रामगंजमंडी. क्षेत्र में भले ही अधिकरी बदलते रहे हो, लेकिन शहर से कुछ दूरी पर स्थित कुदायला खाÝ की हालात नहीं सुधर पाए हैं। इस खाÝ में बडी मात्रा में डाले जा रहे कोटा स्टोन के मलबे से इसकी भराव क्षमता ही समाप्त हो गई है। यदि खाÝ से कोटा स्टोन का मलबा नहीं हटाया गया तो कुदायला गांव में फिर बाढ़ के हालात बन सकते हैं।
प्रशासन ने कुदायला खाÝ से कोटा स्टोन का मलबा हटाने के लिए मंगलवार को २२ कोटा स्टोन उद्यमियों को नोटिस जारी किए हैं। कुदायला खाÝ में बारिश में कुदायला के अलावा रामगंजमंडी, खैराबाद सहित आसपास के गांवों का पानी आता है। तेज बारिश होने पर कुदायला खाÝ में उफान आ जाता है। इससे बस्तियों में पानी भर जाता है।
२क्क्६ में हुई तेज बारिश से भी कुदायला में पानी भरने पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था। कुदायला खाÝ में औद्योगिक क्षेत्र में स्थित करीब २५-३क् कोटा स्टोन फैक्ट्रियों का मलबा डाला जाता है। साथ ही विभिन्न स्थानों पर खाÝ पर अतिक्रमण होने से यह कई जगह सिकुड गया है। राजस्व रिकार्ड में ८क् फीट चौडा खाल कई स्थानों पर महज आठ फीट का रह गया है।
दो जगह तो बिना प्रशासन की स्वीकृति के कोटा स्टोन उद्यमियों ने खाÝ पर पुलिया बना ली। बारिश शुरू हो जाती है, लेकिन मलबा नहीं हटता। बीते वर्षो में अधिकारी तो बदले, लेकिन खाÝ के हालात नहीं बदल सके। आज भी खाÝ में अवैध रुप से कोटा स्टोन का मलबा डालने का सिलसिला जारी है। गत वर्ष प्रशासन ने २६ जनों को कोटा स्टोन का मलबा हटाने का नोटिस दिया था।
इसके बाद भी उद्यमियों ने मलबा नहीं हटाया था। तत्कालीन एसडीएम ने नगरपालिका से मलबा हटाने और उसका खर्च उद्यमियों से वसूलने के निर्देश दिए थे। नगरपालिका ने जेसीबी तो चलवाई, लेकिन पूरा मलबा नहीं हट सका। बारिश सिर पर है और प्रशासन ने पटवारियों की रिपोर्ट के बाद मंगलवार को २२ उद्यमियों को सीआरपीसी की धारा १३३ के तहत नोटिस जारी कर सात दिन में मलबा हटाने के निर्देश दिए हैं।
कुदायला खाÝ में कोटा स्टोन का मलबा डालने के बारे में पटवारी से रिपोर्ट मांगी थी। इसके आधार पर २२ कोटा स्टोन उद्यमियांे को धारा १३३ के तहत नोटिस जारी कर सात दिन में खाÝ से कोटा स्टोन का मलबा हटाने के निर्देश दिए हैं। फिर भी मलबा नहीं हटाने पर आगे कार्रवाई की जाएगी। -डॉ बीबी गोयल तहसीलदार, रामगंजमंडी।
महज खानापूर्ति हुई, मलबा यथावत
प्रति वर्ष बारिश से पूर्व कुदायला खाÝ से कोटा स्टोन का मलबा हटाने की महज खानापूर्ति की जाती है। गत वर्ष ११ जून को तत्कालीन एसडीएम अशोक कुमार शर्मा ने खाÝ का निरीक्षण कर अतिक्रमण व मलबा डालने के मामले में पटवारी के साथ कोटा स्टोन उद्यमियों को भी लताड पिलाई थी, लेकिन इसके बाद भी हकीकत में मलबा नहीं हट सका।
गत वर्ष बारिश कम होने से भी कुदायला खाÝ में बाढ़ के हालात नहीं बने थे। यदि गत वर्ष तेज बारिश होती तो कुदायला के साथ आसपास की बस्तियों में भी पानी भर जाता। कस्बे वासियों को डर है कि कहीं इस बार भी वैसे ही हालात न जाएं। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग की है।