भोपाल. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) दसवीं बोर्ड का रिजल्ट मंगलवार को घोषित हुआ। भास्कर ने शहर के विभिन्न स्कूल्स के प्रिंसिपल्स को आमंत्रित कर 10वीं के रिजल्ट पर विस्तृत चर्चा की और जाना कि आखिर वे कौन से विषय हैं जिनमें स्टूडेंट्स ने अच्छा या खराब स्कोर किया और क्यों।
मैथ्स
सेन्ट जोसफ को-एड स्कूल में पीआरओ वसुंधरा शर्मा और मैथ्स टीचर शशि दत्त ने बताया कि स्टूडेंट्स ने इस बार मैथ्स में पिछले कई सालों के मुकाबले कहीं ज्यादा अच्छा स्कोर किया है। यह सही है कि टाइम मैनेजमेंट न कर पाने वाले स्टूडेंट्स को कुछ अंकों का नुकसान भी झेलना पड़ा है।
क्या करें: टिगनोमेट्री, अर्थमेटिक और जियोमेट्री की सालभर प्रैक्टिस करें। सैंपल पेपर खूब हल करें। एनसीईआरटी और रिफ्रेंस बुक से रेगुलर प्रैक्टिस करें। पहले से जवाब न देखें और पूरा सवाल हल करने के बाद उत्तर देखें। एक नंबर के सवालों के लिए अलग से प्रैक्टिस करें। मैथ्स एक महीने पहले तैयार करने वाला विषय नहीं बल्कि रोज एक घंटे सवाल हल करने वाला विषय है।
साइंस
जवाहरलाल नेहरू स्कूल के प्रिंसिपल विजय कुमार एवं ओरायन इंटरनेशनल स्कूल में वाइस प्रिंसिपल अंजना नायर ने बताया कि साइंस में बहुत से स्टूडेंट्स ने पूरे-पूरे अंक हासिल किए हैं। कुछ ही ऐसे स्टूडेंट्स हैं जिन्हें प्रेक्टिकल की वजह से कम अंक में तसल्ली करनी पड़ी।
क्या करें: प्रैक्टिकल की तैयारी भी अच्छी तरह से करें। महत्वपूर्ण टॉपिक्स के अलग से नोट्स तैयार करें। फामरूले एक चार्ट पर अलग से तैयार कर स्टडी टेबल पर लगा लें। चित्र देखकर नहीं बल्कि बिना देखे शीट पर बनाए। पेपर में महत्वपूर्ण बिंदुओं को हाइलाइट करें।
सोशल साइंस
डीपीएस के प्रिंसिपल अजय कुमार शर्मा ने बताया स्टूडेंट्स ने अपने सीनियर्स से सबक लेते हुए साइंस की तरह सोशल स्टडी के लिए भी विशेष तैयारी की। स्कूल मैनेजमेंट ने भी सोशल स्टडी पर ध्यान देते हुए क्लास टेस्ट और टीचर्स को तैयार किया गया था इसका परिणाम भी अच्छे अंकों के रूप में सामने आया।
क्या करें: सोशल साइंस में को रुचि के साथ पढ़ें। पढ़ने का तरीका टीचर्स से सीखें। इतिहास के प्रश्नों को कहानी की तरह समझें। भूगोल में मैप की प्रैक्टिस करें। पिक्चर पहचानने वाले प्रश्नों को ध्यान से देखें।
अंग्रेजी
आईपीएस के प्रिंसिपल डॉ.राजेश शर्मा मानते हैं कि इस बार अंग्रेजी विषय को भी स्टूडेंट्स ने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। यहीं वजह है कि उसका असर अंकों पर देखा गया। शिक्षक अमित शाह ने बताया कि स्टूडेंटस दूसरे विषयों की तुलना में अंग्रेजी की तैयारी परीक्षा के कुछ दिनों पहले ही शुरू करते हैं इसका नुकसान स्टूडेंट्स को उठाना पड़ता है।
क्या करें: अंग्रेजी भी स्कोरिंग है इसलिए दूसरे विषयों की तरह इसे पढ़ें। ग्रामर और पैसेज वाले सवालों की प्रैक्टिस करें। पेपर में शब्द सीमा का ध्यान रखें। सैंपल पेपर और डिक्शनरी की मदद लें।
हिन्दी
नवनिध गल्र्स स्कूल और मिठी गोविंदराम स्कूल की प्राचार्य डॉ.रीना राजपूत ने बताया कि इस बार लड़कियों के साथ-साथ लड़कों की मेहनत भी रिजल्ट में देखी जा सकती है। लेकिन हिन्दी विषय के अंकों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्टूडेंट्स ने हिन्दी को कुछ ज्यादा ही हल्के स्तर पर लिया है। यही वजह है कि टॉपर्स ने भी इसमें अन्य विषयों की तुलना में कम अंक हासिल किए।
क्या करें: स्टूडेंट अति आत्मविश्वास में न रहे कि हिन्दी में नंबर मिल ही जाएंगे। हिन्दी में नंबर कम होने का असर पूरे रिजल्ट पर पड़ता है, इसलिए इस विषय को भी गंभीरता से लें। मात्राओं और सही वाक्य विन्यास बनाने की प्रैक्टिस भी लिख कर करें। कठिन शब्दों को बार-बार लिखकर देखें। व्याकरण, निबंध और सारांश लिख कर देखें।