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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. बिरकोना का कपूर ताल गुप्तकालीन इतिहास को उजागर करेगा। तालाब की खुदाई में प्राचीन इर्ंट मिले हैं, जिसका संबंध छठवीं-सातवी शदी से होने का अनुमान है। अब पुरातत्व विभाग की देखरेख में तालाब की खुदाई होगी, ताकि प्राचीन धरोहर को सहेजने के साथ हर्ी ईटों की कहानी समझी जा सके।
शहर से लगे बिरकोना ग्राम के कपूर ताल की खुदाई हो रही है। दो दिन पहले ग्रामीण उस वक्त चौक गए, जब खुदाई के समय तालाब के तल पर सीढ़ियां दिखने लगी। सीढ़ी में इस्तेमाल किए गर्ए ईटों का आकार बोल्डर के बराबर है। इनकी मजबूती प्राचीन इतिहास को स्वत: ही बयां कर रही हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि प्राचीन समय में ईटों की जुड़ाई बेल और चूना के गारे से होती थी। तालाब में मिली सीढ़ी की जुड़ाई भी प्राचीन गारे से होने की बात कही जा रही है। ऐसा नहीं है कि तालाब में पहली बार ईट मिली हो।
ग्रामीण बताते हैं कि 10 वर्ष पहले अविभाजित मध्यप्रदेश के समय भी तालाब मेर्ं ईटें मिली थी। इसे पुरातत्व विभाग को सौंपा गया था। पुरातत्व विभाग की उदासीनता के कारर्ण ईटों का इतिहास तालाब में कैद रह गया।
इस वर्ष सिंचाई विभाग तालाब की खुदाई करा रहा है। खुदाई शुरू होते ही तालाब के चारो ओर सीढ़ियां नजर आ रही हैं। बिरकोना के पंच जनकराम खरे कहते हैं कि पूर्वजों ने उन्हें बताया था कि गुप्ताकालीन युग में तालाब से शिवरीनारायण जाने का गुप्त रास्ता था।
इसी तरह छगनराम बघेल कहते हैं कि तालाब 80 वर्ष पुराना है और तालाब बनने से पहले यह स्थान घना जंगल हुआ करता था। उन्होंने बताया कि कल्चुरी राजवंश में रतनपुर राज्य की राजधानी हुआ करती थी। सीढ़ियों को कलचुरी राजवंश से भी जोड़ा जा रहा है।
बहरहाल अनुविभागीय अधिकारी संतोष देवांगन ने आज तालाब का दौरा किया र्औ ईटों को समझने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि तालाब में प्राचीर्न ईटों से बनी सीढ़ियां साफ दिख रही हैं। इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग को दी जाएगी। एसडीएम ने बताया कि शासन पुरातत्व विभाग की निगरानी में तालाब की खुदाई कराएगा और इतिहास को जानने की कोशिश करेगा।