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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
अभावों में रह कर हासिल की कामयाबीः जिसके स्वभाव में सफलता हासिल करने की जिद हो, उसे कभी अभाव नहीं रोक पाते। यह साबित कर दिया है सीबीएसई की कक्षा 10 की परीक्षा में 91 फीसदी अंक हासिल कर लक्ष्मी नायकने। सेक्टर-33 के गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकंडरी स्कूल की छात्रा लक्ष्मी डॉक्टर बनना चाहती है। रोज 5 से लेकर 11 घंटे तक पढ़ाई करने वाली लक्ष्मी पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानती है।
लक्ष्मी ने सोचा था कि उसके 95 फीसदी अंकआएंगे लेकिन मैथ्स के 84 और साइंस के 86 अंको ने उसे पछाड़ दिया। हालांकि उसे सोशल स्टडीज-98, इंग्लिश-93 और संस्कृत में 94 अंक मिले। लक्ष्मी ने बताया कि पहली से कक्षा नौ तक हमेशा उसने स्कूल में टॉप किया, इस बार टॉप न कर पाने का मलाल है। पढ़ाई के अलावा पेंटिंग और डेक्लामेशन में भी लक्ष्मी ने कई राज्यस्तरीय पुरस्कार जीते हैं।
लक्ष्मी के पिता परशुराम नायक प्राइवेट कंपनी में टाइपिस्ट हैं। परशुराम ने बताया कि वह दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी हैं। पत्नी गृहणी और लक्ष्मी की बड़ी बहन भी पढ़ रही है। ऐसे में परिवार का गुजारा मुश्किल से ही चल पाता है। जिस कंपनी में वह काम कर रहे थे वह बंद हुई तो नौकरी चली गई। बड़ी मुश्किल से दूसरी नौकरी मिली। लक्ष्मी और उसका परिवार सेक्टर-33 में एक ही कमरे में रहते हैं। लक्ष्मी रात-रात भर पढ़ती थी। स्कूल के प्रिंसिपल सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि उन्हें यकीन था कि लक्ष्मी जरूर कामयाबी हासिल करेगी। इसीलिए उसकी स्पेशल क्लास लगाकर भी पढ़ाई करवाई और किताबें भी दीं।
नियमित पढ़ाई जरूरी
‘कुछ भी असंभव नहीं, सब कुछ संभव है’ यह कहना है सीबीएसई की कक्षा 10 की परीक्षा में ट्राईसिटी टॉपर कल्की कुकरेजा का। से. -26 के सेक्रेड हार्ट स्कूल की छात्रा कल्की को 98 फीसदी अंक मिले हैं। उसने बताया कि वह घर में सिर्फ दो से तीन घंटे तक ही पढ़ती थी। इंजीनियरिंग करने की इच्छुक कल्की नियमित पढ़ाई में विश्वास रखती है। उसके अनुसार परीक्षा के दिनों में ही पढ़कर अच्छे नंबर लाना मुश्किल है।
कठोर परिश्रम है राज
ट्राईसिटी में सेकंड पोजीशन हासिल करने वाली सेक्टर-9 स्थित कार्मल कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा आराधना गुप्ता का सपना न्यूरोसर्जन बनने का है। आराधना का कोई रोल मॉडल नहीं है लेकिन जो उससे अच्छा करे, वह उससे और ज्यादा अच्छा करके दिखाना चाहती है। आराधाना रोज दो से तीन घंटे तक पढ़ती थी। आराधना मानती हैं कठोर परिश्रम के अलावा सफलता हासिल करने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
पढ़ें तो एकाग्रचित्त होकर
आराधना के बराबर अंक हासिल कर ट्राईसिटी में सेकंड पोजीशन पर रहने वाली हरसिमरन भाटिया ने बताया कि एकाग्रचित्त हो कर नियमित पढ़ना ही सफलता की सीढ़ी है। पहली से कक्षा 12 तक हरसिमरत ने स्कूल में हमेशा टॉप किया है। हरसिमरत कॉमर्स में एडमिशन लेकर इसी फील्ड में अलग मुकाम हासिल करना चाहती हैं। हरसिमरत ने भी डेक्लामेशन, और डिबेट में कई पुरस्कार जीते हैं।
किरन बेदी हैं रोल मॉडल
ट्राईसिटी में तीसरी पोजीशन हासिल करने वाली शगुन सेक्रेड हार्ट स्कूल-26 की छात्रा है। एनसीसी कैडेट शगुन आईपीएस किरन बेदी को अपना रोल मॉडल मानती है। शगुन हर रोज 3 से 4 घंटे तक अपनी पढ़ाई को सफलता का मंत्र मानती हैं। पढ़ाई से थकने पर वह टीवी देखती था या फिर बैडमिंटन खेलने के लिए चली जाती थी। क्विज में भी शगुन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं।