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Raipur Raipur रायपुर.
पीईटी के नतीजों की घोषणा के बाद अब एडमिशन की बेसब्री बढ़ गई है। विद्यार्थियों को इस बात की चिंता सताने लगी है कि काउंसिलिंग में उनका क्या होगा। उन्हें बेस्ट कालेज या बेहतर ब्रांच की सीटें मिल पाएंगी? यह चिंता स्वाभाविक है। इंजीनियरिंग के एक्सपर्ट्स की विद्यार्थियों को सलाह है कि वो चिंता न करें। ठंडे दिमाग सोचें फिर ऐसा ब्रांच चुनें, जो आने वाले चार सालों में एक बेहतर जॉब ऑप्शन साबित हो।
जीईसी के पूर्व डायरेक्टर व सीवी रमन विवि के कुलपति डा. एएस झाड़गांवकर का कहना है कि अब सभी कॉलेजों की फीस एक समान होगी। ऐसे में कॉलेजों से ज्यादा जरूरी होगा ब्रांच का चयन। ब्रांच सलेक्शन से पहले इसके स्कोप का पता लगा लें। कालेजों की संख्या बढ़ गई है और ज्यादातर कालेजों में एक जैसे ब्रांच हैं। जीईसी, केआईटी के पूर्व डायरेक्टर डॉ. पीके श्रीवास्तव ने बताया कि सभी ब्रांच का बराबर महत्व है।
इंजीनियरिंग की एक अच्छी पढ़ाई ही भविष्य बनाती है। उन्होंने कहा कि ब्रांच के सलेक्शन से पहले इसके भविष्य का मंथन जरूरी है। चार सालों बाद जब बीई की डिग्री मिलेगी तो क्या इस ब्रांच में जाब का स्कोप है। एडमिशन के दौरान कालेज भी मायने रखता है। कालेज के चयन में सबसे ज्यादा जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर है। इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगा, पढ़ाई अच्छे से होगी।
बाजारवाद पर न जाएं
कैरियर काउंसिलर मनजीत कौर ने कहा कि 12 वीं के बाद आगे की पढ़ाई तय करना थोड़ा मुश्किल होता है। विद्यार्थी अगर मार्केट में सबजेक्ट स्कोप, जाब आपशन या लुभावने संस्थानों पर ध्यान दे, तो यह जरूरी नहीं वह सही हो। महत्वपूर्ण है, सेल्फ एनालिसस. यानि स्वयं को परखना। खुद की पहचान अपनी काबिलियत से करें। आप क्या कर सकते हैं? आपके लिए क्या बेहतर है?
कहने का मतलब यह है कि मेडिकल या इंजीनियरिंग जैसे फील्ड में वही ब्रांच चुना जाए, जो आपको एक बेहतर मुकाम पर पहुंचा सकता है। आज के दौर में सबकुछ बाजारवाद पर निर्भर है। दुनिया में मंदी के कारण कई बड़ी कंपनियों ने छंटनी की, जिसमें ढेरों का भविष्य दांव पर लग गया। हजारों बेरोजगार हो गए। परंतु गौर करने वाली बात यह है कि जो काबिल थे, जिनका काम परफेक्ट था, उनकी नौकरी सलामत है।
उन्होंने कहा कि करियर चुनने वाले इस बात पर ज्यादा ध्यान देते हैं, कि मार्केट में किसकी डिमांड है। यह सही है, लेकिन मार्केट के लिए अपनी काबिलियत के साथ समझौता करना ठीक नहीं होगा। कंप्यूटर साइंस से भी बीई करने वाला छात्र भी इलेक्ट्रानिक्स और मेकैनिकल पासआउट छात्रों से भी आगे बढ़ सकता है। आप अपने क्षेत्र में श्रेष्ठ हैं, तो आपकी कद्र होगी। आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
मेडिकल फील्ड में भी सारे विभाग और कालेजों से ज्यादा जरूरी विद्यार्थी की खुद की पढ़ाई होती है। इंजीनियरिंग की काउंसिलिंग में एडमिशन से पहले ऐसे कालेज का चुनाव करें, जहां ताम-झाम और दिखावे से ज्यादा पढ़ाई को महत्व दी जाती हो। एसी क्लासरूम या बेहतर सुविधा से ज्यादा महत्व एक पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर स्टाफ वाले कालेज की है।
पीएमटी में बढ़ी संभावना
