इंदौर. हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर विकास प्राधिकरण को आदेश दिए हैं कि वह निर्माणाधीन सुपर कॉरिडोर के रेल ओवरब्रिज (आरओबी) की टेंडर प्रक्रिया में अरविंद टेक्नो को भी शामिल करे। अब प्राधिकरण फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा।
हाईकोर्ट की डबल बेंच के जस्टिस ए.एम. सप्रे और प्रकाश श्रीवास्तव ने आदेश में कहा प्राधिकरण टेक्निकल बिड के बाद की प्रक्रिया फिर करे और जो कंपनी योग्य हो, उसे ठेका दे। प्राधिकरण ने जून-08 में सुपर कॉरिडोर (स्कीम-151) पर इंदौर-रतलाम मीटरगेज रेल लाइन पर आठ लेन का आरओबी बनाने के लिए निविदाएं बुलवाई थीं। इसमें शर्त थी कि जॉइंट वेंचर कंपनियां अलग-अलग टेंडर नहीं डाल सकेंगी।
टेंडर प्रक्रिया में अरविंद टेक्नो और एसपी सिंगला कंपनी ने अलग-अलग टेंडर डाले थे। तब प्राधिकरण ने यह कहते हुए कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया था कि दोनों कंपनियां एक प्रोजेक्ट में पार्टनर रह चुकी हैं इसलिए वे अलग-अलग टेंडर नहीं डाल सकतीं। इसके बाद प्राधिकरण ने सितंबर-08 में आरओबी का ठेका महू की पाथ इंडिया को दे दिया था। उसने प्राधिकरण को 45 करोड़ रु. में ब्रिज बनाने का प्रस्ताव दिया था।
इस निर्णय के खिलाफ अरविंद टेक्नो ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। बहरहाल, हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्राधिकरण ने बुधवार को विधिक राय ली तो वहां से सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की सलाह दी गई। प्राधिकरण अध्यक्ष मधु वर्मा ने फैसले की पुष्टि करते हुए कहा हम फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रहे हैं।
उलझता जा रहा है कॉरिडोर
सुपर कॉरिडोर के काम में शुरुआत से कुछ न कुछ अड़चन आती रही। पहले कॉरिडोर की टेंडर प्रक्रिया और कॉन्ट्रेक्टर कंपनी पर सवाल उठे। इसके बाद मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम ने प्राधिकरण को उज्जैन रोड जंक्शन पर उज्जैन रोड के समानांतर फ्लायओवर बनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
इसी दौरान वन विभाग ने कॉरिडोर की कुछ जमीन पर अपना दावा कर दिया और प्राधिकरण को काम रोकना पड़ा। हालिया स्थिति में कॉरिडोर पर सड़क के 25 से 30 फीसदी हिस्से में काम हो रहा है। सड़क तो बन रही है लेकिन आरओबी के ठिकाने नहीं हैं। इसमें कम से कम डेढ़ साल लगेंगे। मार्च-10 तक सड़क बन जाएगी लेकिन बगैर आरओबी के किसी काम की नहीं होगी।
लापरवाह कंपनी को कैसे दे दें काम?
प्राधिकरण अधिकारियों ने कहा अरविंद टेक्नो कंपनी जूनी इंदौर आरओबी का काम अब तक पूरा नहीं कर पाई है। लापरवाही के कारण प्राधिकरण ने उससे केसरबाग आरओबी का काम छीन लिया था। पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाए जा रहे राजेंद्रनगर आरओबी को लेकर भी कंपनी गंभीर नहीं लगती। ऐसी कंपनी को ठेका कैसे दे सकते हैं? तकनीकी रूप से भी प्राधिकरण कंपनी को ठेका नहीं दे सकता क्योंकि उसे केसरबाग आरओबी के काम से खराब प्रदर्शन के कारण हटा दिया गया है।