जोधपुर. राजस्थान आयुर्वेद यूनिवर्सिटी ने यूनिवर्सिटी व अन्य संबद्ध महाविद्यालयों से होने वाली पीएचडी को और अधिक व्यावहारिक बनाने की तैयारी कर ली है। कुलपति प्रो. बनवारी लाल गौड़ ने पीएचडी के नियम संशोधित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे गुरुवार को यूनिवर्सिटी की एकेडमिक काउंसिल में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। कुलपति प्रो. गौड़ ने बताया कि एकेडमिक काउंसिल की बैठक में कुछ ऐसे बिंदु रखे जाएंगे, जिनके अनुमोदन से अब तक हो रही अनियमितताओं पर अंकुश लग सकेगा।
विरोध के बाद कुलपति का जवाब
दूसरी तरफ संस्थान के नियमित पीएचडी स्कॉलरों व प्रोफेसरों ने आरोप लगाया है कि यह सब ‘निजी स्वार्थो’ के चलते हो रहा है। लेकिन प्रो. गौड़ ने यह स्पष्ट किया है कि मात्र सिनोप्सिस जमा करवाने से ही पीएचडी करने का अधिकार नहीं बन जाता। इस संबंध में भी बैठक में चर्चा होगी। संबंधित शिक्षकों ने अपने मन से 28 तक सिनोप्सिस जमा करवाने की अंतिम तिथि निर्धारित की है। यूनिवर्सिटी की ओर से ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ था।
प्राइवेट पीएचडी का मामला
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की प्राइवेट पीएचडी के विवाद के चलते नियमों में भारी बदलाव की संभावना थी। इसी के चलते प्राइवेट डिग्री लेने के लिए सिनोप्सिस जमा कराने वाले अभ्यर्थियों की संख्या डेढ़ माह में 100 के पार पहुंच गई तथा पिछले कुछ दिनों में ही करीब 50 सिनोप्सिस जमा हुई हैं, क्योंकि रोक से पहले जमा होने वाली सिनोप्सिस को मान्यता की घोषणा पहले ही की जा चुकी है।
यूं बदल सकते हैं नियम
100 दिन की उपस्थिति पर संस्था प्रमुख का प्रमाणीकरण।
शोधार्थी जहां सर्विस करता है वहां से छुट्टी का प्रमाण पत्र।
छह माह बाद मूल्यांकन कमेटी के सामने प्रस्तुतिकरण।
मान्यता प्राप्त शोध पत्रिका में दो शोध पत्रों की स्वीकृति।
शोध प्रारूप शोधार्थी स्वयं प्रस्तुत करेगा।
हर सुपरवाइजर के पास निर्धारित संख्या में शोधार्थी होंगे।
संबंधित विषय का शिक्षक ही पीएचडी करवा सकेगा।