उदयपुर. सुंदरवास क्षेत्र में स्थित शिवकुंज गली में मंगलवार सुबह अतिक्रमण ध्वस्त करने गए नगर परिषद के अतिक्रमण निरोधी दस्ते को आधी कार्रवाई करके ही लौटना पड़ा, क्योंकि इस मामले में अतिक्रमी हाईकोर्ट से परिषद के खिलाफ स्टे ले आया। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि परिषद द्वारा समय रहते कार्रवाई नहीं करने का नतीजा है। क्षेत्रवासियों ने परिषद पर मिलीभगत का आरोप लगाया है।
अपर जिला न्यायाधीश संख्या एक ने सुंदरवास में सड़क पर किए गए निर्माण को ध्वस्त करने और परिवादी को पूर्व में दिए क्षतिपूर्ति के रूप में दिए पंद्रह हजार 500 रुपए वापस परिषद कोष में जमा कराने का आदेश दिया। इस फैसले के बाद परिषद के अतिक्रमण निरोधी दस्ते ने मंगलवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। इस बीच परिवादी हाईकोर्ट से स्टे ले आया। इस पर परिषद को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को रोकना पड़ा।
इस आधी-अधूरी कार्रवाई से नाराज क्षेत्रवासी नगर परिषद कमिश्नर रामजीलाल मीणा के पास पहुंचे, जहां इन लोगों ने अतिक्रमी को श्रेय देने का आरोप लगाया। इसको लेकर क्षेत्रवासी अधिकारियों से उलझ पड़े। इनका आरोप था कि नगर परिषद ने अतिक्रमी को हाईकोर्ट में जाने का समय दिया है। स्थानीय न्यायालय ने नगर परिषद के हक में छह दिन पूर्व ही फैसला दिया था, लेकिन कार्रवाई नहीं करके नगर परिषद ने अतिक्रमी से मिलीभगत उजागर कर दी है।
इस मामले में हाईकोर्ट से स्टे मिलने की सूचना फोन और फैक्स से मिलने के बाद अतिक्रमण ध्वस्त करने की कार्रवाई रोकी गई है। क्षेत्रवासियों ने ऑफिस में घुसकर हंगामा किया और मिलीभगत का आरोप लगाया है, जबकि कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश की पालना में रोकी गई है। इस संबंध में इन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने पर विचार किया जा रहा है। -रामजीलाल मीणा, आयुक्त नगरपरिषद उदयपुर यह था स्थानीय न्यायालय का फैसला
वर्धमान नगर, उत्तरी सुंदरवासी में शिवकुंज के पीछे मोहनलाल पुत्र कन्हैयालाल सियाल ने अपने मकान के आगे सड़क पर पांच फीट चौड़ा और 44 फीट आठ इंच लंबा अतिक्रमण कर रखा था, जिसे नगर परिषद ने 1995 में ध्वस्त कर दिया। मोहनलाल सियाल ने न्यायालय में नगर परिषद के खिलाफ वाद दायर किया। न्यायालय ने नगर परिषद को मोहनलाल के तोड़े गए निर्माण का हर्जाना 15 हजार पांच सौ रुपए देने के आदेश हुए।
इस मामले में मोहनलाल सियाल ने नगर परिषद से हर्जाना लेकर फिर से सड़क की भूमि पर अतिक्रमण कर लिया। नगर परिषद ने इस निर्णय के खिलाफ अपर जिला न्यायाधीश संख्या एक की अदालत में अपील की, जिस पर न्यायालय ने अपील को स्वीकार करते हुए 20 मई, 09 को न्यायालय सिविल न्यायाधीश (क.ख.) शहर उत्तर द्वारा उक्त प्रकरण में पारित निर्णय व डिक्री को खारिज कर दिया और हर्जाना पुन: नगर परिषद को लौटाने और सड़क पर किए गए अतिक्रमण को ध्वस्त करने के आदेश किए थे।