था 1800 रुपए प्रति वर्ग गज। अगर कोई सोसायटी छोटी बिल्डिंग बनाती है (एफएआर-.25) तो उसे 900 रुपए प्रति वर्ग गज के हिसाब से जमीन का भुगतान करना था।

जो बड़ी बिल्डिंग बनाते हैं उन्हें 1800 रुपए के हिसाब से। इस सोसयटी से पहले 900 रुपए और बाद में 1800 रुपए के हिसाब से ग्राउंड रेंट वसूलने का फैसला हुआ और ब्याज भी जड़ दिया गया। जिन 34 सोसायटियों को प्लॉट अलॉट किए गए थे उनमें से 23 ने भुगतान कर दिया। इनमें ज्यादातर बड़े स्कूल थे। अलॉटमेंट के बाद नियमों में हुए बदलाव से अब परेशानी खड़ी हुई है।

उनका कहना है

ञ्चहमने इस मामले को प्रशासन के पास भेजा है। उम्मीद है कि इसका हल निकल जाएगा। जिन शर्र्ताे पर जमीन अलॉट की गई है, उससे परे नहीं जा सकते।
- आर.के . राव, इस्टेट ऑफिसर और डीसी, चंडीगढ़



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