इंदौर में इस वर्ष शराब दुकानों की नीलामी के दौरान हुए साढ़े 16 करोड़ के चर्चित फर्जी ठेके मामले पर राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) भोपाल ने जांच प्रकरण पंजीबद्ध कर इंदौर ब्यूरो को विवेचना के आदेश दिए। ईओडब्ल्यू इंदौर के पुलिस अधीक्षक महेंद्रसिंह सिकरवार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा जल्द ही जांच शुरू की जाएगी।
जिला आबकारी विभाग ने इस साल 76 देशी व 42 विदेशी शराब दुकानों को लाटरी के जरिये 157 करोड़ 24 लाख रुपए में नीलाम किया था। बाद में शेष बची पुरानी व 17 नई दुकानों की नीलामी के लिए 69 करोड़ नौ लाख रुपए के टेंडर बुलाए गए थे। टेंडर खुलने के बाद नई दिल्ली के एक ठेकेदार नितिन शर्मा द्वारा 16 करोड़ की बोली लगाने का टेंडर फार्म ही फर्जी पाया गया।
उसने 16-16 हजार रुपए जमा कर पांच दुकानों के टेंडर भरे थे। उसमें लगाए गए टेलीफोन नंबर, बिजली के बिल, पेन कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस व फोटो भी फर्जी निकले। उसका नई दिल्ली का पता भी फर्जी निकला। ईओडब्ल्यू मुख्यालय भोपाल को की गई नामजद शिकायत में कहा गया कि ग्वालियर के एक बड़े ठेकेदार लल्ला शिवहरे व मुकेश शिवहरे को लाभ पहुचाने के लिए 16.50 करोड़ रुपए के टेंडर भरे गए थे।
सारे दस्तावेजों को गजेटेड अधिकारी द्वारा मूल दस्तावेजों से सत्यापित किया जाता है। सहायक आबकारी आयुक्त इंदौर ने चेहरा देखकर फोटो सत्यापन किया था जो बाद में फर्जी पाया गया।