जयपुर. शहर में प्रस्तावित तीव्र गति बस सेवा (बीआरटीएस) योजना में अब नए कॉरीडोर नहीं बनेंगे, हालांकि सीकर रोड पर तैयार हो चुका कॉरीडोर व दुर्गापुरा में एलीवेटेड रोड बरकरार रहेंगे। यह फैसला मंगलवार को नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई बैठक में लिया गया। योजना की समीक्षा करते हुए शहर में कम चौड़ी सड़कों को बीआरटीएस कॉरीडोर के लिए उपयुक्त नहीं माना गया, जिसके बाद धारीवाल ने बसें चलाने के बारे में जेडीए से संशोधित प्रस्ताव मांगे हैं।
प्रस्ताव में जेडीए को बताना होगा कि डेडीकेटेड कॉरीडोर के अभाव में मिक्स ट्र्रैफिक की स्थिति में बीआरटीएस बसों को सड़क के बीच में चलाया जाएगा या किनारे। पार्किग व्यवस्था और बस संचालन की प्रक्रिया के अलावा जेडीए को अब तक हुए काम की उपयोगिता के बारे में भी बताना होगा।
इस योजना के तहत सीकर रोड पर सी-जोन बाइपास से अंबाबाड़ी तिराहे तक सात किलोमीटर का कॉरीडोर बन चुका है, दुर्गापुरा में एलीवेटेड रोड बन रही है। इन दोनों में कोई बदलाव नहीं होगा। पानीपेच से लेकर सांगानेर पुलिया तक कॉरीडोर बनाने के टेंडर हो चुके हैं और जेडीए ने सवाई जयसिंह हाइवे, सहकार मार्ग और टोंक रोड पर सड़क चौड़ी करने का काम शुरू कर रखा है। अब इस रूट पर नए कॉरीडोर नहीं बनेंगे।
बैठक में नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव जीएस संधु, जेडीए आयुक्त उमेश कुमार, जेडीए के डायरेक्टर इंजीनियरिंग ओपी दौराया समेत बीआरटीएस प्रोजेक्ट से जुड़े प्रमुख इंजीनियर शामिल थे।बेकार गए 75 करोड़ रुपए!बीआरटीएस योजना के लिए केंद्र सरकार से जेएनएनयूआरएम के तहत स्वीकृत 480 करोड़ रुपए में से जयपुर विकास प्राधिकरण अब तक 75 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। इस राशि में सीकर रोड पर कॉरीडोर व दुर्गापुरा में एलीवेटेड रोड समेत विभिन्न सड़कों को चौड़ा करने का काम शामिल है। जानकारों का कहना है कि अब जब सरकार ने नए कॉरीडोर नहीं बनाने का फैसला लिया है, तो सड़कों पर हाइस्पीड बसें भी उसी गति से चलेंगी जिस तरह रोडवेज की सिटी बसें और मिनी बसें।
डेढ़ साल पहले सीकर रोड पर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखने के साथ ही इसकी सफलता को लेकर सवाल उठने लगे थे। तय रूट्स की सड़कों की चौड़ाई अधिकतर स्थानों पर कम होने के बावजूद पानी पेच से चिंकारा कैंटीन, कलेक्ट्रेट से गवर्नमेंट हॉस्टल होते हुए सरदार पटेल मार्ग को कॉरीडोर के लिए चिन्हित कर दिया गया। सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने के लिए भूमि अवाप्ति की बात आई, तो दिल्ली में हुए विरोध को देखते हुए मिक्स कॉरीडोर पर सहमति बनी।
जेएनएनयूआरएम के तहत स्वीकृत 200 करोड़ रुपए में बीआरटीएस की बसें आने में अभी छह माह का समय और लगेगा। ऐसे में सीकर रोड पर बन चुके कॉरीडोर में फिलहाल मिनी बसें और सिटी बसें चलाई जाएंगी।
जिम्मेदारी तय होगी : धारीवाल
नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने भास्कर के सवालों के जवाब में कहा कि सड़कों की कम चौड़ाई, जनता के विरोध और फिजीबिलिटी नहीं होने के कारण नए कॉरीडोर बनाने का काम रोका है। पिछली सरकार की गलतियों को दुरुस्त कर रहे हैं। अफसरों ने पिछली सरकार को जनता के एतराज बताए थे। बिना फिजिबिलिटी के कॉरीडोर? इस सवाल के जवाब में धारीवाल ने कहा- पिछली सरकार को तो लग रहा था कि केन्द्र से पैसा मिल रहा है, इसलिए बर्बाद करो। पिछली सरकार के ज्यादातर अफसर बदल गए हैं। फिर भी पैसे बर्बाद करने वालों की जिम्मेदारी तय होगी।
जयपुर बना ‘प्रयोगशाला’
सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश नंदवाना ने कहा- पिछली भाजपा सरकार ने बीआरटीएस योजना लागू की, वर्तमान कांग्रेस सरकार ने मेट्रो लाने की घोषणा कर दी। जयपुर को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के मामले में दोनों सरकारों ने प्रयोगशाला बना दिया है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जब बीआरटीएस प्रोजेक्ट सफल नहीं हो पाया तो मेट्रो के सफल होने की क्या गारंटी है?