नागौर । पानी का एक टैंकर आते ही मोहल्लेवासी घर-घर मुनादी करते हैं कि पानी भर लो। मुनादी होते ही महिलाएं अपने अपने बर्तन लेकर तोपचौक की तरफ दौड़ती है। पीछे पीछे उनके बच्चे भी बर्तन लेकर दौड़ते हैं। देखते ही देखते पानी भरने वाली महिलाओं की कतार लग जाती है।
कतार में महिलाओं की संख्या 10-12 से शुरू होकर 115 तक पहुंच जाती है। कतार में खड़ी एक महिला का अपने बर्तनों में पानी भरने का नंबर एक घंटे बाद आता है। पिछले छह माह से जलसंकट से त्रस्त इस मोहल्ले में भले ही जलदाय विभाग टेंकरों से जलापूर्ति करवा रहा हो मगर एक घड़ा पानी लेने के लिए गर्मी में उनके पूरे शरीर का पानी निकल रहा है।
ये दर्द भरी दास्तान लोहारपुरा के तोप चौक सहित शहर के भीतरी भागों में जलसंकट से जूझ रहे शहरवासियों की है। जलदाय विभाग भीषण गर्मी में दोपहर के समय टैंकरों से जलापूर्ति करवा रहा है। अपने घरेलू कामकाज निबटाकर दो घड़ी आराम करने की जुगत बिठाने वाली महिलाओं को जब टैंकर आने की सूचना दी जाती है तो मानो उनके अरमानों पर ही पानी फिर जाता है मगर जलदाय महकमा सहित प्रशासन इससे बेखबर है।
अनेक महिलाओं ने बताया कि प्रशासन को अलसुबह ही जलापूर्ति करनी चाहिए या फिर शाम को मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं करता। तपती दोपहरी और लम्बी कतारों में खड़े होकर महिलाएं एक घड़े पानी के लिए घंटों इंतजार करती देखी जा रही है।
जलदाय विभाग भी इन टैंकरों को संकट वाले इलाकों के लोगों की अग्नि परीक्षा लेने के लिए तपती दोपहरी में ही भेजता है। एक घड़ा पानी प्राप्त करने के बाद पप्पू भी अपनी मां के पास जाकर इतराता है कि उसने भीषण गर्मी में पूरे दो घण्टे अनुशासित खड़े रहकर एक घड़ा पानी लाने में सफलता हासिल की है।
शहर के अनेक मोहल्ले तो ऐसे है जहां पानी का एक-एक कतरा हासिल करने के लिए लोग जद्दोजहद कर रहे हैं। वहीं दूसरी और उन्हीं मोहल्लों में कई एप्रोचेबल लोगों के घर सिटी के नाम पर जारी होने वाले टैंकर भी धड़ल्ले से खाली हो रहे हैं।
कागजों में तो पानी के टैंकर और जलापूर्ति सुचारू है और सिंटेक्स की टंकियां भी रखवा दी है मगर जिन मोहल्लों में दिक्कत है उन तक शायद आज भी पानी नहीं पहुंच पाया है।
जलदाय विभाग कंटीजेंसी प्लान की फाइल को भी भले ही एचीव टारगेट लिखकर फाइलों में दफन कर रहा हो मगर सच तो यह है कि पानी के वास्तविक उपभोग से चौथाई पानी भी अनेक मोहल्लों के बाशिंदों को नसीब नहीं हो रहा है।
इस तरह हो रही है जलापूर्ति
जलदाय विभाग के अनुसार प्रतिदिन नागौर सिटी में ४५ से ५क् टैंकर जलसंकट वाले इलाकों में सप्लाई किए जा रहे हैं। इसी प्रकार ५क् प्रतिशत शहरी क्षेत्र में ७२ घण्टे में एक बार जलापूर्ति हो रही है वहीं २९ जोन में ९६ घण्टे में पानी की सुचारू सप्लाई की जा रही है।
शहर में जल संकट वाले अनेक क्षेत्रों में ३३ सिंटेक्स टंकिया रखवा दी गई है मगर इसके बाद भी जलसंकट से निजात नहीं मिल रही है।
पिछले दिनों फागली व जनाना में सूखे नलकूपों की एवज में रूण में दो नए नलकूप भी शुरू हो गए मगर इसके बाद भी प्रतिदिन जल उत्पादन का आंकाड़ा 60 लाख के पार नहीं जा रहा है जबकि शहरवासियों को प्रतिदिन एक करोड़ 15 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है।