सपने हो गए साकार
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सपने हो गए साकार

रिपोर्टर. किसी को कार्डियोलॉजिस्ट बनना है, किसी को दूसरे शहरों के आईआईटी में जाना है, कोई आईएएस बनना चाहता है, तो कोई साफ्टवेयर इंजीनियरिंग में नाम कमाना चाहता है। सफलता से उत्साहित छात्र अब आगे की प्लानिंग के लिए भी जुट गए हैं। पीएमटी, पीईटी, पीपीएचटी और पीएटी में टॉप टेन में शामिल राजधानी के छात्रों से सिटी भास्कर ने एक खास मुलाकात कर उनके सपने जाने।

मुझे तो यही पसंद है>
अपने पहले ही प्रयास में टॉप टेन में पांचवां स्थान बनाने वाली पूजा दुबे को भविष्य में इंजीनियर बनना है। पिता डॉक्टर राकेश दुबे और मां रुचि दुबे भी बेटी की इच्छा का पूरा सपोर्ट करते हैं। इंजीनियरिंग का विषय उन्हें खासा पसंद है इसलिए उन्होंने शुरू से ही पीईटी की तैयारी की। उन्हें पढ़ाई करना सबसे अच्छा लगता है।

मुझे तो मुंबई जाना है
आईआईटी मुंबई से इंजीनियरिंग का कोर्स करने की इच्छा रखने वाले सुदीप्तो मजुमदार ने अपने पहले ही प्रयास में पीईटी में सातवां स्थान बनाया है। उनके पापा डॉक्टर सेवाव्रत मजूमदार होमियोपैथी डॉक्टर हैं और मम्मी महामाया यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में असिस्टेंट मैनेजर हैं। रोजाना १४ से १५ घंटे की पढ़ाई करने वाले सुदीप्तो को खाली समय में संगीत सुनना पसंद है।

टेंशन फ्री पढ़ाई ने दिलाई सफलता>
सीजी पीईटी में पहले स्थान पर रहने वाले शाश्वतकुमार शुक्ला बताया कि टेंशन फ्री पढ़ाई की वजह से ही उन्हें बड़ी सफलता मिली। उनके पिता वन विकास निगम रायपुर के मुख्य वन संरक्षक अतुलकुमार शुक्ला और मां निमेष ने बेटे को फ्री हैंड दिया है कि उन्हें करियर के लिए जो लाइन चुननी है, वे चुन सकते हैं।

साफ्टवेयर इंजीनियर बनूंगा>
पीईटी में प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त करने वाला शिखर खन्ना ने कहा कि वे साफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं। पिता राजीव खन्ना और माता शिवानी खन्ना को भी इस बात की खुशी है कि उनका बेटा इंजीनियर बनना चाहता है। रोजाना तीन घंटे की पढ़ाई करने वाले शिखर को म्यूजिक और कुछ देर टीवी देखने का शौक है। उन्होंने अपने पहले प्रयास में यह सफलता हासिल की है।

आईएएस बनूंगा>
पीईटी मेरिट लिस्ट में आठवें स्थान पर रहने वाले शाश्वत गोपाल की दिली इच्छा है कि वे पहले इंजीनियर और फिर आईएएस बनें। पिता लालेश्वर गोपाल और मां कुसुम गोपाल भी बेटे की इच्छा से सहमत हैं।

पहले ही प्रयास में सफलता पाने वाले गोपाल ने पढ़ाई के लिए फिक्स समय नहीं बांधा था। उनका दिल जब करता, वे तब पढ़ाई करते हैं। उन्हें फुटबॉल खेलने का शौक है।

कार्डियोलॉजिस्ट बनकर करूंगा लोगों की सेवा

पीएटी में दसवां और पीपीएचटी में नवां स्थान हासिल करने वाले देवेशकुमार नायक भविष्य में कार्डियोलॉजिस्ट बनकर लोगों की सेवा करना चाहते हैं। फिलहाल उन्हें ऑल इंडिया पीएमटी के रिजल्ट का इंतजार है। बीपी नायक और अंजू नायक के सुपुत्र को इस बात का दुख भी है कि उन्हें सीजी पीएमटी में बेहतर रैंक नहीं मिला है। रोजाना ९ से १क् घंटे की पढ़ाई करने वाले देवेश को क्रिकेट देखना भाता है। उनके पसंदीदा खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट हैं। इसलिए आईपीएल के दौरान वे चाहते थे कि डेक्कन चार्जेस ही इस साल की विजेता बने।



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