पानी के लिए हाहाकार
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पानी के लिए हाहाकार

बिलासपुर. टाइगर रिजर्व सहित समूचा जंगल मरूस्थल बन चुका है। दो चार तालाबों में बचा पानी भी अब तब सूखने को है। ऐसे में प्यास से तड़पते शाकाहारी वन्यप्राणियों को गला तर करने पेड़ों की छाल और पत्तियों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं मांसाहारी जीव मीलों का सफर तय कर पानी तक पहुंच रहे हैं।

अचानकमार अभ्यारण जो कि अब टाइगर रिजर्व बन चुका है उसकी हालत देखकर डेढ़ दशक पहले की याद ताजा हो गई। वर्ष 1993-94 में जैसा सूखा पड़ा था ठीक वैसी ही वर्तमान स्थिति है। सूखे का कहर सबसे ज्यादा मूक वन्यप्राणियों पर है। पानी के लिए उन्हें यहां वहां भटकना पड़ रहा है।

अचानकमार से सिहावल सागर, जल्दा, सारसडोल होते हुए छपरवा और वहां से कटामी, दियाबार, साहेबपानी होते हुए लमनी तक की स्थिति का जायजा मंगलवार को भास्कर की टीम ने लिया। मनियारी नदी पूरी तरह से सूखी मिली। उसमें कहीं भी एक बूंद पानी नजर नहीं आया। गर्म से चटखते पत्थर और दहकती रेत नदी की हालत बयां कर रही थी।

अचानकमार के जंगल में प्रवेश करते ही पहले एक नाला पड़ता है वह पूरी तरह सूखा है। उसमें एक गड्ढा बनाकर उसमें पानी भरा जा रहा है। वहां से आगे बढ़ने पर कुड़ेरापानी तालाब है, जिसे कभी किसी ने सूखा नहीं देखा, लेकिन इस बार वह पूरा सूख चुका है।

तालाब के बीच में 20 से 25 वर्ग की फिट का दो फिट गहरा गड्ढा खोदकर उसमें पहले बड़ा पालीथीन डालकर पानी भरा गया है। ऐसा पानी को सूखने से बचाने किया गया है। ऐसा ही इंतजाम आमानाला, ढेलकहा कंपार्टमेंट 120 में किया गया है। सारसडोल और जल्दा के निस्तारी तालाब में पानी है, लेकिन तेज गर्मी को देखते हुए इसके भी ज्यादा दिन बचे रहने की संभावना कम है।

गेंमरेंज में कहीं भी वन्यप्राणियों के लिए पानी भरने का काम नहीं दिखा जबकि उस रेंज के नदी नाले पूरी तरह सूखे हुए हैं। उस क्षेत्र के गांव के जानवर भी पानी के लिए भटकते दिखे ऐसे में वन्यप्राणियों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। वन्यप्राणियों के पानी एकत्र क रने का काम लमनी रेंज में भी दिखाई दिया। अचानकमार के वनरक्षक जुगलदास पंत ने बताया कि ऐसी स्थिति वर्षो बाद निर्मित हुई है।

यहां पर साहेबपानी स्टापडेम के नीचे गड्ढा कर उसमें प्रतिदिन सुबह शाम पानी भरा जा रहा है। वहां पर बेंदरामाढ, मेंढकी सरई में भी पानी की व्यवस्था की जा रही है। वैसे वहां पर माटी नाला, भोलकानाला, दियाबार तालाब में पानी है यहां पर प्रतिदिन वन्यप्राणी दिखाई पड़ रहे हैं।

..पर यह पर्याप्त नहीं

टाइगर रिजर्व के कोर और बफर एरिया में वन्य प्राणियों के लिए पानी उपलब्ध कराने की कवायद सुबह से ही शुरू हो जाती है। एक-एक हजार लीटर के पानी की टंकियों में पिकप के जरिए पानी जंगल के अंदर वाटर होल्स तक पहुंचाए जा रहे हैं।

