झज्जर. वन विभाग में पौधारोपण और मजदूरी के नाम पर हुए पांच करोड़ रुपए के घोटाले में संलिप्त लोगों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। वन परिमंडल की जांच रिपोर्ट आने के बाद वन संरक्षक रोहतक परिमंडल ने तीन ब्लाकों के दारोगा को सस्पेंड कर दिया।
इस घोटाले की पांच डीएफओ से जांच कराई गई थी और सभी ने वन संरक्षक को रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए वन संरक्षक अनिल हुड्डा ने सुबाना ब्लाक के राजेश कुमार, बेरी ब्लाक के उमेद सिंह राठी और बहादुरगढ़ ब्लाक के वजीर सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। इस मामले की परतें तब खुलनी शुरू हुई जब मजदूरों ने मेहनताने की मांग को लेकर वन मंडल कार्यालय पर धरना दिया था। जब डीएफओ झज्जर ने इसकी तहकीकात कराई तो मामला कुछ और निकला।
इसपर विभाग के आला अधिकारियों ने रोहतक परिमंडल के पांच जिलों झज्जर, रोहतक, पानीपत, करनाल और सोनीपत के डीएफओ को जांच सौंपी। इनकी रिपोर्ट में तीनों ब्लॉकों में पौधारोपण के नाम पर भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ। पता चला कि काम से कई गुणा ज्यादा बिल विभाग को थमाया गया था।
यही नहीं, तीनों ब्लाकों में जिस मात्रा में पौधारोपण होना था वह हुआ ही नहीं, बल्कि जो पौधे रोपे गए न तो उनका रखरखाव हुआ और ऐसे मौसम में रोप दिए गए जो पौधारोपण के लिहाज से अनुकूल नहीं था। इनमें सबसे ज्यादा लापरवाही बेरी ब्लॉक में बरती गई।
यहां वास्तविकता से दस गुणा ज्यादा के फर्जी बिल बनाकर विभाग को सौंप दिए गए और लापरवाही छिपाने के लिए बेमौसमी पौधे भी रोप दिए गए। गौरतलब है कि इस मामले को सबसे पहले भास्कर ने प्रभावी ढंग से उठाया था।
फसेंगी बड़ी मछलियां?
इस घोटाले में शक की सूई अब अधिकारियों पर भी घूम रही है। सूत्रों का कहना है कि इतना बड़ा घोटाला अकेले कर्मचारी नहीं कर सकते, इसमें कहीं न कहीं विभाग के आला अधिकारी भी शामिल रहे होंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर जांच पूरी निष्पक्षता के साथ हुई तो कई बड़ी मछलियों के नाम सामने आ सकते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन वन दारोगा को सस्पेंड कर दिया गया है। इस मामले में जैसे निर्देश अधिकारियों से मिलेंगे, उसी के अनुरूप की जाएगी। - संजीव चतुर्वेदी, डीएफओ झज्जर