अजमेर. ख्वाजा साहब का उर्स 25 जून से शुरू होने की संभावना है। इधर, मौसम विभाग ने भी जिले में 25 जून से मानसून सक्रिय होने की उम्मीद जताई है। मानसून और उर्स एक साथ होने से जायरीन को विश्राम स्थलियों पर ठहराने की प्रशासनिक व्यवस्थाएं नाकाफी साबित होंगी। यूआईटी सचिव अशफाक हुसैन ने बताया कि प्रशासन को वैकल्पिक स्थानों की व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
उर्स शुरू होने से पहले मानसून जनित संभावित असुविधाओं का निराकरण जरूरी है। विश्राम स्थालियों के हालात उर्स में आने वाले जायरीन को प्रशासन पुष्कर रोड, कायड़ और ट्रांसपोर्ट नगर स्थित विश्राम स्थलियों पर ठहराता है। पुष्कर रोड विश्राम स्थली में शेड और अन्य सुविधाएं स्थायी हैं। यह दरगाह के नजदीक भी है, इसलिए जायरीन यहां अधिक ठहरना पसंद करते हैं। शेष दो में सारी व्यवस्था अस्थायी करनी पड़ेगी।
जायरीन के लिए वैकल्पिक स्थानों की व्यवस्था होगी
इस बार ख्वाजा गरीब नवाज का उर्स बरसाती मौसम में आने के मद्देनजर जिला प्रशासन तीनों विश्राम स्थलियों के आसपास वैकल्पिक स्थानों की व्यवस्था भी करेगा। स्कूलों व अन्य भवनों का चिह्न्किरण अभी से ही शुरू किया जाएगा। उर्स से संबंधित व्यवस्थाएं 20 जून तक पूरी कर ली जाएंगी। यह निर्णय मंगलवार को कलेक्ट्रेट में कलेक्टर राजेश यादव की अध्यक्षता में उर्स तैयारियों के संबंध में हुई बैठक में किया गया।
उर्स में आने वाले जायरीन को आनासागर, एमडीएस यूनिवर्सिटी के पास और ट्रांसपोर्ट नगर विश्राम स्थलियों पर ठहराया जाएगा और इन पर वाटर प्रूफ शामियाने लगाए जाएंगे। बरसाती मौसम के मद्देनजर इन विश्राम स्थलियों के नजदीक स्थित स्कूल व अन्य भवनों को खाली करवाकर अधिग्रहीत किया जाएगा। तीन जुलाई तक ये भवन जिला प्रशासन के अधिग्रहण में रहेंगे।
एसपी हरिप्रसाद शर्मा ने बताया कि उर्स में सुरक्षा की दृष्टि से व्यापक इंतजाम किए जाएंगे। उर्स के दौरान करीब साढ़े 3 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा। उन्होंने सुरक्षा के संबंध में दरगाह से जुड़े विभिन्न पक्षों से सहयोग की अपेक्षा की। एसपी ने कहा कि ऐसी कोई भी स्थिति नहीं आने दें जिससे टकराव पैदा हो। असामाजिक तत्वों के प्रति सहानुभूति नहीं रखें और उन पर अंकुश लगाने में प्रशासन का सहयोग करें।
कलेक्टर यादव ने दरगाह कमेटी, यूआईटी, नगर निगम, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, डेयरी व रसद विभाग आदि के संबंध में विस्तार से चर्चा की। यूआईटी सचिव अशफाक हुसैन ने बताया कि तीनों विश्राम स्थलियों पर जायरीन के लगभग 4 हजार वाहनों की पार्किग और जायरीन के ठहराने के लिए व्यवस्था की जाएगी।
उर्स का झंडा अब 19 जून को चढ़ेगा
सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के उर्स का झंडा अब 19 जून को चढ़ेगा। गरीब नवाज की महाना छठी की रस्म 31 मई को अदा की जाएगी। हिलाल कमेटी के सदर और शहर काजी मौलाना तौसीफ अहमद सिद्दीकी ने कपासन से चांद दिखाई देने की शहादत के आने के बाद यह जानकारी दी। मौलाना सिद्दीकी ने बताया कि सोमवार को अजमेर में जमादिउस्सानी महीने का चांद नजर नहीं आया था।
20 को उर्स का झंडा चढ़ाने का ऐलान किया गया था। अब आज इशा की नमाज के वक्त कपासन की दरगाह दीवाना शाह से सैयद मुमताज अली और शेख जमील अहमद पहुंचकर शहादत दी कि सोमवार को ही चांद देख लिया था। उनकी शहादत मान ली गई है। अब जमादिउस्सानी की 6 तारीख 31 मई को होगी और 25 तारीख 19 जून को होगी।