अजमेर. एमडीएस यूनिवर्सिटी रैगिंग को लेकर और ज्यादा सख्ती बरतने की तैयारी कर रहा है। रैगिंग रोकने के लिए 25 हजार से 1 लाख रुपए के जुर्माने के बाद अब प्रशासन ने छापामार कार्रवाई की योजना भी तैयार की है। इसके साथ ही किसी भी छात्र को संदेह का लाभ भी नहीं दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुझाए सभी विकल्पों को अपनाने के बाद यूनिवर्सिटी अपने स्तर पर भी इस आपराधिक कृत्य को रोकने के लिए प्रयास कर रही है। छात्रों से अंडरटेकिंग फार्म भरवाने, पालकों के हस्ताक्षर युक्त शपथ पत्र, दोषी छात्रों को अन्य परीक्षाओं से वंचित करने और 5 हजार से 1 लाख रुपए के जुर्माने जैसे कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं।
यूनिवर्सिटी ने अब छापामार कार्रवाई की योजना बनाई है। इसके तहत ऐसी जगहों पर अचानक छापा मारा जाएगा जो रैंगिग के लिहाज से संवेदनशील मानी जाती है। इनमें कॉलेज कैंटीन, लाइब्रेरी, स्टूडेंट कॉमन रूम, गल्र्स एंड बॉयज हॉस्टल, स्टूडेंट सेंटर्स आदि शामिल होंगी। यदि कोई गतिविधि में लिप्त पाया गया तो तत्काल उस पर कार्रवाई की जाएगी।
संदेह का लाभ नहीं
यूनिवर्सिटी प्रशासन रैंगिंग को लेकर इतनी सख्ती बरतने पर आ गया है कि छात्रों को संदेह का लाभ भी नहीं दिया जाएगा। यदि रैंगिंग की शिकायत मिलती है और पुष्टि हो जाती है, लेकिन आरोपी छात्र को पता नहीं भी चलता है, ऐसे में संदेह के घेरे में आए सभी छात्रों को सजा के योग्य माना जाएगा। किसी भी छात्र के प्रति कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। प्रोफेसर केसी शर्मा का कहना है कि कई बार रैंगिंग लेने वाले का नाम सामने नहीं आ पाता। ग्रुप में शामिल कोई भी व्यक्ति सही आरोपी का नाम नहीं बताते। ऐसे में सभी को दोषी मानकर यदि सजा का प्रावधान हो जाए तो शायद डर के कारण यह कुछ हद तक रुक सकती है।
इनका कहना है
हमारी कोशिश है कि रैगिंग नहीं हो। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाएगा। इसके लिए सख्ती आवश्यक है। यह सख्ती सभी संबद्ध कॉलेजों में भी की जाएगी। इसके लिए निर्देश भेजे जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के संवेदनशील स्थानों पर छापामार कार्रवाई भी की जाएगी। -प्रो. भगीरथ सिंह, कुलपति, एमडीएस यूनिवर्सिटी