नुकसान कम, फायदा ज्यादा
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नुकसान कम, फायदा ज्यादा

इंदौर. Tax अप्रत्यक्ष करों के तहत केंद्र सरकार गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू करने जा रही है। राज्य सरकार इससे विचलित है। राजस्व में भारी नुकसान की दुहाई देते हुए उसने इसकी खिलाफत शुरू कर दी। वहीं औद्योगिक संगठन इस मामले के पक्ष में एकजुट हैं।

जीएसटी 1 अप्रैल 2010 से लागू होना है। नई कर प्रणाली के साथ 2010-11 में राज्य के राजस्व में 800 करोड़ के नुकसान की दुहाई देते हुए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान कड़ी आपत्ति ले रहे हैं। उनका कहना है नुकसान का आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ता जाएगा। दूसरी ओर जीएसटी के समर्थन में उद्योग व उनके जुड़े संगठन एक जाजम पर नजर आने लगे हैं। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी का कहना है जीएसटी औद्योगिक संगठनों की पुरानी मांग है। आम राय के बगैर मुख्यमंत्री का अकस्मात विरोध जल्दबाजी है।

जीएसटी का विरोध होता है तो मप्र से उन निवेशकों का पलायन पक्का है जो हजारों करोड़ के निवेश प्रस्ताव देकर बैठे हैं। शुरुआती दौर में थोड़ा-बहुत नुकसान होता है, हालांकि उसके लिए भी केंद्र भरपाई का आश्वासन दे चुका है। पेट्रोल में गुजरात और मप्र में लगने वाले सर्विस टैक्स में 18 प्रतिशत के अंतर का उदाहरण देते हुए एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज, देवास के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अशोक खंडेरिया ने बताया राज्य मनमाना टैक्स थोपते हैं।

जीएसटी से इस पर अंकुश लगेगा। वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) और उसके प्रभावी परिणामों का जिक्र करते हुए अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स के सुशील सुरेखा ने बताया जीएसटी की तरह वैट के विरोध के लिए भी राजस्व हानि की दुहाई दी गई थी।

आज परिस्थितियां अलग हैं। 2007-08 के 5,603.87 करोड़ के मुकाबले 2008-09 में 6,290.77 करोड़ यानी 12.24 प्रतिशत ज्यादा की वसूली की गई। व्यवस्था लागू करते वक्त मैदानी दिक्कतें हो सकती हैं। इन्हें छोटे से लेकर बड़े उद्योगपतियों और व्यापारियों से बात करके दूर किया जा सकता है। सीए जी.बी. अग्रवाल ने कहा जीएसटी पूरे देश में एक साथ लागू होता है तो उसका फायदा ज्यादा मिलेगा।

जीएसटी को प्रगतिशील और सकारात्मक पहलू करार देते हुए विंदास केमिकल्स के डॉ. दर्शन कटारिया ने बताया इससे कर चोरों को तकलीफ और व्यापार-उद्योगों को सुविधा होगी। सेंट्रल एक्साइज कलेक्शन का राज्य को अब तक 38 फीसदी हिस्सा मिलता था। अब 50 फीसदी मिलेगा। वैट 4 से बढ़कर 16 प्रतिशत हो जाएगा। 50 फीसदी के हिसाब से इसमें में भी 8 फीसदी हिस्सा राज्य का होगा यानी दुगुना।

नुकसान की बात बेमानी है। सरकार वैट के उस विरोध जैसी गलती न दोहराए जिसके कारण होंडा मोटर्स को तीन हजार करोड़ का निवेश प्रस्ताव रद्द करना पड़ा। मप्र टेक्सटाइल्स मिल्स के अध्यक्ष एम.सी. रावत ने बताया औद्योगिक विकास की दृष्टि से व्यवस्था नुकसानदेह नहीं है। यहां-वहां रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पूरी व्यवस्था एकीकृत होगी। रहा राजस्व में नुकसान का सवाल तो केंद्र जब तक वस्तुवार नीति तय नहीं करेगा, कुछ भी कहना मुश्किल है।

राज्य सरकार की आपत्ति

वनोपज, कपास, तिलहन से राज्य को टैक्स पेटे 288 करोड़ मिलते हैं। अंतिम खपत दूसरे राज्यों में होने से मप्र को 263.20 करोड़ रुपए का टैक्स नहीं मिलेगा। गैल इकाई, गुना में औद्योगिक ईंधन से मिलने वाला राजस्व 100 से घटकर 50 करोड़ रह जाएगा।

इंजीनियरिंग उद्योगों के माल से भी 100 के बजाय 50 करोड़ ही मिलेंगे। राज्य में होने वाली खरीदी-बिक्री से मिलने वाले 417.6 करोड़ रुपए का भी नुकसान। प्रदेश से केंद्र को 2008-09 में 513.18 करोड़ रुपए केंद्रीय विक्रय कर (सीएसटी) मिला। यह राशि 2007-08 के मुकाबले 7.86 प्रतिशत कम है। वैट 4 से बढ़कर 16 प्रतिशत होगा तो वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी जिसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

बाय इन्विटेशन कर चोरी घटेगी नौकरियां बढ़ेंगी

जीएसटी सरकार की विवेकशीलता का उदाहरण है जो अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए जरूरी है। इससे करदाताओं की संख्या बढ़ेगी, कर चोरी पर अंकुश लगेगा। जीएसटी से प्रदेश के टेक्सटाइल्स उद्योग, ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्रीज, रत्न उद्योग और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को नई पहचान मिलेगी। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा जीएसटी का विरोध निराधार और औद्योगिक विकास की भावना के विरुद्ध है।

वैट के साथ जीएसटी का आधार एनडीए ने रखा था। यूपीए सरकार इसे लागू करेगी। अब विपक्ष में बैठकर भाजपा इसके खिलाफ है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पिछड़ेपन की दुहाई देकर मप्र को जीएसटी से बचाना चाहते हैं। हालांकि कुछ समय पहले तक उनके भाषणों में ही मप्र देश के विकासशील राज्यों में एक नजर आता था। कुल मिलाकर विरोध के लिए किया जा रहा यह विरोध निराधार है। केंद्र और राज्य अलग-अलग टैक्स लेते हैं।

जीएसटी के तहत इन्हें मिलाकर एक टैक्स प्रणाली बनाई जाएगी। इससे टैक्स की विसंगतियां दूर होंगी। राज्यों का कलेक्शन भी बढ़ेगा। दोहरी कर प्रणाली से मुक्ति उद्योगों को मजबूती देगी। निवेश के साथ रोजगार भी बढ़ेंगे। मप्र में बुनियादी सुविधाएं दूसरे राज्यों के मुकाबले सस्ती है। इसीलिए प्रदेश जीएसटी के बाद निवेश के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। वैसे भी एंपावर्ड कमेटी उन राज्यों में भरपाई भी करेगी जहां जीएसटी से नुकसान की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में न नुकसान की बात ठीक है और न ही प्रणाली के विरोध की।
- राजेंद्र कोठारी, क्षेत्रीय निदेशक पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स



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