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Raipur Raipur रायपुर.
पीयूसीएल नेता विनायक सेन ने कहा कि उन्हें राज्य सरकार से खतरा महसूस हो रहा है। कानून का जिस तरह से गलत उपयोग हो रहा है, ऐसी दशा में उनके साथ कुछ भी घटित हो सकता है। इसके बावजूद शांति के लिए उनका अभियान जारी रहेगा।
जमानत पर छूटने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए सेन ने कहा कि वे नक्सली नहीं हैं। उन्हें मानव अधिकार की रक्षा के लिए लड़ाई करने वाला सिपाही कहा जा सकता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वे किसी भी तरह की हिंसा का समर्थक नहीं हैं। नक्सलियों और सरकार दोनों को शांति के लिए हिंसा का रास्ता छोड़ना होगा।
सरकार बस्तर से फोर्स हटाकर बातचीत की पहल करनी चाहिए। हिंसा से गरीब आदिवासी ही पीड़ित हैं। उनका जीवन बिखर चुका है। नक्सली वारदातों के संबंध में उन्होंने कहा नक्सलियों बंदूक छोड़कर समझौते का विकल्प तलाशना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप से इस समस्या का हल निकाला जा सकता है। डा. सेन ने अपने केस के बारे में किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक यह समझ नहीं आया कि आखिर उनकी गिरफ्तारी क्यों की गई?
जमानत न दिए जाने का कारण भी समझ से परे है। यहां तक कि उनके वकील मित्र भी हैरान हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने मकसद से नहीं हटेंगे। सेन ने सलवा जुडूम बंद करने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि सलवा जुडूम से आदिवासियों को जान का खतरा महसूस होने लगा है।
इस वजह से वे दूसरे राज्यों में पलायन करने लगे हैं। यह किसी भी सूरत में बंद होना चाहिए। इसके लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी। डा. सेन की पत्नी एलीना सेन ने अपनी पति की रिहाई पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें एक न एक दिन न्याय मिलने की उम्मीद थी।
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