सेंट्रल बोर्ड और सैकंडरी एजुकेशन अजमेर का रिजल्ट मंगलवार को घोषित किया गया। अलग अलग रीजन में चेन्नई सबसे उपर रहा है। इसके बाद दूसरा नम्बर अजमेर का है। लड़कों के रिजल्ट 93.07 परसेंट के मुकाबले लड़कियां 95.74 के साथ आगे थीं।
इस बार सोशल साइंस, हिंदी और इंग्लिश जैसे सब्जैक्ट में स्टूडेंट्स ने बहुत अच्छा स्कोर किया है। हमेशन इन सब्जैक्ट में आसानी से स्कोर नहीं कर पाते थे। जबकि मैथ्स अ ौर साइंस में पिछले साल के मुकाबले थोड़ी कम स्कोरिंग हुई है। टॉपर्स की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है। पिछले साल जयपुर से राशि गुप्ता ने 97.50 परसेंट स्कोर कर टॉपर रही थी।
इस साल अभी सात स्टूडेंट ऐसे जयपुर में देखे आ चुके हैं जिनके 97 परसेंट से ज्यादा नम्बर हैं। सम्यक डागा, शशांक गोयल और विजय कट्टा के 97.4 परसेंट नम्बर हैं। शुभम अग्रवाल 97.33, क्षितिज सिंह के 97.2, वासुकी अग्रवाल और अनिमेश गर्ग ने 97 परसेंट नम्बर प्राप्त किए हैं। पिछले साल ऐसा सिर्फ एक स्टूडेट था जिनके 97 से ज्यादा नम्बर थे। इस साल ऐसे सात स्टूडेंट तो आ चुके हैं और भी बढ़ सकते हैं। पिछले साल अजमेर रीजन का रिजल्ट 94.22 परसेंट था।
इस साल ओवरआल रिजल्ट में 0.15 परसेंट की कमी आई है। सीबीएसई अजमेर रीजन के डायरेक्टर पीआई साबू ने बताया कि मंगलवार को घोषित रिजल्ट में अजमेर रीजन दूसरे नम्बर पर रहा है। पहले नम्बर पर चेन्नई है । वहां के स्टूडेंट की इंग्लिश मजबूत होने के कारण वे हमसे आगे रहे हैं।
अजमेर रीजन से इस साल कुल 87 हजार 403 स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया। इनमें से 81 हजार 984 स्टूडेंट सफल रहे हैं। 4 हजार 702 स्टूडेंट्स के कम्पार्टमेंट लगा और 363 स्टूडेंट फेल हुए हैं। फेल होने वालों में 74 लड़कियां और 269 लड़के हैं। केंद्रीय विद्यालयों में कुल 14 हजार आठ सौ 95 स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी, इनमें से 14 हजार 129 स्टूडेंट पास हुए है। इसका रिजल्ट 95.24 प्रतिशत रहा है। लड़कों का रिजल्ट 94.69 और लड़कियों का रिजल्ट 96.01 प्रतिशत रहा है। इसमें 1.98 प्रतिशत छात्र फेल हुए हैं। गवर्नमेंट स्कूलों का रिजल्ट 64.17 प्रतिशत रहा है। गवर्नमेंट स्कूलों से 812 स्टूडेंट ने दसवीं की परीक्षा दी थी।
साइंस
एमसीक्यू से स्कोर हुआ कम सा इंस के पेपर का डिफिकल्टी लेवल नॉर्मल था, पिछले साल के मुकाबले यह थोड़ा टफ था, लेकिन जिन स्टूडेंट्स के कंसेप्ट क्लीयर हैं उन्हें स्कोर करने में दिक्कत नहीं हुई। साइंस में रिजल्ट पिछले साल से बेहतर है। पेपर काफी कंसेप्चुअल था, लेकिन पेपर का स्तर अच्छा होने के बाद भी एनसीईआरटी की बुक्स पर ध्यान देने वाले स्टूडेंट्स के लिए पेपर काफी ईजी रहा। डीपीएस जयपुर के साइंस फैकल्टी रवि दत्त ने बताया कि इस साल ए प्लस और ए ग्रेड में काफी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, पेपर पिछले कुछ साल से टफ था। मल्टीपल चॉइस क्वैश्चन (एमसीक्यू) के कारण स्टूडेंट को स्कोरिेग में थोड़ी परेशान हुई है। दसवीं के पेपर में नवीं क्लास के प्रैक्टिकल से सवाल पूछने से स्टूडेंट्स को काफी परेशानी हुई। एक साल बाद स्टूडेंट्स को इतना याद नहीं रहता।
