लखनऊ.
अपनी भीनी खुशबू और स्वादिष्ट आम के लिए विदेशों में भी मशहूर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद और काकोरी इलाके में पैदा होने वाला दशहरी आम इस बार खास लोगों को ही नसीब हो सकेगा। पिछले सौ साल के इतिहास में अभी तक ऐसा नहीं हुआ कि दशहरी की पैदावार इतनी कम हुई हो।
इसके व्यापार तथा निर्यात में लगे लोग भी आम की पैदावार में इस साल रिकॉर्ड गिरावट का कारण खोजने में लगे हैं। आम तौर पर दशहरी इस वक्त तक बाजार में आ जाता था लेकिन इस बार बाजार में इसकी आमद अभी तक नहीं हो पाई है। यहां तक कि खाड़ी के देशों में भी दशहरी आम का इन्तजार हो रहा है।
लखनऊ का माल-मलिहाबाद और काकोरी इलाका आम पट्टी के लिए जाना जाता है लेकिन इस बार की तरह आम के पेड़ इतने बेरौनक कभी नहीं थे। किसी-किसी पेड़ पर ही एक-दो आम दिखाई दे रहे हैं। इन तीन प्रखंडों की आम पट्टी में पिछले साल की तुलना में पांच प्रतिशत आम भी इस बार पेड़ों पर नहीं हैं।
किस्म-किस्म के आम पैदा करने वाले तथा आमों के बीच 65 साल गुजार चुके पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित कलीमुल्ला ने कहा कि पेड़ों पर इतने कम आम तो कभी नहीं दिखाई दिए। उन्होंनें कहा कि आम के पेड़ बिना फल के अधूरे नजर आते हैं। कारण वह भी नहीं बता पाते।
उन्होंने कहा कि पता नहीं इस बार ऐसा क्यों हुआ है। पिछले साल आम की पैदावार अच्छी हुई थी। आम की पैदावार एक साल के अंतर पर अच्छी होती है। ऐसा देखा गया है कि अगर पिछले साल अच्छी फसल हुई तो इस साल कम होगी लेकिन इस साल इतनी कम पैदावार होगी इसका किसी को अनुमान नहीं था।
कलीमुल्ला ने बताया कि,‘पैदावार कम होने से उसकी कीमत बाजार में काफी ज्यादा होगी जो आम आदमी की पहुंच से बाहर होगी तथा आम इस बार खास हो जाएगा। जिसका स्वाद खास लोग ही ले पाएंगे।’