कॅरिअर की पहली सीढ़ी जीती
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कॅरिअर की पहली सीढ़ी जीती

जयपुर. सीबीएसई बोर्ड का रिजल्ट आते ही स्टूडेंट्स की धडकन तेज हो गई। पेरेंट्स भगवान से दुआ करने लगे, मेरा बच्चा मैरिट में आए। रिजल्ट देखने पर बेटा-बेटी के टॉपर पाते ही पेरेंट्स की आंखें नम हो गई। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बच्चों की हौसलाअफजाई करने के बाद रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों को यह खुशखबरी देने का सिलसिला शुरू हुआ। इधर, घर में मिठाई के साथ सेलिब्रेशन शुरू हो गया। टॉपर बेटा, बेटी की डिमांड पेरेंट्स पूरी करने में जुट गए।

मां की आंखें भर आईं

जब मां को मालूम चला, आज बेटे का रिजल्ट आया है। उसने खेलने गए बेटे को बुलाने के लिए दोस्त को भेजा। बेटे शशांक गोयल ने रिजल्ट देखा। कहा, मां मैंने 97.4 परसेंट मार्क्‍स हासिल किए हैं। यह सुनकर मां की आंखें भर आईं। सेंट एंसलम्स पिंक सिटी स्कूल के पढ़ने वाले शशांक ने बताया कि रात में जल्दी सो जाना, उसकी कमजोरी थी। घर के सामने मंदिर होने से दिन में पढ़ नहीं पाता था। उसके लिए स्टडी करना मुश्किल हो गया। तभी मां ने हिम्मत जगाई। वे बेटे के साथ रातभर जागती थीं। उसने मैथ्स में 100 और संस्कृत में 99 मार्क्‍स मिले हैं।

स्टडी को भी एंजॉय करो

मम्मी-पापा ने स्टडी को लेकर कभी बर्डन नहीं बनाया। उन्होंने सिर्फ एक ही मंत्र दिया, पढ़ाई को मस्ती की तरह लो। नंबर लाने से ज्यादा सीखना जरूरी है, मैंने भी यही किया। मैं सफल रही। यह कहना है, एमजीडी गल्र्स स्कूल की वासुकी टिक्कीवाल का। उन्होंने 97 परसेंट मार्क्‍स हासिल किए हैं। एसएसटी में 100 नंबर मिले हैं। इसके लिए उसने पॉइंटवाइज नोट्स बनाकर पढ़ाई की थीं। रात की बजाय सुबह जल्दी स्टडी में विश्वास करती थी।

फ्री माइंड स्टडी ही सक्सैस मंत्र

मैंने नोट्स की बजाय स्टडी पर विशेष जोर दिया। रैग्यूलर स्टडी और टाइम टेबिल के हिसाब से हर सब्जैक्ट को रोजाना मैनेज करता था। एनसीईआरटी की बुक्स ज्यादा रिवाइज करता था। इसी वजह से मैंने 97.4 परसेंट मार्क्‍स प्राप्त किए हैं। यह कहना है, सीडलिंग पब्लिक स्कूल के विजय कट््टा का। उसने बताया कि हार्ड वर्क, डिटरमिनेशन, टीचर्स का सपोर्ट और कंसेप्ट बेस्ड स्टडी सक्सैस मंत्र है। वह फ्री मांइड स्टडी करता था। पेरेंट्स ने कभी कोई दबाव नहीं बनाया।

उम्मीद ही छूट गई थी

97.33 परसेंट मार्क्‍स हासिल करने वाले शुभम अग्रवाल के पेरेंट्स ने बेटे के पास होने की उम्मीद ही छोड़ दी। एग्जाम से 10 दिन पहले तक शुभम हॉस्पिटल में एडमिट था। डिस्चार्ज होने के बाद भी उसे रोजाना इंजैक्शन लेने पड़ते थे। बेटे की ऐसी हालत देखकर पिता अनिल अग्रवाल को लग रहा था, वह पास भी नहीं हो पाएगा। सालभर की मेहनत खराब जाएगी, लेकिन शुभम ने पिता की उम्मीद पर पानी नहीं फेरा। थोडा सा रिलैक्स होते ही उसने स्टडी शुरू कर दी। उसे रिजल्ट भी अच्छा मिला। एमपीएस के शुभम ने बताया, उसने मैथ्स में 99 मार्क्‍स प्राप्त किए हैं। वह दो घंटे रोजाना प्रैक्टिस करता था। रात की बजाय सुबह साढ़े चार बजे उठकर पढ़ता था। उसकी सबसे बड़ी कमजोरी स्पैलिंग अशुद्ध लिखना था। जिसे उसने सुधारा।

रिपोर्ट : प्रणीता भारद्वाज



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