पीएमटी में अच्छी रैंक आने वालों के लिए राज्य में मेडिकल व डेंटल किसी भी कॉलेज में दाखिले के विकल्प है। रायपुर और बिलासपुर मेडिकल कॉलेज के अलावा जगदलपुर में भी मेडिकल खुलने के बाद प्रदेश में तीन कॉलेज हैं। रायपुर व बिलासपुर मेडिकल कॉलेज 100-100 सीटों के हैं। जगदलपुर का कॉलेज अभी 50 सीटों का है। रायपुर मेडिकल कॉलेज की 50 सीटें बढ़ाने की कवायद चल रही है।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से अनुमति मिलने के बाद 50 सीटों का इजाफा और हो जाएगा। इससे 250 से नीचे की रैंक में आने वालों के लिए भी मेडिकल कॉलेज में दाखिले का रास्ता साफ हो जाएगा। डेंटल कॉलेज में दाखिले के लिए खासे विकल्प हैं।
राजधानी में सरकारी डेंटल कालेज है। इसके अलावा दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव और बिलासपुर में छह प्राइवेट कालेज हैं। सभी कॉलेज 100-100 सीटों वाले हैं। काउंसिलिंग की तैयारी ऐसे करें : निवास, आय, सहित सभी प्रमाणपत्रों की छाया प्रति के तीन-चार सेट तैयार रखें। प्रमाण-पत्रों को राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित करवाना न भूलें। हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल का रिजल्ट भी काउंसिलिंग में दिखाना अनिवार्य है।
यदि हायर सेकेंडरी के बाद पीएमटी की परीक्षा देने में गैप हुआ है तो इसका कारण दर्शाने वाला शपथपत्र बनवाकर रखें। छत्तीसगढ़ डेंटल कालेज के संचालक मंडल के सदस्य सुनील बरडिया ने बताया कि बीडीएस के बाद एमडीएस की सुविधा केवल उन्हीं के कालेज में है। राज्य का पहला कालेज होने के कारण यहां सभी तरह की सुविधा उपलब्ध है। कालेज की मान्यता को लेकर भी किसी तरह का विवाद नहीं है।
एडमिशन मिलेगा कांपीटिशन बढ़ेगा
रायपुर . राज्य के 39 इंजीनियरिंग कालेजों में इस बार एडमिशन से ज्यादा ‘बेस्ट कालेज एंड बेटर ब्रांच’ पर जोर होगा। सभी कालेजों की कुल 11,880 सीटों के लिए काउंसिलिंग में 24,521 उम्मीदवार भाग लेंगे। एडमिशन में दिलचस्प बात यह है कि नौ नए संस्थान भी इंजीनियरिंग कालेजों की सूची में शामिल हो जाएंगे।
इनके शुरू होने से सीटों का आंकड़ा 14 हजार के पार पहुंच जाएगा। ऐसे में एडमिशन मिलने की संभावना तो सभी को होगी, लेकिन अच्छे ब्रांच और कॉलेज की मारामारी बढ़ जाएगी। वर्ष 2007 में 14 इंजीनियरिंग कालेजों की चार हजार सीटों के लिए काउंसिलिंग का आयोजन हुआ था। तब पीईटी में बैठने वालों की संख्या करीब 17 हजार थी। इनमें से 8 हजार छात्र ही काउंसिलिंग में भाग ले पाए थे कि सीटें फुल हो गईं।
पिछले साल 2008 में इंजीनियरिंग का ऐसा बूम चला कि 25 नए इंजीनियरिंग कॉलेज खुल गए। इसका परिणाम यह हुआ कि पीईटी में शामिल होने वाले 21 हजार छात्रों को भी काउंसिलिंग में बुलाने पर सीटें नहीं भर पाईं। 39 कॉलेजों में ऐसे 10 कॉलेज थे, जिनकी करीब 1740 सीटें शेष रह गई। इंजीनियरिंग के एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालात बदल चुके हैं। कालेजों की बढ़ती संख्या के कारण अब छात्रों के बजाए कालेजों में होड़ मचने लगी है। पीईटी में अच्छे रैंक वालों के लिए ढेरों ऑप्शन हैं। उन्हें एडमिशन के लिए कॉलेज वालों ने ऑफर भी देना शुरू कर दिया है।
चार ब्रांच में रहेगी मारामारी : नए कॉलेजों के मुकाबले जिन पुराने कालेजों को रिस्पांस नहीं मिलता था, उनकी भी सीटें कीमती हो गई हैं। दो साल पहले तक जिन कॉलेजों की सीटें नहीं भर पाती थीं, वहां भी अब अच्छे छात्रों की भीड़ होने लगी है। यह ब्रांच का असर है। मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिविल ऐसे ब्रांच हैं, जिनमें एडमिशन की हमेशा मारामारी रहती है। ज्यादातर नए कॉलेजों में भी ये ब्रांच उपलब्ध हैं, क्योंकि इन ब्रांचों में एडमिशन की भीड़ रहेगी।