सीएफसी में साइंस की एचओडी सुनीता सोनी ने बताया कि अब साइंस में 100 नम्बर लाना बहुत टफ काम हो गया है। दो तीन साल पहले तक स्टूडेंट्स के 95 प्लस नम्बर खूब आते थे, लेकिन एमसीक्यू के कारण इसमें बहुत कमी आई है। एक दो सवाल तो काफी टफ थे। इससे उन्हें 100 परसेंट लाने में दिक्कत हुई। पेपर में कंसेप्चुअल सवालों पर ज्यादा ध्यान दिया गया था। पेपर में दिए गए न्यूमेरिकल्स टफ नहीं थे। कैमिस्ट्री में भी 5 नम्बर के सवाल में कार्बन कम्पाउंड का सवाल था। इसके साथ अथवा में मैटल कम्पाउंड का सवाल भी पूछा गया। कैमिकल रिएक्शन, इक्वेशन बैलेंसिंग और एक्टिविटी बेस्ड सवाल पूछे गए। पेपर लैंदी नहीं था और अतिरिक्त 15 मिनट से स्टूडेंट्स को पूरा पेपर करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया। साइंस इस बार ऐसा सब्जैक्ट रहा जिसमें दूसरों के मुकाबले कम स्कोर हुआ।
हिंदी
बढ़ गए 90 प्लस वाले स्टूडेंट इ स साल हिंदी में काफी सुधार हुआ है। स्टूडेंट्स में मातृभाष को लेकर काफी जागरुकता आई है। दिसम्बर आने के बाद थोड़ी बहुत स्टडी कर लिया करते थे। इससे हिंदी के साथ उनका पूरा रिजल्ट बिगड़ जाता था। नीरजा मोदी स्कूल में हिंदी की एचओडी कविता मुंजाल कहती हैं, हिंदी को ज्यादा टफ या ज्यादा आसान मानने वाले स्टूडेंट्स को परेशानी हुई। हैं। लिखने की प्रैक्टिस से उन्हें काफी मदद मिली है। इस बार हिंदी में भी 90 से ज्यादा नम्बर लाने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी है। पहले स्टूडेंट व्याकरण में काफी गलतियां करते थे।
इस साल गलती कम तो हुई हैं, साथ ही व्याकरण पर बच्चों की अच्छी कमांड देखने को मिली है। टैगोर पब्लिक स्कूल में हिंदी की टीचर मंजूलता अग्रवाल ने बताया स्टूडेंट्स ने हिंदी को मैथ्स और साइंस के बराबर महत्व दिया है। पढ़ाने के तरीके में भी काफी सुधार हुआ है। माहेश्वरी गल्र्स पब्लिक स्कूल में हिंदी की टीचर डॉ. ममता माहेश्वरी ने बताया कि व्याकरण के साथ साथ साहित्य भी पिछले सालों की अपेक्षा आसान रहा। पेपर पूरी तरह से एनसीईआरटी के कोर्स में से ही था। स्टूडेंट्स को निबंध के टॉपिक रोचक लगने से स्टूडेंट्स ने अच्छी तरह से लिखा। वाक्य विन्यास, हिंदी लिखने की गति, वर्तनी की गलतियां कम की हैं। इस साल के पेपर में क्रियापद, पदों का व्याकरणीकरण, वाक्यों का निर्देशानुसार बदलना काफी सरल था। इस साल बेहतर प्रदर्शन किया है।
इंग्लिश
रेगुलर स्टडी और ग्रामर पर पकड़ से स्कोरिंग में मिली मददइस बार इंग्लिश के पेपर का डिफिकल्टी लेवल कम था। इससे स्टूडेंट्स को अच्छे नम्बर स्कोर करने में मदद भी मिली है। ग्रामर में बच्चों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। रिजल्ट में सुधार की एक वजह यह भी है कि इंग्लिश में स्टूडेंट को टाइम मैनेज करने में प्रॉब्लम नहीं हुई है। एग्जाम सेंटर्स पर ज्यादातर स्टूडेंट पेपर को आधा घंटे पहले ही कर चुके थे। पिछले दो तीन साल से इंग्लिश का रिजल्ट सभी रीजन में खराब जा रहा था। इस साल रिजल्ट में काफी सुधार हुआ है।