सुबह शाम मिलाकर 25 हजार लीटर से अधिक पानी जंगल के अंदर पहुंच रहा है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। बाइसन, चीतल व अन्य जीवों को बहुत ज्यादा पानी की आवश्यकता पड़ती है। वैसे तो गर्मी की वजह से सभी वन्यप्राणियों और परिंदों को पानी की जरूरत पड़ती है। विभागीय स्तर पर पानी की उपलब्धता के प्रयास अवश्य चल रहे हैं लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। आने वाले समय में ऐसी स्थिति निर्मित न हो यह प्रयास करना होगा।

ञ्चवन्यप्राणियों की आवश्यकता के अनुरूप वाटर होल्स तक पानी पहुंचाने का काम सुबह शाम चल रहा है। चूंकि पानी कुछ निश्चित स्थानों पर ही डाले जा रहे हैं इसलिए उन वाटर होल्स पर निगरानी भी रखी जा रही है। वहां पर कर्मचारियों का तैनात रखा जा रहा है। पानी के साथ कोई छेड़खानी न करे इस पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रतिदिन सुबह शाम 6 से 10 हजार लीटर से अधिक पानी वाटर होल्स में डाले जा रहे हैं। - डीएन त्रिपाठी रेंजर अचानकमार रेंज बिलासपुर

ञ्चजंगल में सूखे की स्थिति तो है, लेकिन यह भयावह नहीं है। वन्यप्राणियों के लिए पानी उपलब्ध कराएं जा रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम लगभग 10 हजार लीटर पानी विभिन्न स्थानों में डाले जा रहे हैं। जहां-जहां ज्यादा सूखा है वहां नजर रखा जा रहा है। विगत दो वर्र्षो से बारिश कम होने की वजह से जंगल में पानी की कमी हो गई है। सूखे की स्थिति की देखते हुए बहुत से वन्यप्राणी गांव के आसपास चले जा रहे हैं।
- ए. सिदार, रेंजर लमनी, रेंज बिलासपुर

रेलवे में संकट

बिलासपुर. मंगलवार को रेलवे कान्फ्रेंस हाल में नव पदस्थ डीआरएम सीबीके सिंह और एसईसीआर मेन्स यूनियन के पदाधिकारियों के बीच पहली बैठक हुई। परिचात्मक बैठक में जान-पहचान के अलावा रेलवे क्षेत्र की समस्याओं पर भी चर्चा हुई।

यूनियन ने डीआरएम को बताया कि रेलवे कालोनी में पेयजल की समस्या है। यूनियन ने कहा कि जोन बनने के बाद भी पेयजल आपूर्ति की कोई बड़ी योजना नहीं बनाई गई। इसके कारण क्षेत्र में पेयजल की समस्या है। यूनियन के पदाधिकारियों ने डीआरएम से मांग की कि लोगों को पानी जैसी मूलभूत सुविधा प्राथमिकता के तौर पर उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा पुराने मकानों की मरम्मत नहीं होने और रनिंग स्टाफ की समस्याओं को भी डीआरएम के सामने रखा गया।

डीआरएम सीबीके सिंह ने समस्याओं को दूर करने का आश्वासन दिया और अपनी बिलासपुर पोस्टिंग पर प्रशन्नता जाहिर की। उन्होंने कहा कि बिलासपुर भारतीय रेल का ऐसा डिवीजन है, जो लदान को लेकर हर वर्ष कीर्तिमान स्थापित करता है। उन्होंने डिवीजन की सफलता का श्रेय यहां के यूनियन और कर्मचारियों को दिया। बैठक में वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी मो. हफीज, मेन्स यूनियन के डिवीजनल को-आर्डिनेटर मनोज बेहरा, एन बैनर्जी, एसएम जयप्रकाश, संजय सिन्हा, पीके भट्टाचार्य, श्रीमती मेरी एके राम, पीएन राय, सतीश साहू, पीके यादव, एस बन्दोपाध्याय, रमेश बाबू सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।



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