मंगलवार को घोषित हुए सीबीएसई दसवीं के नतीजों के बाद विभिन्न स्कूलों से जुड़े शिक्षाविदों ने पेपर स्कैन किया और बताया कौन से सवाल स्टूडेंट्स के लिए खुशियों के दरवाजे खोलने में मददगार साबित हुए हैं।
मैथ्स : मैथड से मिली कामयाबी
इस बार भी मैथ्स हाई स्कोरिंग सब्जेक्ट साबित हुआ। ज्यादातर टॉपर्स मैथ्स में सौ में से पूरे सौ लाने में कामयाब रहे हैं। सीबीएसई में फिक्स पैटर्न पर आधारित सवाल पूछे। 80 मार्क्स के पेपर में एक-एक मार्क्स के 10 सवाल, 2 मार्क्स के 5 सवाल, 3 मार्क्स के 10 सवाल और 6 मार्क्स के 5 सवाल पूछे गए थे। पेपर में घुमावदार सवालों की कमी के कारण स्टूडेंट्स के लिए यह बिलकुल स्ट्रेट फॉरवर्ड साबित हुआ। छह मार्क्स का ओजिव का सवाल पूछा जाना पैटर्न में बड़ा बदलाव था। इसके सही जवाब 46.4 था, लेकिन ज्यादातर जवाब 46 से लेकर 47 के बीच आए। सीबीएसई ने इस बीच के सभी जवाब को सही माना और पूरे मार्क्स दिए। जिन स्टूडेंट्स को उम्मीद से कम मार्क्स मिले उनमें से ज्यादातर ने एलजेब्रा की वर्ड प्रॉब्लम और वॉल्यूम एंड सरफेस एरिया के जवाब गलत दिए थे। जो 97 से 99 मार्क्स लाए हैं वे सही मैथड के बावजूद जवाब नहीं दे सकें। - अमर पालीवाल सीनियर फैकल्टी मैथेमेटिक्स
सोशल साइंस में भी पूरे सौ
हिस्ट्री, इकोनॉमिक्स, ज्योग्राफी और सिविक्स के कॉम्बिनेशन में भी स्टूडेंट्स ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया हैं। शहर के करीब १५ स्टूडेंट ऐसे है जिन्हें पूरे सौ मार्क्स मिले। सीबीएसई की कोशिश रही कि इस पेपर से वे एवरेज स्टूडेंट्स के बीच में से टॉपर निकाल सके इसलिए सिविक्स, हिस्ट्री, ज्योग्राफी और इकोनॉमिक्स की अप्रोच अलग-अलग होने के बावजूद इनके सवालों में सामंजस्य था। इसमें करेंट अफेयर्स से जुड़े सवालों पर ज्यादा ध्यान दिया गया। हिस्ट्री में उन स्टूडेंट्स ने बेहतर किया इसका तुलनात्मक अध्ययन वर्तमान स्थितियों से किया था। सामयिक घटनाओं की जानकारी रखने की बढ़ती आदत के कारण अब सिविक्स भी कठिन नहीं रहा है। ज्योग्राफी में एक सवाल को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बनी जिसमें फसल की पिक्चर देखकर उसका नाम बताना था। विजन क्लियर नहीं होने से स्टूडेंट इसमें कन्फ्यूज रहे। - प्रदीप जोशी, सोशल साइंस एक्सपर्ट साइंस : हुई फायदों की रिएक्शन
पिछले दो सालों से पूछे जा रहे मल्टीपल च्वॉइस क्वेश्चंस ने इस बार भी पूरे मार्क्स पर कब्जा जमाने का ऑप्शन दिया। पिछले साल के मुकाबले पेपर आसान रहा। इसे एवरेज स्टूडेंट्स को ध्यान में रखकर तैयार किया था। केमिस्ट्री, फिजिक्स और बायोलॉजी तीनों ही पोर्शन में २क्-२क् मार्क्स के सवाल पूछे गए। कैमिस्ट्री में रटने वाला ट्रेंड अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। जिन स्टूडेंट ने के मिस्ट्री की रिएक्शंस रटने के बजाय समझी उनके लिए यह फायदे का सौदा रही हैं। इस बार नेम रिएक्शन ज्यादा पूछी गई। बायोलॉजी में ज्यादा लंबे और उलझे सवालों की बजाय टू द प्वॉइंट सवाल पूछे गए। डायग्राम में मिलने वाले पूरे मार्क्स ने स्कोर करने में मदद की है। ज्यादातर स्टूडेंट्स ने फीजिक्स में पूछे गए डेरिवेशंस के बिलकुल सटीक जवाब दिए। लॉजिकल सवालों ने भी अच्छी मदद की है। फिजिक्स में सिर्फ न्यूमरिकल्स कठिन रहे। - अविनाश मोयदे, साइंस एक्सपर्ट
इंग्लिश: ग्रामर कम स्कोरिंग रहा
इंग्लिश का पेपर पिछले साल की तुलना में आसान था, क्वेशचन बिल्कुल कॉमन टॉपिक्स से पूछे गए थे। इस बार ट्रिकी की जगह साधारण क्वेशचन रहे। रिडींग, राईटिंग, ग्रामर और लिटरेचर पोर्शन में केवल ग्रामर ही रहा जो इनकी तुलना में कम स्कोरिंग रहा। लिटरेचर और राइटिंग में स्टूडेंट्स अधिक रुचि से पढ़ाई करते हैं। लेकिन स्पेलिंग मिस्टेक के कारण इसमें नम्बर कटने की संभावना काफी अधिक रहती है। ग्रामर के 20 में 20 नम्बर पाने के लिए इसकी प्रैक्टिस जरूरी है। इस बार इंग्लिश में कई स्टूडेंट्स जहां 95 से अधिक नम्बर लाने में सफल रहे तो कई ऐसे भी रहे जिन्होंने मैथ्स में १क्क् नम्बर लाने के बाद भी इस विषय में 90 से भी कम अंक प्राप्त कर पाए। विषयों में अंकों का अंतर आने का कारण भाषा के प्रति बच्चों की घटती रुचि है। अगर बच्चे फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स जैसा ही इंग्लिश पर भी ध्यान दें तो वे पीसीएम के समान ही सफल हो जाएगें। - दत्ता गुप्ता, इंग्लिश एक्सपर्ट
ुहिंदी: बाकी जैसा ही ध्यान दें
बढते कॉम्पटिशन के कारण हिंदी स्कोरिंग पेपर बनता जा रहा है। इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीबीएसई१क्वीं के रिजल्ट में कई बच्चों के मार्क्स हिंदी में 95 से भी अधिक रहे। इस साल का पेपर पिछले साल की तुलना में आसान रहा। इस बार न केवल पेपर पैर्टन बदला बल्कि कठिन व्याकरण को भी आसान किया गया। इसका एक कारण यह भी समझ में आता है कि बच्चों का हिंदी के प्रति रुझान को बनाए रखा जाए। हिंदी समझना आसान होता है लेकिन कई बच्चे ऐसे भी रहे जिन्होंने फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (पीसीएम) में तो बहुत अच्छे रिजल्ट किए लेकिन हिंदी में इनके मुकाबले बेहतर करने से चूक गए। ऐसा इसलिए कि बच्चे जितना अधिक इन तीनों पर दे पाते हैं उसके मुकाबले हिंदी में मेहनत नहीं कर पाते। इस पर ध्यान दे तो पीसीएम जैसा ही स्कोर कर सकते हैं। - मीना नायर, हिंदी एक्सपर्ट