इस बारे में मानसरोवर के टैगोर पब्लिक स्कूल मानसरोवर में इंग्लिश की एचओडी अंजु माथुर कहती हैं, पहले स्टूडेंट इंग्लिश को वक्त नहीं दे पाते थे लेकिन अब इस मामले में बच्चे काफी सिंसीयर हो गए हैं। पिछले साल चार से पांच परसेंट के 90 प्लस नम्बर थे। इस बार 8 से 10 परसेंट बच्चों के 90 प्लस नम्बर आए हैं। नीरजा मोदी स्कूल में इंग्लिश की टीचर सुनीता सबरवाल कहती हैं,इस बार स्टूडेंट्स ने ग्रामर में काफी सुधार किया है। हालांकि पेपर इतना टफ नहीं था। इस बार पेपर में रीडिंग सैक्शन पिछले साल मुकाबले आसान दिया गया था।
इससे स्कोरिंग पर काफी पड़ा है। माहेश्वरी गल्र्स पब्लिक स्कूल में इंग्लिश की टीचर चयनिका शर्मा ने कहा, अब स्टूडेंट यह मान रहे हैं कि इंग्लिश के बिना रिजल्ट अच्छा नहीं बनेगा और उसे पूरा समय दे रहे हैं। इससे बेहतर स्कोर करने में काफी मदद भी मिली है। इस बार स्टूडेंट्स को राइटिंग सैक्शन में ज्यादा वक्त नहीं लगा। एनसीईआरटी की बुक्स पर ध्यान देने वाले स्टूडेंट्स के लिए पेपर काफी ईजी रहा, क्योंकि पेपर एनसीईआरटी की बुक्स से बाहर नहीं था।
सोशल साइंस
अच्छे नंबर मिले सो शल साइंस इस बार उम्मीद से बेहतर रही है। स्टूडेंट को डर रहता है कि पता नहीं कॉपी की जांच करने वाले कैसी मार्किग करेंगे। इसे बार स्टूडेंट्स के नम्बर देखकर लगता है कि अच्छे से नम्बर दिए गए हैं। पहले सोशल साइंस का पेपर काफी थ्यौरी बेस्ड रहता था। इसमें रटने और लिखने का काम होता था। इससे स्कोर करना थोड़ी मुश्किल था। नीरजा मोदी स्कूल की सोशल साइंस फैकल्टी इंदू दुबे ने बताया कि अब स्टूडेंट को बहुत स्पैसिफिक आंसर लिखने होते हैं।
पेपर पहले की तरह लैंदी भी नहीं होता है। इससे स्टूडेंट का सोशल साइंस के प्रति डर कम हुआ है। पेपर ब्लू प्रिंट देने से भी स्टूडेंट्स को काफी मदद मिली है। उन्हें मालूम था कि किस चैप्टर में से कितने नम्बर के सवाल आने हैं। पिछले पांच साल के पेपर देखे तो उसमें काफी बदलाव आया है। पहले पेपर सब्जैक्टिव होता था। अब सोशल साइंस को ज्यादा कंसेप्चुअल बनाया गया है। हालांकि इस साल के पेपर का डिफिकल्टी लेवल पिछले साल जैसा ही था। अब यह ट्रैंड आ रहा है कि बच्चे सोशल स्टडी में भी अच्छा स्कोर कर रहे हैं। डीपीएस जयपुर में सोशल साइंस के हैड फैसल खान ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले सुधार है। स्टूडेंट अब सोशल साइंस से बोर नहीं होते हैं। इस बार सोशल साइंस में 100 नम्बर लाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या काफी बढ़ गई है। पहले इतने नम्बर लाना बहुत मुश्किल होता था। सोशल सीएफसी से साइंस एक्सपर्ट यामिनी बागड़ा ने बताया कि कंसेप्चुअल होने से पेपर के लिए स्टूडेंट में कॉन्फिडेंस बढ़ा है।
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