मैला ढोने की कुप्रथा के खात्मे की कवायद
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मैला ढोने की कुप्रथा के खात्मे की कवायद

बीकानेर. बीकानेर शहर में ऐसे 1600 मकान हैं जहां फ्लश शौचालय नहीं है। यह सर्वे सुलभ इंटरनेशनल ने किया है और अब नगर निगम के सफाई निरीक्षक इस सूची का सत्यापन कर रहे हैं। सत्यापित सूची के आधार पर क्षेत्रवार एकीकृत फ्लश शौचालय बनाए जाएंगे ताकि मैला ढोने की कुप्रथा को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।

स्वायत्त शासन विभाग ने सुलभ इंटरनेशनल की ओर से उपलब्ध करवाई गई सर्वे सूची बीकानेर नगर निगम को भेज दी है और नगर निगम की ओर से क्षेत्रवार सफाई निरीक्षकों को सूची उपलब्ध करवा दी गई है। भारत सरकार की इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में शौचालय बनाने हैं जिसके लिए सरकार 80 फीसदी तक की राशि अनुदान के रूप में देगी। इस राशि से शुष्क शौचालय के स्थान पर जलप्रवाही (फ्लश) शौचालय बनाए जाएंगे। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए बनाई गई इस योजना के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनवाई गई है। योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर समन्वय एवं निगरानी समिति बनाई गई है।

समिति की ओर से सरकार को डीपीआर का अनुमोदन करके भेजा जाएगा जिसके आधार पर सरकार अनुदान राशि स्वीकृत करेगी। जानकारों का कहना है कि कुछ घरों के बीच शौचालय बनाने की योजना है ताकि मैला ढोने की प्रथा का पूरी तरह से उन्मूलन किया जाए।

रिपोर्ट सच या सर्वे

एक तरफ जहां स्थानीय निकायों से मांगी जाने वाली रिपोर्टो में यह बताया जाता है कि बीकानेर में मैला ढोने की कुप्रथा है ही नहीं वहीं सुलभ इंटरनेशनल की रिपोर्ट कुछ और ही कहती है। अगर शुष्क शौचालय हैं तो जाहिराना तौर पर मैला ढोने की कुप्रथा है। बहरहाल, इस रिपोर्ट को निगम के निरीक्षक सही बता देते हैं तो संभव है कि पिछली रिपोर्ट पर जवाब-तलब किया जा सके।

सर्वे सुलभ इंटरनेशनल का है जिसमें एक-एक मकान का नाम, मालिक के नाम के साथ बताया गया है। ऐसे में इस सर्वे के कागजी होने की आशंका तो नहीं है। इसलिए निरीक्षकों को भी अपनी रिपोर्ट सोच-समझकर करनी होगी



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