इंदौर. वार्ड परिसीमन का प्रारंभिक प्रस्ताव कागजों पर तो भाजपा के लिए फायदे का सौदा माना जा रहा है। पार्टी की कोशिश तीसरी बार निगम की सत्ता पर काबिज होने की है और उस दिशा में इसे एक अहम कदम माना जा रहा है।
15 साल और तीन चुनाव के बाद होने जा रहे इस परिसीमन के लिए जब तैयारी शुरू की गई थी तभी यह माना गया था कि चूंकि निगम की सत्ता पर भाजपा काबिज है और तीसरी बार वह फिर इसे हथियाना चाहेगी इसलिए जो प्रस्ताव तैयार होगा उसमें कहीं न कहीं उसका पक्ष तो मजबूत रहेगा ही।
बाद में घुसी राजनीति
प्रस्ताव तैयार करने वालों ने मैदानी स्तर पर जमकर मेहनत की। उन्होंने बुरी तरह बिखरे वार्डो को भौगोलिक स्थिति के मुताबिक संतुलित किया। इस बात की कोशिश की कि रेल लाइन, ओवरब्रिज तथा मेनरोड लांघने की नौबत न आए। 15-20 दिन पहले तक ये प्रस्ताव राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त थे।
ऐसे शामिल हुई राजनीति
करीब 15 दिन पहले जब यह प्रस्ताव तैयार हुए और महापौर के ध्यान में लाए गए तो इसमें राजनीति शामिल हो गई। महापौर द्वारा खुलासा करने के बाद भाजपा विधायकों व पार्टी पदाधिकारियों ने इसमें अपनी इच्छानुसार बदलाव करवाए। उन्होंने पार्टी में ही अपने विरोधियों को कागजों पर निपटा दिया और चहेतों के लिए अनुकूल स्थिति निर्मित करवा दी।
परिसीमन का जो ताजा खाका सामने आया है वह स्पष्ट करता है कि भले ही जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए वार्डो की भौगौलिक स्थिति का निर्धारण किया गया है लेकिन इसमें कहीं न कहीं भाजपा की पसंद का भी ध्यान रखा गया है।